औरंगाबाद (बिहार) : औरंगाबाद में एक बार फिर इंसानियत और खिदमत का खूबसूरत मंजर देखने को मिलने वाला है। खून देने जैसे नेक काम को बढ़ावा देने वाली मशहूर समाजसेवी तंजीम “पथ प्रदर्शक” ने अपने दूसरे “रक्तदाता महाकुंभ” का आगाज़ कर दिया है।
इस मुहिम के पीछे हैं तंजीम के बानी और सेक्रेटरी बमेंद्र कुमार सिंह, जो हर साल अपने वालिद मरहूम इंद्रदेव सिंह की पुण्य तिथि पर खूनदान शिविर का इंतज़ाम करते आए हैं। इस बार उन्होंने इस कोशिश को और बड़ा रूप देते हुए इसे एक महोत्सव बना दिया है, ताकि ज़्यादा से ज़्यादा लोग इस नेक काम से जुड़ सकें।
ये दो दिन का खास प्रोग्राम 4 और 5 जुलाई को गोपाल नारायण सिंह यूनिवर्सिटी, जमुहार (रोहतास) के तआवुन से मुनअकिद किया जाएगा। इस मौके पर ना सिर्फ़ खूनदान कैंप लगेगा बल्कि एक बड़ा रक्तदाता सम्मेलन भी होगा, जहां अलग-अलग जगहों से आए लोग अपने तजुर्बे और ख्यालात साझा करेंगे।
इस महाकुंभ की सबसे खास बात ये है कि इसमें सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि नेपाल और भूटान से भी लोग हिस्सा लेने वाले हैं। भारत के भी कई सूबों जैसे बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा, असम, नागालैंड, कर्नाटक, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, उत्तराखंड, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान, चंडीगढ़, छत्तीसगढ़ और सिक्किम से महिला और मर्द रक्तदाता शामिल होंगे। कुल मिलाकर करीब पच्चीस राज्यों से लोग इस मुहिम में शरीक होंगे।
इस पूरे प्रोग्राम को कामयाब बनाने में यूनिवर्सिटी के प्रति कुलाधिपति गोविन्द नारायण सिंह का खास तआवुन मिल रहा है। साथ ही जनसंपर्क पदाधिकारी भूपेन्द्र नारायण सिंह भी पूरी लगन से इसकी तैयारियों में जुटे हुए हैं। यूनिवर्सिटी के नए बने ऑडिटोरियम में इस बड़े इवेंट का इंतज़ाम किया जाएगा।
बमेंद्र कुमार सिंह का कहना है कि उनके वालिद की याद में हर साल खूनदान शिविर लगाया जाता था, लेकिन इस बार इसे एक बड़े पैमाने पर आयोजित किया जा रहा है, ताकि ज़्यादा से ज़्यादा लोग इससे जुड़ें और इंसानियत की खिदमत में अपना हिस्सा निभाएं।
उन्होंने ये भी बताया कि प्रोग्राम की तैयारियां तेज़ी से चल रही हैं और देश-विदेश से आने वाले मेहमानों को दावतनामे भेज दिए गए हैं। मंगलवार को यूनिवर्सिटी के कुलाधिपति, कुलपति और नारायण मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के अफसरान को भी इस प्रोग्राम में शरीक होने के लिए दावत दी गई।
गौरतलब है कि साल 2019 में इस तरह का पहला “रक्तदाता महाकुंभ” आयोजित किया गया था, जिसमें पांच मुल्कों और अठारह राज्यों के लोगों ने हिस्सा लिया था। इस बार उम्मीद की जा रही है कि ये महाकुंभ पहले से भी ज़्यादा बड़ा और असरदार साबित होगा।
इस तरह के प्रोग्राम ना सिर्फ लोगों को खूनदान के लिए जागरूक करते हैं, बल्कि समाज में इंसानियत, मोहब्बत और एक-दूसरे की मदद करने का पैगाम भी फैलाते हैं।
Report : विश्वनाथ आनंद.
