औरंगाबाद : बुधवार को रंगों का त्योहार होली पूरे जोश और धूमधाम के साथ जिला मुख्यालय औरंगाबाद शहर में मनाया गया। शहर की गलियों से लेकर चौक-चौराहों तक हर तरफ रंग, गुलाल और डीजे की तेज धुन पर लोग झूमते नजर आए। बच्चे हों, जवान हों या बुज़ुर्ग—हर कोई इस रंगीन माहौल में पूरी मस्ती के साथ शामिल दिखा।
मुख्य शहर में हनुमान मंदिर / मस्जिद मोड़ के आसपास पुलिस-प्रशासन की ड्यूटी भी लगी हुई थी, ताकि त्योहार शांतिपूर्ण तरीके से मनाया जा सके। लेकिन दिलचस्प बात यह रही कि वहां भी लोग वाहनों और ई-रिक्शा (टोटो) पर सवार होकर झुंड में डीजे की धुन पर नाचते-गाते नजर आए। त्योहार का माहौल इतना उत्साह भरा था कि ड्यूटी में तैनात पुलिस-प्रशासन के लोग भी काफी उत्साहित दिखाई दे रहे थे।
पूरा औरंगाबाद शहर जहां रंगों में सराबोर था, वहीं इस खुशी के माहौल के बीच एक ऐसी बात भी सामने आती है जो थोड़ा हैरान कर देती है। जिला मुख्यालय औरंगाबाद से लगभग 20 किलोमीटर उत्तर दिशा में और प्रखंड मुख्यालय ओबरा से करीब 5-6 किलोमीटर दूर स्थित बेल (पंचायत) गांव में पिछले लगभग 14-15 वर्षों से होलिका दहन का पर्व नहीं मनाया जा रहा है।
बताया जाता है कि दो समुदायों के बीच हुए विवाद के कारण यहां होलिका दहन की परंपरा रुक गई। इस वजह से गांव के हिंदू समाज के लोगों में हर साल होली के समय उदासी का माहौल बना रहता है।
इस मामले को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं। एक बार जब संवाददाता ने औरंगाबाद लोकसभा क्षेत्र के पूर्व भाजपा सांसद सुशील कुमार सिंह से इस विषय में सवाल किया था, तो उन्होंने कहा था कि अगर सरकार चाहे तो किसी भी गांव में होलिका दहन रुक नहीं सकता। उनके मुताबिक उस समय सरकार की इच्छाशक्ति ही नहीं दिख रही थी। उस वक्त बिहार में भाजपा और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी एक साथ गठबंधन में भी नहीं थीं, इसलिए उन्होंने यह बयान दिया था।
वहीं दूसरी ओर, बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दौरान जब संवाददाता ने बेल पंचायत के पास स्थित इमामगंज में चुनाव प्रचार कर रहे ओबरा विधानसभा क्षेत्र (संख्या-220) से एनडीए समर्थित लोजपा (रामविलास) के उम्मीदवार और समाजसेवी डॉ. प्रकाश चंद्रा से भी यही सवाल पूछा, तो उन्होंने भी इस मुद्दे को गंभीर बताया।
उन्होंने कहा था कि यह बात उनके ध्यान में है और समय के साथ सब ठीक हो जाएगा। उनका कहना था कि धीरे-धीरे हालात सुधरेंगे और एक दिन ऐसा जरूर आएगा जब बेल पंचायत गांव में भी होलिका दहन का पर्व फिर से मनाया जाएगा।
डॉ. प्रकाश चंद्रा ने उस समय यह भी कहा था—
“मेरा नाम प्रकाश चंद्रा है और अंधकार से प्रकाश लाना ही मेरा काम है। इसलिए आप मान लीजिए कि बेल पंचायत में भी एक दिन होलिका दहन जरूर होगा।”
इधर एक और दिलचस्प पहलू भी देखने को मिला। बिहार सरकार की ओर से यह निर्देश जारी किया गया था कि होली में कहीं भी डीजे नहीं बजेगा। अगर डीजे पकड़ा गया तो उसे जब्त किया जाएगा और नियमानुसार कार्रवाई भी होगी।
लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही नजर आई। जिला मुख्यालय औरंगाबाद में कई जगहों पर खुलेआम डीजे बजते दिखे और लोग उसी की धुन पर नाचते-गाते होली का जश्न मनाते रहे।
कुल मिलाकर जहां एक तरफ औरंगाबाद शहर में होली का त्योहार पूरे उत्साह और रंगों के साथ मनाया गया, वहीं पास के बेल पंचायत गांव में वर्षों से बंद पड़ी होलिका दहन की परंपरा आज भी लोगों के लिए एक अधूरी उम्मीद बनी हुई है।
Report : अजय कुमार पाण्डेय.
