सोशल मीडिया पर इन दिनों इंदौर का एक वीडियो बहुत तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में एक आदमी सरकारी दफ्तर में जोर-जोर से चिल्ला रहा है और अफसरों से सवाल कर रहा है। उसकी आवाज में गुस्सा भी है और बेबसी भी। वजह सिर्फ एक – उसका नाम 2025 के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान वोटर लिस्ट से कट गया।
शख्स ने बताया कि उसने सारे जरूरी कागजात जमा कर दिए थे, फिर भी दो महीने से हर हफ्ते एसडीएम ऑफिस के चक्कर लगा रहा है। हर बार यही जवाब मिलता है – “अभी मीटिंग चल रही है, बाद में आना”। वह बार-बार कहता सुनाई दे रहा है, “मेरे पिता गुजर चुके हैं, माँ अंधी हैं, मैं उन्हें भीड़ में अकेला छोड़कर अंदर आता हूँ, फिर भी कोई मदद नहीं करता।”
वीडियो में उसकी माँ कुर्सी पर बैठी हैं। चेहरे पर बेबसी साफ दिख रही है। वह रो रही हैं, लेकिन किसी झगड़े या विवाद से बचना चाहती हैं। बस चुपचाप बैठी हैं, जैसे मानो कह रही हों कि बस यह सब जल्दी खत्म हो जाए। यह नजारा देखकर किसी का भी दिल नहीं पसीज जाए, ऐसा हो ही नहीं सकता।
लोग इस वीडियो पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएँ दे रहे हैं। कोई कह रहा है कि यही वजह है कि देश में गरीब आदमी की सुनवाई नहीं होती। दफ्तरों में सिर्फ मीटिंग-मीटिंग होती रहती हैं, लेकिन काम कोई नहीं होता। कोई इसे ब्यूरोक्रेसी की क्रूरता बता रहा है। कुछ लोग इसे बड़े सवाल से जोड़ रहे हैं – आखिर बहुबली नेता और जातिवादी राजनीति क्यों फलती-फूलती है? क्योंकि आम आदमी को लगता है कि बाबुओं और पुलिस से न्याय नहीं मिलेगा, तो नेता ही उसकी सुन लेगा।
कई यूजर्स ने इसे 2025 के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन की नाकामी से भी जोड़ा है और सवाल उठाए हैं कि इतने लोगों के नाम गलती से या बिना वजह कट गए, इसके लिए जिम्मेदार कौन?
सच कहें तो यह वीडियो सिर्फ एक परिवार की कहानी नहीं है। यह उस पूरी व्यवस्था की तस्वीर है जहाँ आम आदमी को छोटे-छोटे काम के लिए महीनों भटकना पड़ता है। उम्मीद करते हैं कि इस शख्स और उसकी माँ की समस्या जल्द हल हो और आगे किसी को ऐसी तकलीफ न झेलनी पड़े।
आपने यह वीडियो देखा? आपको क्या लगता है – क्या वाकई सरकारी दफ्तरों में गरीबों की सुनवाई कम होती है? कमेंट में जरूर बताइएँ।
रिपोर्ट : इस्माटाइम्स न्यूज़ डेस्क.
