गया (बिहार) में एक भावुक माहौल तब देखने को मिला जब भारतीय राष्ट्रीय ब्राह्मण महासभा और कौटिल्य मंच की ओर से शोकसभा का आयोजन किया गया। इस मौके पर डॉ. विवेकानंद मिश्र ने कहा कि आज समाज को अपने उन श्रेष्ठ और सेवाभावी लोगों की कमी गहराई से खल रही है, जिन्होंने त्याग, तपस्या और सेवा को ही अपना जीवन बना लिया था।
उन्होंने प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि ऐसे विरले व्यक्तित्व भले ही आज हमारे बीच शारीरिक रूप से नहीं हैं, लेकिन उनके संस्कार, विचार और जीवन-दर्शन आज भी हमें रास्ता दिखा रहे हैं। उन्होंने अपनी कमाई ही नहीं, बल्कि अपना समय, श्रम और सामर्थ्य भी समाज और सनातन संस्कृति के संरक्षण में लगा दिया। निर्भीकता, आत्मविश्वास, पवित्रता और सामाजिक न्याय जैसे मूल्यों को उन्होंने सिर्फ कहा नहीं, बल्कि जीकर दिखाया।
डॉ. मिश्र ने कहा कि सीमित संसाधनों में भी वे लोग हमेशा कमजोर और जरूरतमंदों के साथ खड़े रहे। यही उनकी असली पहचान थी। हाल के दिनों में कई ऐसे सम्मानित लोगों का असामयिक निधन हुआ है, जिससे समाज को अपूरणीय क्षति पहुंची है। इनमें प्रदेश भाजपा के वरिष्ठ नेता भोला मिश्रा की धर्मपत्नी, हम पार्टी के वरिष्ठ प्रदेश नेता सुनील चौबे की माताजी, जी महेश बाबू गुप्त की पत्नी लक्ष्मी देवी, वरिष्ठ पत्रकार जितेंद्र मिश्रा के पिता पंडित हरि नारायण मिश्रा, समाजसेवी नरसिंह मिश्रा, आयुर्वेद के प्रसिद्ध चिकित्सक यू.के. मिश्रा और डॉ. नरेंद्र कुमार मिश्रा, दखनेर परैया के शिक्षक विनोद मिश्रा, धनाडी (औरंगाबाद) के पवन मिश्रा, श्याम सुंदर पाठक, गुर्दा के माधव बाबू, उपेन बाबू, ओदी बाबू की पत्नी गायत्री देवी, कौटिल्य मंच के सचिव किशोर बाबू अग्निवार के पिताजी किशन बाबू अग्निवार और बच्चू बाबू अग्निवार सहित कई अन्य श्रेष्ठजन शामिल हैं।
डॉ. विवेकानंद पथ, गोल बागीचा, गया में आयोजित शोकसभा में बड़ी संख्या में लोग जुटे और सभी दिवंगत आत्माओं को श्रद्धांजलि दी। डॉ. विवेकानंद मिश्र ने अपने संबोधन में कहा कि किसी भी समाज की असली ताकत उसके चरित्रवान और सेवाभावी लोग होते हैं। जब ऐसे लोग हमें छोड़कर चले जाते हैं, तो एक खालीपन पैदा हो जाता है। उस खालीपन को सिर्फ उनके आदर्शों को अपनाकर ही भरा जा सकता है।
सम्मानित साहित्यकार आचार्य राधा मोहन मिश्र ‘माधव’ ने कहा कि ऐसे महान लोग किसी एक परिवार या संस्था की नहीं, बल्कि पूरे समाज की अमूल्य धरोहर होते हैं। विष्णुपद मंदिर चौदह सइयां समिति के सचिव गजाधर लाल पाठक ने कहा कि इन सभी दिवंगत श्रेष्ठजनों का जीवन एक जीवंत पाठशाला की तरह था, जहां सेवा और संस्कार की शिक्षा मिलती थी।
किरण पाठक और मृदुला मिश्रा ने कहा कि उनके जाने से जो खालीपन आया है, वह हमें उनके आदर्शों के और करीब ले जाने की प्रेरणा देता है। आचार्य सच्चिदानंद मिश्रा ‘नैकी’ ने अपने संक्षिप्त वक्तव्य में कहा कि धर्म, संस्कृति और समाज के लिए समर्पित जीवन ही सच्चे अर्थों में सफल जीवन है, और दिवंगत श्रेष्ठजन उसी आदर्श के प्रतीक थे।
शोकसभा में स्वामी सुमन गिरी, सिद्धनाथ मिश्रा (बबलू बाबा), आचार्य सुनील कुमार पाठक, आचार्य अभय कुमार पाठक, आचार्य विनयकांत मिश्रा, दूधेश्वर पंडित, डॉ. विनोद कुमार, दीपक पाठक, उत्तम पाठक, डॉ. मंटू मिश्रा, शंभू मिश्रा, दिलीप कुमार, नीरज वर्मा, अजय मिश्रा, मुकेश मिश्रा, रंजीत पाठक, पवन मिश्रा, डॉ. प्रमोद कुमार मिश्रा, आचार्य अरुण मिश्रा, मधुप, विनोद तिवारी, मुखिया जितेंद्र मिश्रा, रमाशंकर मिश्रा, सुरेंद्र उपाध्याय, डॉ. रविंद्र मिश्रा, देवेंद्र पाठक, बालमुकुंद मिश्र, पंडित निशिकांत मिश्र, डॉ. प्रताप नारायण मिश्र, मनीष मिश्रा, शिक्षक केदारनाथ मिश्र, विक्रम मिश्रा, राजीव नयन पांडेय, पंडित जगन्नाथ मिश्र, सोनी मिश्रा, रंजना पांडेय, ऋषिकेश गुर्दा, राजीव लाल गुर्दा, शंभूनाथ गुर्दा, गजाधर लाल कटरियार, कुंदन मिश्रा, अमरनाथ पांडेय, शालिग्राम बाबू, कुमारी शमी सहित अनेक गणमान्यजन उपस्थित रहे।
सभी ने एक स्वर में दिवंगत आत्माओं को श्रद्धांजलि दी और उनके आदर्शों को अपने जीवन में उतारने का संकल्प लिया। अंत में ईश्वर से प्रार्थना की गई कि वे दिवंगत आत्माओं को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और शोकाकुल परिवारों को इस दुख को सहने की शक्ति प्रदान करें।
Report : विश्वनाथ आनंद.
