दोस्तों! आजकल सोशल मीडिया पर एक वीडियो काफी वायरल हो रहा है जो उत्तर प्रदेश के जौनपुर से आया है। वीडियो में एक युवती, जो एक निजी अस्पताल में नर्स है, रोते-रोते अपनी आपबीती सुना रही है। वो आरोप लगा रही है कि अस्पताल के मैनेजर सूरज मौर्या ने उसे ऑपरेशन थियेटर में ले जाकर जबरदस्ती की और दरिंदगी की। ये सुनकर किसी का भी दिल दहल जाए। चलिए, आज इसी मामले पर सरल भाषा में बात करते हैं, दोनों पक्ष सुनते हैं और समझते हैं कि आखिर माजरा क्या है।
ये मामला जौनपुर के सराय ख्वाजा थाना क्षेत्र के अशोका हॉस्पिटल का बताया जा रहा है। पीड़िता नर्स ने अपने वीडियो में बताया कि शाम करीब 5 बजे मैनेजर ने उसे कुछ काम के बहाने बुलाया। फिर ऑपरेशन थियेटर में ले जाकर दरवाजा बंद कर दिया। उसने कहा – “मुझे जबरदस्ती बेड पर लिटाया, हाथ मरोड़कर पकड़ा, थप्पड़ मारा। मैं चिल्लाती रही, गिड़गिड़ाती रही, लेकिन वो नहीं रुका। मेरे साथ बहुत बुरा किया और जान से मारने की धमकी दी।” ये बयान सुनकर खून खौल उठता है। नर्स ने ये भी कहा कि वो विरोध करती रही, लेकिन कोई सुनने वाला नहीं था।
वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर हंगामा मच गया। कई लोग इसे महिलाओं की सुरक्षा पर बड़ा सवाल बता रहे हैं। खासकर वर्कप्लेस पर – जहां अस्पताल जैसी जगह, जो इलाज और भरोसे की जगह होती है, वहां अगर स्टाफ ही सुरक्षित नहीं, तो मरीजों का क्या? लोग पूछ रहे हैं कि बेटियां नौकरी करने जाएं तो कैसे जाएं? अगर रात की ड्यूटी या शाम को अकेले काम करना ही खतरा बन जाए तो? कुछ पोस्ट्स में तो सीधे सरकार और पुलिस की व्यवस्था पर सवाल उठाए जा रहे हैं।

दोस्तों, मैंने खुद कई वीडियो और पोस्ट्स देखे। पीड़िता की आवाज में दर्द साफ झलक रहा है। वो बार-बार रोते हुए अपनी बात दोहरा रही है। ऐसे में दिल करता है कि तुरंत न्याय मिले। लेकिन दूसरी तरफ, ये भी सच है कि ये अभी आरोप है। मैनेजर सूरज मौर्या का पक्ष अभी सामने नहीं आया है। कुछ लोकल रिपोर्ट्स में इसे छेड़खानी या अश्लील हरकत कहा गया है, लेकिन पीड़िता दुष्कर्म का आरोप लगा रही है। पुलिस ने क्या एक्शन लिया? कुछ सूत्रों के मुताबिक, मामला दर्ज कर जांच शुरू हो गई है। लेकिन अभी कोई गिरफ्तारी या ऑफिशियल स्टेटमेंट नहीं आया है।
सोचिए, अस्पताल में काम करने वाली महिलाएं कितनी मेहनत करती हैं। दिन-रात मरीजों की सेवा, इमरजेंसी में ड्यूटी, और ऊपर से ऐसे खतरे? जौनपुर जैसे छोटे शहर में निजी अस्पतालों में ज्यादातर महिलाएं ही नर्सिंग स्टाफ होती हैं। अगर मैनेजमेंट ही ऐसा व्यवहार करे तो भरोसा कैसे बनेगा? पहले भी देश में कई ऐसे मामले आए हैं जहां डॉक्टर या स्टाफ पर आरोप लगे। कभी साबित हुए, कभी नहीं। लेकिन हर बार महिलाओं की सुरक्षा पर डिबेट जरूर छिड़ जाती है।
मैंने सोचा – एक आम नर्स की जिंदगी कितनी मुश्किल होती है। कम सैलरी, लंबी शिफ्ट्स, और अब ये डर। पीड़िता ने वीडियो में कहा कि वो डर के मारे चुप थी, लेकिन अब बोल रही है ताकि दूसरे के साथ ऐसा न हो। ये हिम्मत की बात है। कई लोग सपोर्ट कर रहे हैं, कह रहे हैं कि आवाज उठाना जरूरी है। लेकिन कुछ लोग इसे पॉलिटिकल एंगल भी दे रहे हैं, क्योंकि वीडियो ज्यादातर विपक्षी अकाउंट्स से शेयर हो रहा है।
अधिकारियों से उम्मीद है कि जल्दी से निष्पक्ष जांच हो। अगर आरोप सही हैं तो सख्त सजा होनी चाहिए, ताकि दूसरों को सबक मिले। और अगर नहीं, तो भी पीड़िता को परेशान न किया जाए। अस्पतालों में सीसीटीवी, महिला स्टाफ के लिए सेफ्टी रूल्स – ये सब लागू करने की जरूरत है। सरकार की तरफ से भी महिलाओं की वर्कप्लेस सेफ्टी पर और स्ट्रिक्ट कानून चाहिए।
दोस्तों, ऐसे मामलों में हमें संवेदनशील रहना चाहिए। पीड़िता का सपोर्ट करें, लेकिन अफवाहें न फैलाएं। पुलिस जांच का इंतजार करें। महिलाओं की सुरक्षा हम सबकी जिम्मेदारी है। अगर आपके आसपास कोई ऐसा केस हो तो चुप न रहें, आवाज उठाएं।
आपका क्या विचार है? क्या वर्कप्लेस पर महिलाओं के लिए और सेफ्टी चाहिए? कमेंट में बताइए। अगर पोस्ट अच्छी लगी तो शेयर कीजिए, ताकि जागरूकता फैले।
Report : ismatimes news desk.
