बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री श्री कृष्ण सिंह उर्फ श्री बाबू की 65वीं पुण्यतिथि पर भावपूर्ण कार्यक्रम

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औरंगाबाद : बिहार के प्रथम मुख्यमंत्री और बिहार केसरी के नाम से प्रसिद्ध श्री कृष्ण सिंह उर्फ श्री बाबू की 65वीं पुण्यतिथि के अवसर पर एक गरिमामय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में मंच से रफीगंज विधानसभा क्षेत्र संख्या–224 से नवनिर्वाचित जदयू विधायक एवं समाजसेवी प्रमोद कुमार सिंह ने अपने विचार रखे और श्री बाबू के योगदान को याद किया।

कार्यक्रम में औरंगाबाद सदर विधानसभा क्षेत्र संख्या–223 से पहली बार भाजपा विधायक बने त्रिविक्रम नारायण सिंह, कुटुंबा विधानसभा क्षेत्र संख्या–222 से पूर्व जदयू विधायक एवं वर्तमान हम पार्टी (सेक्युलर) के विधायक ललन भुइयां उर्फ ललन राम, तथा गोह विधानसभा क्षेत्र संख्या–219 से पूर्व जदयू विधायक डॉ. रणविजय सिंह उर्फ रणविजय शर्मा भी मौजूद रहे। सभी जनप्रतिनिधियों ने अपने-अपने अंदाज़ में श्री बाबू द्वारा किए गए ऐतिहासिक कार्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला।

15 वर्षों तक बिहार को दिशा देने वाला नेतृत्व

वक्ताओं ने कहा कि श्री कृष्ण सिंह उर्फ श्री बाबू कोई साधारण राजनेता नहीं थे, बल्कि वे एक दूरदर्शी और मजबूत इरादों वाले नेता थे। वे लगातार 15 वर्षों तक बिहार के मुख्यमंत्री रहे, जो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है। इस दौरान उनकी जोड़ी बिहार विभूति अनुग्रह नारायण सिंह उर्फ अनुग्रह बाबू के साथ रही, जो आपसी विश्वास और सहयोग की एक बेहतरीन मिसाल मानी जाती है।

विकास और सामाजिक सुधार दोनों पर बराबर ज़ोर

कार्यक्रम में बताया गया कि जब श्री बाबू बिहार के पहले मुख्यमंत्री बने, उस समय राज्य के सामने कई बड़ी चुनौतियाँ थीं। इसके बावजूद उन्होंने बिहार को औद्योगिक और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में आगे बढ़ाने का काम किया। बरौनी में तेल रिफाइनरी, सिंदरी में खाद कारखाना, और पटना में राजेंद्र पुल जैसे महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट उन्हीं की दूरदर्शी सोच का नतीजा थे।

इतना ही नहीं, सामाजिक न्याय के क्षेत्र में भी उन्होंने ऐतिहासिक फैसले लिए। उन्होंने दलित समाज के लोगों को देवघर स्थित बाबा भोलेनाथ के मंदिर में पहली बार प्रवेश दिलाया। खास बात यह रही कि वे स्वयं भूमिहार समाज से आते थे और उस दौर में जमींदारी प्रथा प्रचलित थी, फिर भी उन्होंने साहसिक निर्णय लेते हुए बिहार में जमींदारी प्रथा को समाप्त कराया।

आज भी सीख देने वाले श्री बाबू के विचार

वक्ताओं ने कहा कि श्री बाबू ने बिना भेदभाव के हर वर्ग के लिए काम किया। उनका जीवन और उनके फैसले आज भी समाज के लिए प्रेरणा हैं। अगर हम उनके विचारों और सिद्धांतों पर चलें, तो सही मायनों में सभी वर्गों का कल्याण संभव है।

कार्यक्रम का माहौल श्रद्धा और सम्मान से भरा रहा, और सभी ने एक स्वर में कहा कि श्री बाबू का योगदान बिहार के इतिहास में हमेशा अमर रहेगा।

रिपोर्ट : अजय कुमार पांडेय.

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