ध्रुव राठी का पॉडकास्ट विवाद: मोदी को “गधा” कहना और RSS की फ़ासीवादी जड़ें?

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आजकल सोशल मीडिया पर एक चीज़ काफी वायरल हो रही है – बर्लिन बेस्ड यूट्यूबर ध्रुव राठी का लेटेस्ट पॉडकास्ट “Learn By KK Create” में दिया गया स्टेटमेंट। जब होस्ट ने उनसे पूछा, “मोदी नहीं तो कौन?”, तो ध्रुव ने सीधे कहा: “मोदी से बेहतर तो एक असली गधा होगा!”

यानी उनके अनुसार अगर कोई असली गधा प्रधानमंत्री बन जाए, तो बेहतर होगा, क्योंकि वह कुछ नहीं करेगा, जबकि मोदी के नेतृत्व में देश सक्रिय रूप से नुकसान झेल रहा है। यह वीडियो इंस्टाग्राम, ट्विटर (X) और YouTube Shorts पर वायरल हो गया।

लोगों की प्रतिक्रियाएँ मिली-जुली हैं:

कुछ लोग कह रहे हैं, “सही कहा भाई!”

मोदी समर्थक गुस्से में हैं और गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं।

कुछ लोग बोल रहे हैं कि यह फ्री स्पीच है, पर भाषा सम्मानजनक होनी चाहिए।

पॉडकास्ट में क्या हुआ?

ध्रुव ने इस पॉडकास्ट में राजनीति, अर्थव्यवस्था और लोकतंत्र पर खुलकर चर्चा की। उनका कहना था कि मोदी की नीतियों से अर्थव्यवस्था प्रभावित हुई है, नौकरियाँ कम हुई हैं, किसानों और संस्थानों पर दबाव बढ़ा है। बेरोजगारी और महंगाई के मुद्दे भी उन्होंने उठाए। उनका मुख्य बिंदु था कि सक्रिय नुकसान करने से बेहतर है कि कुछ न किया जाए।

RSS पर बड़ा बयान

ध्रुव ने RSS पर भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि RSS का ढांचा, यूनिफ़ॉर्म (खाकी) और सल्यूट शैली जर्मन नाज़ी और इटालियन फ़ासीवादी मॉडल से प्रेरित हैं।

इतिहासकारों के अनुसार, RSS के संस्थापक K.B. Hedgewar ने 1925 में खाकी यूनिफ़ॉर्म शुरू किया। दूसरे प्रमुख M.S. Golwalkar ने अपनी किताबों में नाज़ी जर्मनी की नीतियों की तारीफ़ की।

ध्रुव का कहना था कि RSS राष्ट्रीयता के नाम पर इसे छुपाता है, जबकि RSS हमेशा कहता है कि उनका उद्देश्य सिर्फ़ हिंदू संस्कृति, अनुशासन और देशभक्ति है, कोई विदेशी विचार नहीं अपनाया गया।

असली स्थिति

मोदी सरकार के कुछ उपलब्धियाँ भी हैं – इंफ्रास्ट्रक्चर विकास और डिजिटल इंडिया, लेकिन आलोचक बेरोजगारी, असमानता और प्रेस की स्वतंत्रता पर सवाल उठाते हैं। RSS की यूरोपीय फ़ासीवादी जड़ों पर भी ऐतिहासिक बहस है। कई विद्वानों के अनुसार शुरुआती RSS पर यूरोपियन फ़ासीवादी प्रभाव जरूर थे, लेकिन आधुनिक RSS ने खुद को विकसित किया है।

यह विवाद हमें याद दिलाता है कि भारत में राय कितनी मजबूत और विविध है। ध्रुव राठी जैसे क्रिएटर्स तथ्यों और व्यंग्य के माध्यम से आवाज उठाते हैं, लेकिन हमें हमेशा संतुलन और सम्मान का ध्यान रखना चाहिए। गधा वाला कमेंट सही था या ज्यादा, RSS के इतिहास पर सहमत हैं या नहीं, यह खुला सवाल है।

आप क्या सोचते हैं? अपने विचार कमेंट में साझा करें और पोस्ट को शेयर करें।

रिपोर्ट: मोहम्मद इस्माइल.

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