नारी के अकेलेपन की संवेदनशील कहानी: मन्नू भंडारी की ‘अकेली’ पर साहित्यिक चर्चा

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टिकरी, बिहार: नारी के अकेलेपन, संघर्ष और सामाजिक परिवेश की गूढ़ कहानी है — ‘अकेली’, जिसे प्रसिद्ध लेखिका व साहित्यकार मन्नू भंडारी ने लिखा है। यह कहानी समाज में महिला की मानसिक स्थिति, अकेलापन, सामाजिक अलगाव और मानवीय संवेदना को बहुत ही मार्मिक ढंग से प्रस्तुत करती है।

यह कहानी मुख्य रूप से नायिका ‘सोमा बुआ’ के इर्द-गिर्द घूमती है। अपने इकलौते पुत्र की मृत्यु के बाद, उनके पति तीर्थ स्थान में रहने चले जाते हैं और वृद्धावस्था में सोमा बुआ अकेली रह जाती हैं। अकेलापन उनके जीवन में धीरे-धीरे एक स्थायी सन्नाटा बनकर उतर आता है। वे अपने पड़ोसियों में अपने बेटे की छवि तलाशती हैं, समाज से जुड़ना चाहती हैं, पर हर बार समाज उन्हें और अधिक अकेला छोड़ देता है। बिना किसी शिकायत के, वे चुपचाप अपने संघर्षों के साथ जीवन यापन करती रहती हैं।

इस मार्मिक कहानी का पाठ हैप्पी किड्स स्कूल के परिसर में आयोजित “कहानी विद कॉफी” की 12वीं कड़ी में किया गया। यह आयोजन एक वर्ष पूरे होने के अवसर पर हुआ, जिसमें आयोजनकर्ता संजय अथर्व को सभी वक्ताओं ने बधाई दी।

कार्यक्रम की शुरुआत स्वयं संजय अथर्व द्वारा कहानी पाठ से हुई। रामेश्वर उच्च विद्यालय के प्राचार्य मो. अबरार आलम ने कहा कि इस कहानी के माध्यम से नारी के अकेलेपन और सामाजिक क्षरण की गहराई को महसूस किया जा सकता है। नारायण मिश्रा ने कहा कि इस प्रकार के साहित्यिक आयोजनों से युवाओं में साहित्य के प्रति रुचि और संवेदना बढ़ेगी।

हिमांशु शेखर ने कहा कि यह कहानी नारी के अकेलेपन, उपेक्षा और संघर्ष की गवाही देती है, जो आज भी समाज में प्रासंगिक है। बीएचयू में हिंदी साहित्य के शोधार्थी मनीष कुमार ने कहानी की गहन चर्चा करते हुए साहित्य और समाज के आपसी संबंधों को उजागर किया, जिसे सभी श्रोताओं ने खूब सराहा।

गिरिडीह (झारखंड) से भूगोल विषय के शिक्षक मनीष कुमार ने भी कहानी पर चर्चा की और टिकारी में साहित्यिक आयोजनों की निरंतरता की सराहना की। वहीं, युवा शायर नदीम हसन ने सुझाव दिया कि ऐसे आयोजन काव्य और कवियों पर भी केंद्रित होने चाहिए।

कार्यक्रम में बीपीएन ग्लोबल स्कूल के निदेशक नामित राजा सहित कई साहित्यप्रेमी शामिल हुए, जबकि कई श्रोताओं ने ऑनलाइन जुड़कर अपनी प्रतिक्रियाएँ दीं।

कार्यक्रम का समापन प्रो. डॉ. राजन द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। उन्होंने सभी प्रतिभागियों से भविष्य में भी ऐसी साहित्यिक गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग लेने का आग्रह किया।

रिपोर्ट: विश्वनाथ आनंद.

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