दोस्तों, पिछले कुछ दिनों से एक खबर मुझे बार-बार परेशान कर रही है। ओडिशा के बालासोर जिले में एक 35 साल के शख्स स्क मकंदर मोहम्मद को सिर्फ शक की बिना पर भीड़ ने इतना मारा कि वो अस्पताल में दम तोड़ दिया। ये घटना 14 जनवरी की है, और अब पूरी डिटेल्स सामने आ रही हैं। मैं सोच रहा हूं कि इंसानियत कहां जा रही है भाई? चलो, आज इसी पर बात करते हैं, आराम से, जैसे अपने घर में बैठकर न्यूज डिस्कस कर रहे हों।
सबसे पहले घटना क्या हुई? पुलिस और न्यूज रिपोर्ट्स के मुताबिक, मकंदर एक पिकअप वैन में हेल्पर का काम करता था। वैन में कुछ मवेशी लदे थे। 14 जनवरी की रात को सहादा गांव के पास कुछ लोग आए, वैन रोकी और गौ तस्करी का शक करके ड्राइवर और हेल्पर पर हमला कर दिया। मकंदर को प्लास्टिक पाइप, लाठी और धारदार हथियारों से मारा। रिपोर्ट्स में लिखा है कि हमलावरों ने उसे ‘जय श्री राम’ और ‘गौ माता की जय’ बोलने को मजबूर किया। वो बोला भी, लेकिन मारना नहीं रुका। दोनों घायल हो गए, पुलिस की PCR वैन आई और उन्हें बालासोर हॉस्पिटल ले गई, लेकिन मकंदर की जान नहीं बच सकी।
मकंदर के घर में पत्नी और तीन छोटे-छोटे बच्चे हैं। वो परिवार का इकलौता कमाने वाला था। सोचो, अब वो लोग कैसे गुजारा करेंगे? जिला प्रशासन ने रेड क्रॉस फंड से 20 हजार रुपये की मदद दी है, लेकिन ये कितना काफी है? परिवार वाले बाकी आरोपी की जल्दी गिरफ्तारी मांग रहे हैं।
पुलिस ने क्या किया? बालासोर सदर पुलिस ने दो FIR दर्ज कीं – एक मवेशी चोरी की, दूसरी मॉब लिंचिंग की। भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(2) के तहत केस दर्ज हुआ, जो भीड़ द्वारा हत्या के लिए है। तीन लोग गिरफ्तार हो चुके हैं, आठ और की पहचान हुई है, उनकी तलाश चल रही है। मवेशियों को बचाकर एक गोशाला में छोड़ा गया। पुलिस कह रही है कि सख्त कार्रवाई होगी, कोई बख्शा नहीं जाएगा।
दोस्तों, ये कोई पहली घटना नहीं है। 2024 में ओडिशा में BJP की सरकार आई, उसके बाद गौ रक्षा के नाम पर ऐसी घटनाएं बढ़ने की बात हो रही है। विपक्षी पार्टियां, जैसे कांग्रेस और अन्य, सरकार पर हमला बोल रहे हैं कि लॉ एंड ऑर्डर पूरी तरह फेल हो गया है। कुछ लोग कह रहे हैं कि गौ रक्षकों को खुली छूट मिली हुई है। लेकिन पुलिस का कहना है कि वो न्यूट्रल हैं और कानून के हिसाब से काम कर रहे हैं।
सोशल मीडिया पर भी काफी गुस्सा है। एक तरफ लोग घटना की निंदा कर रहे हैं, दूसरे तरफ कुछ लोग शक की वजह से जस्टिफाई करने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन भाई, कानून हाथ में लेना कहां तक सही है? अगर शक है तो पुलिस को बताओ ना, खुद जज, जूरी और जल्लाद बनने की क्या जरूरत? मकंदर ने नारे भी बोले, फिर भी नहीं छोड़ा – ये तो सरासर क्रूरता है।
मुझे सबसे दुख ये होता है कि ऐसी घटनाएं अब जैसे नॉर्मल हो गई हैं। पहले हर लिंचिंग पर बड़ा आउट्रेज होता था, न्यूज चैनल्स दिनभर बहस करते थे, विपक्ष सड़क पर उतरता था। लेकिन अब? चुप्पी ज्यादा है। सोशल मीडिया पर भी जल्दी ट्रेंड खत्म हो जाता है। क्या सच में हम इतने बेहरम हो गए हैं कि एक इंसान की जान जाने पर भी दिल नहीं पसीजता? मुस्लिम हो या कोई और, किसी की जान की कीमत सिर्फ शक से नहीं चुकाई जा सकती।
ये घटना हमें सोचने पर मजबूर करती है – क्या हमारा समाज इतना बंट चुका है कि धर्म और अफवाहें इंसानियत पर भारी पड़ रही हैं? सरकारों को सख्त कानून बनाने चाहिए, गौ रक्षा के नाम पर हिंसा करने वालों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। और हम सबको भी आवाज उठानी चाहिए, ताकि ऐसी घटनाएं रुकें।
आप क्या सोचते हो दोस्तों? क्या ये घटनाएं बढ़ रही हैं या मीडिया ज्यादा हाइलाइट कर रहा है? क्या पुलिस और सरकार काफी कर रही है? कमेंट में बताओ। और हां, अगर पोस्ट अच्छी लगी तो शेयर करना, ताकि ज्यादा लोग जागरूक हों। किसी की जान बच सकती है हमारी आवाज से।
Report: ismatimes news desk.
