सिमरा गांव की भोली-भाली महिलाओं के साथ हुई कथित धोखाधड़ी का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। जब इस विषय पर संवाददाता ने औरंगाबाद लोकसभा क्षेत्र के पूर्व भाजपा सांसद सुशील कुमार सिंह से सवाल किया, तो उन्होंने भी इसे एक गंभीर मामला बताया और गहन जांच की जरूरत पर जोर दिया।
जानकारी के अनुसार, गांव की कई महिलाओं के नाम पर स्थानीय बैंक द्वारा व्यापार के नाम पर लोन जारी कर दिया गया। हैरानी की बात यह है कि बैंक प्रबंधन या कर्मचारियों ने यह तक जांच नहीं की कि संबंधित महिलाओं ने वास्तव में लोन के लिए आवेदन किया भी है या नहीं। यदि आवेदन किया गया था, तो कितनी राशि के लिए किया गया था, इसकी भी कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई।
सबसे गंभीर सवाल यह उठता है कि बैंक ने इन महिलाओं को कभी यह जानकारी नहीं दी कि उनके नाम पर लोन पास हो चुका है। न तो लोन की राशि बताई गई और न ही इसकी शर्तों की जानकारी दी गई। इससे यह शक और गहरा हो जाता है कि कहीं बैंक प्रबंधक, कर्मचारी और कोई बाहरी टीम मिलकर इस पूरे खेल को अंजाम तो नहीं दे रही थी।
इस मामले में यह आशंका भी जताई जा रही है कि किसी NGO की भूमिका भी इसमें हो सकती है। संभव है कि NGO ने महिलाओं को अंधेरे में रखकर, बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत से उनके नाम पर लोन पास करवाया हो और फिर पूरी रकम की निकासी कर ली गई हो।
प्रेस वार्ता के दौरान जब संवाददाता ने पूर्व सांसद सुशील कुमार सिंह से इस मुद्दे पर सीधा सवाल किया, तो उन्होंने भी माना कि यह पूरा मामला किसी NGO और बैंक स्टाफ की मिलीभगत का हो सकता है। उन्होंने कहा कि इस मामले की निष्पक्ष जांच दोनों एंगल से होनी चाहिए, तभी सच्चाई सामने आ पाएगी।
यह मामला न सिर्फ महिलाओं के आर्थिक शोषण का है, बल्कि बैंकिंग सिस्टम की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। अब देखना यह होगा कि जांच में क्या सच सामने आता है और दोषियों पर क्या कार्रवाई होती है।
यह जानकारी सभी पीड़ित महिलाओं को तब मिली, जब वे अपने स्थानीय बैंक में पैसा निकालने गईं। यह पैसा मनरेगा से प्राप्त राशि और बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले एनडीए सरकार व बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सहयोग से “जीविका दीदी” महिलाओं को व्यवसाय शुरू करने के लिए दी गई पहली किस्त थी। इस पहली किस्त के रूप में महिलाओं के खाते में ₹10,000 जमा किए गए थे।
सरकार ने यह भी कहा था कि अगर जीविका दीदी महिलाएं अपना काम ठीक से करेंगी, तो आगे ₹1,90,000 और दिए जाएंगे। यह राशि भी इसी बैंक खाते में आई थी। जब गांव की भोली-भाली महिलाएं यही पैसा निकालने बैंक गईं, तो बैंक स्टाफ ने उन्हें बताया कि उनका खाता बंद हो चुका है। स्टाफ ने कहा कि लोन लेने की वजह से खाता बंद है और उस लोन के खाते में अभी तक एक रुपया भी जमा नहीं किया गया है, इसलिए पैसा नहीं निकलेगा।
यह सुनकर महिलाओं को शक हुआ। इसके बाद उन्होंने औरंगाबाद लोकसभा क्षेत्र के पूर्व भाजपा सांसद सुशील कुमार सिंह से मिलकर पूरी बात बताई। मामले की गंभीरता को समझते हुए सांसद ने साइबर थाना, औरंगाबाद में फोन कर बात की। साइबर थाना की ओर से उन्हें बताया गया कि सभी पीड़ित महिलाओं से लिखित आवेदन दिलवाया जाए, तभी निष्पक्ष जांच हो सकेगी और यह पता चलेगा कि इस लोन मामले में किन लोगों की मिलीभगत से गड़बड़ी हुई है।
पूर्व सांसद सुशील कुमार सिंह ने पत्रकारों से बातचीत में यह भी कहा कि संभव है कि बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले इंडिया गठबंधन से जुड़े कुछ लोग गांवों में जाकर भोली-भाली जीविका दीदी महिलाओं से सरकार से पैसा दिलाने के नाम पर गलत फॉर्म भरवाए हों। उसी समय महिलाओं से आधार कार्ड, पैन कार्ड और बैंक पासबुक जैसे कागज़ात भी ले लिए गए हों। उन्होंने आशंका जताई कि कहीं वही लोग इस धोखाधड़ी के मामले में शामिल तो नहीं हैं।
हालांकि उन्होंने यह भी साफ कहा कि वे किसी पर सीधे तौर पर आरोप नहीं लगा रहे हैं, लेकिन इस एंगल से भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उनका कहना है कि जब तक हर पहलू से ईमानदारी से जांच नहीं होगी, तब तक यह सच्चाई सामने नहीं आएगी कि इतने बड़े लोन घोटाले की असली हकीकत क्या है।
Report : Ajay Kumar Pandey.
