औरंगाबाद, बिहार से एक बड़ी खबर सामने आई है। सोमवार, 16 फरवरी 2026 को व्यवहार न्यायालय, औरंगाबाद की स्पेशल एम.पी./एम.एल.ए. कोर्ट ने एक पुराने मामले में फैसला सुनाते हुए काराकाट लोकसभा क्षेत्र के माले सांसद राजाराम सिंह को दोषमुक्त कर दिया। उनके साथ पूर्व विधायक विरेन्द्र सिंह, भगवान सिंह समेत कुल 23 लोगों को सबूतों की कमी की वजह से बरी किया गया।
यह मामला नगर थाना कांड संख्या 155/12 से जुड़ा था, जिसमें जी.आर. 869/12 और एस.टी.आर. 366/12, 264/22 के तहत सुनवाई चल रही थी। करीब 13 साल तक यह केस कोर्ट में चलता रहा, और आखिरकार फैसला आरोपियों के पक्ष में आया।
मामला क्या था?
इस केस की शुरुआत 2 मई 2012 को हुई थी। उस समय के प्रखंड विकास पदाधिकारी उदय प्रताप सिंह ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी। एफआईआर में बताया गया था कि सुबह करीब 11 बजे गांधी मैदान से एक प्रदर्शन निकाला गया था। यह प्रदर्शन सोनहथु पंचायत के पूर्व मुखिया छोटु कुशवाहा की हत्या के विरोध में था और इसका नेतृत्व पूर्व विधायक कर रहे थे।
जुलूस बद्री नारायण मार्केट पहुंचकर सभा में तब्दील हो गया। वहां से नारेबाजी करते हुए भीड़ समाहरणालय गेट तक पहुंची, जहां हालात उग्र हो गए। प्रशासन को गुप्त सूचना मिली थी कि भीड़ में कुछ असामाजिक तत्व भी शामिल हो गए हैं, जो पत्थरबाजी कर रहे थे।
स्थिति को काबू में करने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े। इस दौरान पूर्व विधायक समेत कुछ प्रशासनिक अधिकारी और कर्मचारी घायल हुए। बताया गया कि दंगा नियंत्रण वाहन और एक सरकारी सुमो गाड़ी में भी आग लगा दी गई थी।
इस मामले में भारतीय दंड संहिता की कई धाराओं के साथ आर्म्स एक्ट, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम और डैमेज ऑफ पब्लिक प्रॉपर्टी एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया था।
कोर्ट में क्या हुआ?
25 अप्रैल 2024 को सभी आरोपियों पर आरोप तय किए गए थे। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से 13 गवाह पेश किए गए, जबकि बचाव पक्ष की ओर से 6 से ज्यादा गवाहों ने बयान दिया।
अभियोजन की तरफ से ए.पी.पी. कामता प्रसाद सिंह ने पैरवी की, जबकि बचाव पक्ष में अकमल हसन, क्षितिज रंजन, मुकेश कुमार सिंह, कुणाल समेत कई वकीलों ने दलीलें रखीं। उस समय एस.डी.पी.ओ. संजय कुमार और एस.डी.ओ. के.डी. प्रज्ज्वल पद पर तैनात थे। समाहरणालय गेट पर नगर, मुफ्फसिल, जम्होर, सिमरा और रिसियप थानों की पुलिस बल तैनात की गई थी।
फैसले पर क्या बोले दोनों पक्ष?
फैसले के बाद अपर लोक अभियोजक कामता प्रसाद सिंह ने कहा कि वे इस निर्णय से संतुष्ट नहीं हैं और हाईकोर्ट पटना में रिविजन दायर करेंगे।
वहीं काराकाट सांसद राजाराम सिंह ने कहा कि यह न्याय की जीत है। उन्होंने कहा, “हमें न्यायालय पर पूरा भरोसा था और आखिरकार हमें न्याय मिला। 13 साल तक हमने इस मुकदमे का सामना किया। आज फैसला आया है तो सभी अधिवक्ताओं, पत्रकारों और समर्थकों को भी बहुत-बहुत मुबारकबाद।”
गौरतलब है कि जिस दिन यह घटना हुई थी, उसी समय इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित भी किया गया था।
रिपोर्ट: अजय कुमार पाण्डेय.
