छात्रों में बढ़ता रिलेशनशिप स्ट्रेस चिंता का विषय, पूजा ऋतुराज ने दी सलाह

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पटना (बिहार) में नवसृजन संस्था, कदम कुआं की सचिव पूजा ऋतुराज ने मीडिया से बातचीत के दौरान छात्रों और युवाओं में बढ़ते “रिलेशनशिप स्ट्रेस” को लेकर चिंता जताई। उनका कहना था कि आज के समय में यह समस्या तेजी से बढ़ रही है और यह केवल भावनात्मक परेशानी तक सीमित नहीं है, बल्कि पढ़ाई, मानसिक स्वास्थ्य और पूरे भविष्य पर भी असर डाल रही है।

उन्होंने बताया कि रिलेशनशिप स्ट्रेस का मतलब है किसी प्रेम संबंध या दोस्ती में तनाव, असुरक्षा, झगड़े या मानसिक दबाव महसूस होना। किशोर और युवा उम्र में भावनाएं बहुत तेज होती हैं, इसलिए छोटी-छोटी बातें भी बड़े तनाव का कारण बन जाती हैं।

पूजा ऋतुराज ने इसके कई कारण भी बताए। उनके अनुसार सबसे बड़ा कारण भावनात्मक अपरिपक्वता है, क्योंकि कम उम्र में रिश्तों को संभालने की पूरी समझ नहीं होती। इसके अलावा सोशल मीडिया का असर भी बहुत ज्यादा है। लगातार ऑनलाइन रहना, एक-दूसरे की तुलना करना, ‘लास्ट सीन’ या ‘रीड’ जैसी चीजें भी बेवजह तनाव बढ़ाती हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि पढ़ाई और करियर का दबाव भी रिश्तों को प्रभावित करता है। कई बार छात्र दोनों के बीच संतुलन नहीं बना पाते। साथ ही शक और अविश्वास भी रिश्तों को कमजोर कर देता है। वहीं ब्रेकअप का डर या उसका अनुभव युवाओं को अंदर से तोड़ सकता है, जिससे अकेलापन और आत्मविश्वास की कमी भी आ जाती है।

इसके दुष्परिणाम भी उन्होंने विस्तार से बताए—पढ़ाई में ध्यान न लगना, चिंता और तनाव, डिप्रेशन, आत्मविश्वास में कमी, परिवार और दोस्तों से दूरी और कई बार गलत फैसले लेने की संभावना।

इससे बचाव के लिए उन्होंने कुछ सुझाव भी दिए। उनका कहना था कि छात्रों को अपनी प्राथमिकताएं तय करनी चाहिए और पढ़ाई व भविष्य को पहले रखना चाहिए। रिश्तों में सीमाएं बनाना जरूरी है ताकि व्यक्ति खुद को न खो दे। गलतफहमियों को बातचीत से सुलझाना चाहिए और सोशल मीडिया का सीमित उपयोग करना चाहिए। जरूरत पड़ने पर माता-पिता, शिक्षक या काउंसलर से मदद लेने में झिझक नहीं होनी चाहिए।

अंत में पूजा ऋतुराज ने कहा कि रिलेशनशिप जीवन का एक हिस्सा है, लेकिन पूरी जिंदगी नहीं। अगर छात्र अपने लक्ष्य और मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देंगे, तो वे न केवल बेहतर रिश्ते बना पाएंगे, बल्कि अपना भविष्य भी सुरक्षित कर सकेंगे।

रिपोर्ट : विश्वनाथ आनंद.

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