Bihar पुलिस सप्ताह 2026 के मौके पर Aurangabad में एक शानदार और जोश से भरा रक्तदान शिविर लगाया गया। सोमवार, 23 फरवरी 2026 को अस्पताल भवन, पुलिस केंद्र में यह आयोजन बड़े पैमाने पर किया गया। माहौल ऐसा था कि हर तरफ उत्साह और सेवा का जज़्बा साफ नजर आ रहा था।
इस मौके पर कई पुलिस अधिकारी मौजूद रहे। यातायात पुलिस उपाधीक्षक मनोज कुमार, पुलिस उपाधीक्षक (रक्षित) आकाश कुमार यादव, पुलिस उपाधीक्षक मुख्यालय-02 मनीषा बेबी, पुलिस उपाधीक्षक मुख्यालय-01 विनोद कुमार सिंह, प्रशिक्षु पुलिस उपाधीक्षक ज्योति कुमारी और अपर्णा भारती सहित कई अधिकारी और पुलिस बल के जवान उपस्थित रहे।

शिविर के दौरान 300 से ज्यादा लोगों द्वारा रक्तदान किए जाने की बात कही गई। वहीं पुलिस अधीक्षक अंबरीष राहुल भी खुद पहुंचकर पूरे कार्यक्रम की निगरानी कर रहे थे। आयोजकों को उम्मीद थी कि यह औरंगाबाद के इतिहास का सबसे बड़ा रक्तदान शिविर साबित होगा।
“रक्तदान से कमजोरी नहीं आती” – डॉक्टर रवि रंजन
कार्यक्रम के दौरान शहर के चर्चित चिकित्सक Ravi Ranjan Kumar से जब संवाददाता ने सवाल किया कि लोगों के मन में यह डर रहता है कि रक्तदान करने से कमजोरी आ जाती है, तो इस पर उन्होंने खुलकर जवाब दिया।
डॉ. रवि रंजन ने साफ कहा कि यह पूरी तरह एक मिथ है। इसका कोई साइंटिफिक आधार नहीं है। उन्होंने कहा कि हमें विज्ञान पर भरोसा करना चाहिए। रक्तदान से शरीर को कई फायदे होते हैं। सबसे बड़ा फायदा यह है कि शरीर में आयरन का ओवरलोड कम होता है। ज्यादा आयरन से लिवर और फेफड़ों पर बुरा असर पड़ सकता है और कैंसर का खतरा भी बढ़ सकता है। रक्तदान इस जोखिम को कम करने में मदद करता है।
उन्होंने यह भी बताया कि रक्तदान से हार्ट अटैक और सेरेब्रल स्ट्रोक का खतरा कम होता है, जिससे लकवा जैसी समस्याओं की संभावना घटती है। उनका कहना था कि रक्तदान से उम्र घटती नहीं, बल्कि बढ़ती है, और इससे किसी तरह की कमजोरी नहीं आती।
कितनी मात्रा में लिया जाता है रक्त?
डॉक्टर के मुताबिक एक यूनिट में लगभग 350 एमएल से लेकर अधिकतम 400 एमएल तक ही खून लिया जाता है। इससे ज्यादा नहीं। यह मात्रा शरीर बहुत जल्दी रिकवर कर लेता है। शरीर में हर दिन लगभग 1% आरबीसी (लाल रक्त कोशिकाएं) स्वाभाविक रूप से खत्म होती रहती हैं, इसलिए रक्तदान से कोई नुकसान नहीं होता।
उन्होंने यह भी साफ किया कि हर किसी का रक्त नहीं लिया जाता। जिन लोगों को बुखार, सर्दी-खांसी या कोई अन्य स्वास्थ्य समस्या होती है, उनका रक्तदान नहीं कराया जाता। रक्तदान से पहले पूरी स्क्रीनिंग की जाती है। इसमें हीमोग्लोबिन, एचआईवी, हेपेटाइटिस-बी जैसी जांचें भी होती हैं। एक तरह से यह आपकी सेहत की जांच भी है।
एक यूनिट खून, तीन ज़िंदगियां
डॉ. रवि रंजन ने कहा कि स्वैच्छिक रक्तदान सबसे बड़ा मानवीय कार्य है। एक यूनिट खून से कम से कम तीन लोगों की जान बचाई जा सकती है। आप न सिर्फ अपनी सेहत का ख्याल रखते हैं, बल्कि दूसरों को नई जिंदगी भी देते हैं।
उन्होंने लोगों से अपील की कि बेवजह के डर को दिल से निकालें और आगे बढ़कर रक्तदान करें। उनके शब्दों में, “आपके खून का एक-एक कतरा किसी के लिए जीवनदान है। रक्तदान सच में महादान है।”
इस पूरे आयोजन ने यह संदेश साफ तौर पर दे दिया कि अगर इरादा मजबूत हो, तो समाज के लिए बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।
रिपोर्ट: अजय कुमार पाण्डेय.
