गया जी (बिहार) में एक सादा लेकिन मायने रखने वाला कार्यक्रम हुआ, जहाँ भारत के महान शिक्षाविद, दार्शनिक और देश के पूर्व राष्ट्रपति डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन की 51वीं पुण्यतिथि याद की गई। ये आयोजन शहर के एक स्थानीय चौक पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा के पास हुआ, जहाँ लोगों ने इकट्ठा होकर उन्हें खिराज-ए-अकीदत पेश की।
सबसे पहले डॉक्टर राधाकृष्णन की तस्वीर पर फूल चढ़ाए गए, उसके बाद उनके पूरे जीवन और कामयाबियों पर तफसील से बात की गई। कार्यक्रम में कई नेता और समाज के लोग मौजूद थे, जिन्होंने उनके इल्मी और फिक्र वाले सफर को याद किया।
वक्ताओं ने कहा कि डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन का पूरा जीवन हम सब के लिए एक मिसाल है। उन्होंने एक शिक्षक और कुलपति के तौर पर अपनी पहचान बनाई, फिर देश के पहले उपराष्ट्रपति बने और बाद में राष्ट्रपति की जिम्मेदारी भी संभाली। उनका ये सफर आज भी खास तौर पर तालीम के मैदान में काम करने वालों के लिए बहुत बड़ी प्रेरणा है।
लोगों ने ये भी कहा कि अगर हम उनके बताए रास्ते पर चलें, तो हमारा देश और भी तरक्की कर सकता है और दुनिया के बेहतरीन देशों में अपनी जगह मजबूत बना सकता है।
उनकी तालीमी खिदमतों को देखते हुए ही हर साल 5 सितंबर को उनकी पैदाइश के दिन को पूरे भारत में शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाता है। इसी दिन देश के बेहतरीन शिक्षकों को सरकार की तरफ से सम्मान भी दिया जाता है।
वक्ताओं ने ये भी याद दिलाया कि डॉक्टर राधाकृष्णन की इल्मी काबिलियत को सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया मानती थी। ब्रिटेन के एडिनबरा यूनिवर्सिटी में दिए गए अपने एक खिताब में उन्होंने कहा था कि इंसानियत को एक होना चाहिए। उनका मानना था कि इंसानी तारीख का असली मकसद तब ही पूरा होगा, जब पूरी दुनिया में अमन और भाईचारा कायम करने की कोशिश की जाए।
आखिर में नेताओं ने ये मांग भी रखी कि गया जिले में मौजूद दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय और आईआईएम के परिसर में डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन की आदमकद प्रतिमा लगाई जाए, ताकि आने वाली नस्लें भी उनसे प्रेरणा ले सकें।
रिपोर्ट: विश्वनाथ आनंद.
