2025 में भारत में मुसलमानों के खिलाफ रिकॉर्ड 1318 नफरती भाषण: इंडिया हेट लैब की रिपोर्ट ने खोली पोल, रोजाना 4 मामले!

2025 में भारत में धार्मिक अल्पसंख्यकों, खासकर मुसलमानों के खिलाफ 1318 नफरती भाषण दर्ज किए गए।
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दोस्तों, आजकल न्यूज में एक रिपोर्ट बहुत चर्चा में है, और वो भी काफी गंभीर वाली। जी हाँ, बात है साल 2025 की, जब भारत में धार्मिक अल्पसंख्यकों, खासकर मुसलमानों के खिलाफ नफरती भाषणों (हेट स्पीच) की बाढ़ सी आ गई। वॉशिंगटन बेस्ड एक रिसर्च ग्रुप ‘इंडिया हेट लैब’ ने अपनी सालाना रिपोर्ट जारी की है, जिसमें खुलासा किया गया है कि पूरे 2025 में कुल 1318 ऐसे इन-पर्सन हेट स्पीच इवेंट्स दर्ज किए गए। इनमें से 98% यानी करीब 1289 मामले मुसलमानों को सीधे टारगेट करते हैं। मतलब, औसतन हर दिन 4 नफरती भाषण हो रहे थे! ये आंकड़ा 2024 से 13% ज्यादा है, और 2023 से तो दोगुना से भी ज्यादा।

रिपोर्ट पढ़कर दिल दहल जाता है। ये हेट स्पीच राजनीतिक रैलियों, धार्मिक जुलूसों, प्रोटेस्ट मार्च और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में दिए गए। ज्यादातर जगहों पर मुसलमानों को ‘देशद्रोही’, ‘घुसपैठिए’, ‘जिहादी’ या ‘डेमोग्राफिक थ्रेट’ बताया गया। कुछ स्पीच में तो मस्जिदों को तोड़ने, बहिष्कार करने या हिंसा की धमकी तक दी गई। 276 स्पीच में मस्जिदों या चर्चों को निशाना बनाया गया, जैसे ज्ञानवापी मस्जिद या शाही ईदगाह। और 120 स्पीच में मुसलमानों का सोशल या इकोनॉमिक बॉयकॉट करने की बात की गई।

‘इंडिया हेट लैब’ (India Hate Lab – IHL) की हाल ही में जारी एक रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 में भारत में धार्मिक अल्पसंख्यकों, विशेष रूप से मुसलमानों के खिलाफ नफरती भाषणों (Hate Speech) के मामलों में भारी वृद्धि दर्ज की गई है।

रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में कुल 1,318 नफरती भाषण के मामले दर्ज किए गए, जो 2024 की तुलना में 13% और 2023 की तुलना में 97% अधिक हैं।

यहाँ इस रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्षों का सारांश दिया गया है:

मुसलमानों को बनाया गया मुख्य निशाना

• कुल 1,318 घटनाओं में से 1,289 मामलों (98%) में सीधे तौर पर मुसलमानों को निशाना बनाया गया।

• इनमें से कई भाषणों में हिंसा, सामाजिक बहिष्कार और धार्मिक स्थलों को नुकसान पहुंचाने का आह्वान किया गया था।

• ईसाई समुदाय के खिलाफ भी नफरती भाषणों में 41% की वृद्धि देखी गई (कुल 162 मामले)।

किन राज्यों में सबसे ज़्यादा मामले?

यह घटनाएं पूरे देश में हुईं, लेकिन कुछ राज्यों में इनकी संख्या सबसे अधिक रही:

• उत्तर प्रदेश: 266 मामले (सबसे ज़्यादा)

• महाराष्ट्र: 193 मामले

• मध्य प्रदेश: 172 मामले

• उत्तराखंड: 155 मामले

• दिल्ली: 76 मामले

भाषणों की प्रकृति और मुद्दे

रिपोर्ट में नफरती भाषणों के पीछे के मुख्य ‘थीम’ या मुद्दों को भी उजागर किया गया है:

• साजिश के सिद्धांत (Conspiracy Theories): लगभग 656 भाषणों (50%) में ‘लव जिहाद’, ‘लैंड जिहाद’, ‘थूक जिहाद’ और ‘वोट जिहाद’ जैसी साजिशों का जिक्र किया गया।

• हिंसा का आह्वान: 308 भाषणों में हिंसा का खुला आह्वान किया गया, जबकि 136 में हथियार उठाने की बात कही गई।

• बहिष्कार: 120 भाषणों में मुस्लिम समुदाय के सामाजिक और आर्थिक बहिष्कार की अपील की गई।

राजनीतिक संदर्भ

• रिपोर्ट में दावा किया गया है कि 88% नफरती भाषण उन राज्यों में दिए गए जहां भारतीय जनता पार्टी (BJP) या उसके गठबंधन की सरकार है।

• रिपोर्ट के मुताबिक, चुनाव के दौरान और बाद में इन मामलों में तेज़ी देखी गई।

यह रिपोर्ट वाशिंगटन डी.सी. स्थित अनुसंधान समूह India Hate Lab द्वारा तैयार की गई है, जो भारत में नफरती भाषणों और अपराधों का दस्तावेजीकरण करता है।

