मुजफ्फरपुर : मुजफ्फरपुर में सड़क पर कुत्तों के बढ़ते आक्रामक व्यवहार ने लोगों की सुरक्षा को गंभीर चुनौती में डाल दिया है। जिला प्रशासन, पशु विभाग और नगर निगम की कथित लापरवाही और असमर्थता के कारण कुत्तों के काटने के मामले लगातार बढ़ रहे हैं।
सदर अस्पताल, पी.एच.सी., सी.एच.सी. और उप-विभागीय स्वास्थ्य केंद्रों में कुत्तों के काटने के घायलों की संख्या दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है। रिकॉर्ड बताते हैं कि यह समस्या ग्रामीण इलाकों में भी तेजी से फैल रही है, और कुछ मौतें भी हुई हैं, जिनमें ज्यादातर शिकार बच्चे और बुजुर्ग बने हैं।
कुत्तों के हमलों से सड़क दुर्घटनाओं और गंभीर चोटों की घटनाएँ भी बढ़ गई हैं। सुबह की सैर या पार्क में खेलना भी अब जोखिम भरा हो गया है। व्यस्त सड़कों पर कुत्ते आक्रामक होकर बाइक दुर्घटनाओं और गंभीर चोटों का कारण बन रहे हैं। झुंड में रहने के कारण ये ज्यादा हमलावर होते हैं और कभी-कभी बकरी या गाय जैसे घरेलू जानवरों पर भी हमला कर देते हैं।
पशु चिकित्सकों के अनुसार मौसम में बदलाव के कारण भी कुत्तों का स्वभाव उग्र हो जाता है। स्वास्थ्य केंद्रों में एंटी-रेबीज वैक्सीन के लिए हमेशा लंबी कतारें लगी रहती हैं। अकेले सदर अस्पताल में ही प्रतिदिन लगभग 50 से 70 मामले आते हैं।
सोशल मीडिया, समाचार पत्रों और प्रदर्शनों के माध्यम से लोगों ने इस समस्या के समाधान के लिए आवाज़ उठाई है। मुजफ्फरपुर नगर निगम के पास आवारा कुत्तों को पकड़ने के लिए कोई विशेष टीम नहीं है।
विशेषज्ञों और नागरिकों का कहना है कि जिला प्रशासन को इन घटनाओं पर तुरंत ध्यान देना चाहिए। इस समस्या से निपटने के लिए उचित समन्वय और दृढ़ संकल्प की आवश्यकता है। संबंधित विभागों को लोगों की सुरक्षा और स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए तत्काल कार्रवाई करनी होगी।
Report : ग़ज़नफर इकबाल.
