New Delhi, 6 Feb. 2026 : राज्यसभा में बजट सत्र 2026 के दौरान कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने जिस अंदाज़ में अपनी बात रखी, उसने न केवल सत्ता पक्ष को सन्न कर दिया, बल्कि राहुल गांधी समेत पूरे विपक्ष के साथ हो रहे व्यवहार का “बदला” भी ले लिया। उनका यह 3 मिनट का भाषण अब तक का सबसे मारक और ऐतिहासिक भाषण माना जा रहा है।
शायराना अंदाज़ और तीखे सवाल
इमरान प्रतापगढ़ी अपनी बेबाक शायरी और बुलंद आवाज़ के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने सदन में खड़े होकर सीधे प्रधानमंत्री मोदी और असम के मुख्यमंत्री हिमांता बिस्वा शर्मा की नीतियों पर सवाल दागे। उन्होंने कहा कि जब विपक्ष की आवाज़ को दबाने की कोशिश होती है, तो यह लोकतंत्र के लिए सबसे बुरा वक्त होता है। राहुल गांधी को बोलने से रोकने की कोशिशों का ज़िक्र करते हुए उन्होंने सरकार को आईना दिखाया और साफ शब्दों में कहा कि आवाज़ें कुचलने से सच नहीं बदलता।
“नफरत के खिलाफ मोहब्बत की जंग”
भाषण के दौरान इमरान ने नफरती भाषणों (Hate Speech) का मुद्दा भी पुरज़ोर तरीके से उठाया। उन्होंने सीधे तौर पर हिमांता बिस्वा शर्मा का नाम लेते हुए उनके बयानों पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि “नफरत फैलाना बंद कर दीजिए, प्रेम अपने आप फैल जाएगा।” उनकी इस बात पर सदन में मौजूद विपक्षी सांसदों ने मेज थपथपाकर उनका स्वागत किया, जबकि सत्ता पक्ष के चेहरे देखने लायक थे।
बजट और आम आदमी की बात
इमरान ने सिर्फ राजनीति ही नहीं, बल्कि बजट 2026 पर भी सरकार को घेरा। उन्होंने इसे “अमीरों का बजट” करार देते हुए कहा कि इसमें गरीबों की रोटी और दाल का कोई इंतजाम नहीं है। अल्पसंख्यक मंत्रालय के बजट में कटौती और किसानों की एमएसपी (MSP) की गारंटी जैसे मुद्दों को उठाकर उन्होंने साबित कर दिया कि वे सिर्फ एक शायर नहीं, बल्कि जनता की नब्ज़ पहचानने वाले नेता हैं।
सोशल मीडिया पर मचा तहलका
यह भाषण सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गया है। लोग कह रहे हैं कि इमरान ने जिस निडरता से अपनी बात रखी, उसने विपक्ष में नई जान फूंक दी है। यह भाषण न केवल जबरदस्त है बल्कि सत्ता के अहंकार पर एक करारी चोट भी है। इमरान प्रतापगढ़ी को इस ऐतिहासिक परफॉरमेंस के लिए चौतरफा बधाई मिल रही है।
सोशल मीडिया पर इमरान प्रतापगढ़ी का भाषण :
“नेहरू का नाम आइंस्टीन के साथ लिया जाता था और आपका नाम एप्सटीन के साथ लिया जाता है। इमरान प्रतापगढ़ी जी, तीन मिनट विचार रखें।
माननीय सभापति महोदय, हम करें बात दलीलों से तो रद्द होती है। उनके होठों की ख़ामोशी भी सनद होती है। कुछ न कहने से भी छिन जाता है एजाज़-ए-सुखन, जुल्म सहने से भी ज़ालिम की मदद होती है।
सभापति महोदय, मैं राष्ट्रपति के अभिभाषण पर अपनी बात रखने के लिए खड़ा हुआ हूँ। उस दिन देश की संसद के गलियारों में सरकार की तारीफ़ करती हुई महामहिम की आवाज़ गूंज रही थी, तो उधर मेरे कानों में हसदेव के जंगलों में आदिवासियों को ज़िंदगी देने वाले पेड़ों पर चलती हुई कुल्हाड़ी की आवाज़ गूंज रही थी।
सभापति महोदय, इस तरफ महामहिम के भाषण पर प्रधानमंत्री जी संसद की मेज़ थपथपा रहे थे और उधर उत्तराखंड की अभागी बिटिया अंकिता भंडारी के इंसाफ़ की आवाज़ें मद्धम पड़ती जा रही थीं, जो आज भी पूछ रही हैं कि आखिर वह वीआईपी कौन था जिसके लिए अंकिता भंडारी को मार दिया गया।
सभापति महोदय, इधर महामहिम सामाजिक न्याय की बात कर रही थीं और उधर उत्तराखंड के कोटद्वार में नफ़रती लोगों के ख़िलाफ़ एक बुज़ुर्ग को बचाने के लिए खड़ा हुआ दीपक, जो मोहब्बतों की रोशनी लेकर खड़ा था, उसके ख़िलाफ़ कोटद्वार की पुलिस गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज कर रही थी। और वह भी उस दिन हो रहा था जब उत्तराखंड के मुख्यमंत्री कोटद्वार में मौजूद थे।
यह नया भारत है, जहां दंगाई के ख़िलाफ़ एफआईआर नहीं होती, बल्कि अमन और मोहब्बत की बात करने वालों के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज होती है। यह नया भारत है, जहां असम का मुख्यमंत्री खुलेआम संवैधानिक प्रोटोकॉल तोड़कर कहता है कि मुसलमानों को इतना टॉर्चर करो कि वे राज्य छोड़ने पर मजबूर हो जाएं। वह कहता है कि अगर कोई मियां रिक्शावाला पांच रुपए मांगे तो उसे चार रुपए दो, ताकि वह परेशान हो सके।
यह नया भारत है, जहां बरेली में खाली घर में नमाज़ पढ़ने पर पुलिस मुकदमा दर्ज करती है। यह नया भारत है, जहां क्रिसमस की तैयारी करते हुए ईसाइयों पर सरकार मुकदमा दर्ज करती है। यह नया भारत है, जहां जम्मू-कश्मीर में नीट का एग्ज़ाम क्वालिफाई करने वाले पचास बच्चों में अगर 42 मुसलमान होते हैं, तो फिर मेडिकल कॉलेज की मान्यता ही रद्द होती है और जश्न मनाया जाता है।
महामहिम राष्ट्रपति का भाषण मैं सुन रहा था। सर, यह नया भारत है — जहां प्रदेश के बैतूल में बच्चों के स्कूल बनवा रहे मोहम्मद का घर सिर्फ इसलिए तुड़वा दिया जाता है क्योंकि वे स्कूल बनवा रहे थे। यह नया भारत है, जहां कोर्ट का स्टे होने के बावजूद बनारस की दालमंडी में सैकड़ों दुकानें तोड़ी जा रही हैं, क्योंकि रास्ता चौड़ा करना है।
सभापति महोदय, मैं आपसे कहना चाहता हूँ — जो पीढ़ी अपने बुज़ुर्गों को गाली देती है, उसके साथ प्रकृति इंसाफ़ करती है। आप इंदिरा जी और नेहरू को गाली देते हैं, नेहरू को छोटा नहीं कर पाएंगे।
नेहरू का नाम आइंस्टीन के साथ लिया जाता था और आपका नाम एप्सटीन के साथ लिया जाता है। आपको यह बात समझनी पड़ेगी।
सभापति महोदय, मुझे एक मिनट और दे दें, मुझे निष्कर्ष करने दें।”
रिपोर्ट : मोहम्मद इस्माइल.