सबसे ज्यादा मामले उन राज्यों में हुए जहां बीजेपी की सरकार है। उत्तर प्रदेश टॉप पर है – 266 मामले। उसके बाद महाराष्ट्र 193, मध्य प्रदेश 172, उत्तराखंड 155 और दिल्ली में 76। कुल 1164 मामले बीजेपी शासित राज्यों में। अप्रैल महीना सबसे खराब रहा, जब 158 मामले दर्ज हुए। खासकर राम नवमी के समय और पहलगाम अटैक के बाद तो जैसे नफरत की लहर दौड़ गई। 22 अप्रैल से 7 मई के बीच ही 98 मामले हो गए।

दोस्तों, ये सिर्फ आंकड़े नहीं हैं। इनके पीछे असली जिंदगियां हैं। मुसलमान समुदाय के लोग रोजाना डर में जी रहे हैं। एक तरफ वो देश का हिस्सा हैं, टैक्स देते हैं, मेहनत करते हैं, लेकिन दूसरी तरफ ऐसे बयान सुनकर लगता है जैसे वो आउटसाइडर हों। रिपोर्ट में बताया गया कि मुसलमानों को ‘टर्माइट्स’, ‘पैरासाइट्स’, ‘ग्रीन स्नेक’ जैसे शब्दों से पुकारा गया। बंगाली मुसलमानों को ‘बांग्लादेशी घुसपैठिए’ कहकर टारगेट किया गया – पूरे 192 स्पीच में ये ट्रोप इस्तेमाल हुआ।

क्रिश्चियन समुदाय भी नहीं बचा। उनके खिलाफ हेट स्पीच 41% बढ़ गई। कुल मामलों में 133 स्पीच में मुसलमानों के साथ क्रिश्चियंस को भी निशाना बनाया गया। मतलब, अल्पसंख्यक दोनों ही खतरे में। रिपोर्ट कहती है कि हिंदुत्व ऑर्गनाइजेशन जैसे वीएचपी, बजरंग दल और कुछ राजनीतिक लीडर्स इन स्पीच के पीछे मुख्य हैं। कुछ बड़े नाम जैसे प्रवीण तोगड़िया ने तो 46 स्पीच दिए।

अब सवाल ये है कि ये सब हो क्यों रहा है? रिपोर्ट के मुताबिक, ये पुरानी साजिशें हैं – लव जिहाद, लैंड जिहाद, थूक जिहाद जैसी थ्योरी से मुसलमानों को खतरा बताकर नफरत फैलाई जाती है। राजनीतिक फायदे के लिए, वोट बैंक के लिए, या सोशल मीडिया पर ध्यान खींचने के लिए? लेकिन इसका असर समाज पर बहुत बुरा पड़ रहा है। लोग बंट रहे हैं, भाईचारा खत्म हो रहा है। याद कीजिए, भारत तो सेक्युलर देश है, संविधान में सबको बराबरी का हक है। फिर ये नफरत क्यों?

कुछ लोग कहते हैं कि इंडिया हेट लैब की रिपोर्ट बायस्ड है। बीजेपी ने पहले भी कहा है कि ये ग्रुप इंडिया की नेगेटिव इमेज पेश करता है। सरकार का कहना है कि वो सब समुदायों के लिए काम करती है – चाहे फ्री राशन हो या बिजली कनेक्शन। और ऐसे रिपोर्ट्स को वो बाहर की साजिश बताते हैं। लेकिन दोस्तों, आंकड़े तो आंकड़े हैं। रॉयटर्स, द वायर, क्विंट जैसी बड़ी न्यूज एजेंसियां भी ये रिपोर्ट कवर कर रही हैं। यूएन की डेफिनिशन से हेट स्पीच को डिफाइन किया गया है – ये कोई बनावटी नहीं।

मैं सोचता हूं कि ये वक्त है सोचने का। हमारा देश इतना बड़ा है, इतनी विविधता है – हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई सब मिलकर रहते हैं। त्योहार साथ मनाते हैं, एक-दूसरे की मदद करते हैं। फिर ये नफरत की राजनीति क्यों? बच्चों को क्या सिखाएंगे हम? कि पड़ोसी से नफरत करो? नहीं न! जरूरत है जागरूकता की, एजुकेशन की, और कानून को सख्ती से लागू करने की। हेट स्पीच पर केस दर्ज होने चाहिए, स्पीकर्स पर एक्शन होना चाहिए।

समाज के लोग भी आगे आएं। सोशल मीडिया पर अगर कोई नफरती पोस्ट देखें तो रिपोर्ट करें। पड़ोस में अगर कोई भेदभाव करे तो रोकें। छोटे-छोटे कदम से बड़ा बदलाव आ सकता है। मुसलमान भाई-बहन भी मजबूत रहें, अपना हक मांगें, लेकिन शांति से। अंत में, देश सबका है। नफरत से कुछ हासिल नहीं होता, सिर्फ बर्बादी।

रिपोर्ट पढ़कर मुझे बहुत दुख हुआ। उम्मीद है सरकार इस पर ध्यान देगी, और 2026 बेहतर होगा। आप क्या सोचते हैं? क्या ये आंकड़े सही हैं? या कुछ और वजहें हैं? कमेंट में जरूर बताएं। अगर पोस्ट अच्छी लगी तो शेयर करें, ताकि ज्यादा लोग जागरूक हों। सब्सक्राइब करना न भूलें। मिलते हैं अगली पोस्ट में!

Report : ismatimes news desk.

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