औरंगाबाद (बिहार) में कहा जाता है कि इंसान की उम्र चाहे जितनी भी हो जाए, लेकिन जब रंगों का त्योहार होली आता है तो हर किसी का दिल बच्चा बन ही जाता है। माहौल में ऐसा रंग घुल जाता है कि बड़े-बुज़ुर्ग भी खुशी से झूम उठते हैं। कुछ ऐसा ही नज़ारा इस बार नगर पंचायत रफीगंज में देखने को मिला।
दरअसल, लोजपा (रामविलास) के वरीय नेता और समाजसेवी वीरेंद्र कुमार सिंह ने इस बार होली का त्योहार पूरे उत्साह और पारंपरिक अंदाज़ में मनाया। पोगर पंचायत के रहने वाले वीरेंद्र कुमार सिंह वैसे तो अपने सामाजिक कार्यों के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने देश के कई अच्छे अस्पतालों में जरूरतमंद और पीड़ित मरीजों का इलाज करवाकर उन्हें स्वस्थ कराने में मदद की है। लेकिन इस बार होली के मौके पर उनका एक अलग ही रंग देखने को मिला।
होली की मस्ती जब शुरू हुई तो वीरेंद्र कुमार सिंह भी खुद को रोक नहीं पाए। उन्होंने अपने गांव की मिट्टी से जुड़ी पुरानी परंपराओं को याद करते हुए देहाती अंदाज़ में होली के गीत गाए। सबसे पहले उन्होंने पारंपरिक गीत की शुरुआत की—
“होली खेले रघुवीरा अवध में, होली खेले रघुवीरा।”
इसके बाद दूसरा गीत गूंजा—
“बाबा हरिहरनाथ सोनपुर में होली खेले।”
फिर वीर रस से भरा गीत भी उन्होंने बड़े जोश के साथ गाया—
“अहो बाबू कुंवर सिंह तेगवा बहादुर, बंगला में उड़ेला अबीर।”
इसके बाद एक और पारंपरिक गीत सुनाया—
“सिया चले अवधवा की ओर, होलिया खेले राम लला।”
इन गीतों के साथ-साथ उन्होंने खुद ही नाल बजाकर माहौल को और भी रंगीन बना दिया। संगीत से उनका पुराना जुड़ाव है, इसलिए उन्होंने पूरे जोश और दिल से यह प्रस्तुति दी। वहां मौजूद लोगों ने भी उनकी इस ऊर्जा और उत्साह की खूब सराहना की। कई लोगों ने कहा कि उम्र बढ़ने के बावजूद वीरेंद्र बाबू के जोश में आज भी कोई कमी नहीं है, जो सच में काबिले-तारीफ बात है।
गौरतलब है कि वीरेंद्र कुमार सिंह सिर्फ एक राजनीतिक नेता ही नहीं बल्कि एक सक्रिय समाजसेवी के रूप में भी पहचाने जाते हैं। जब भी किसी व्यक्ति पर संकट आता है, वह मदद के लिए हमेशा आगे रहते हैं। कई बार उन्होंने विभागीय परेशानियों में फंसे लोगों की मदद के लिए अपनी पार्टी के शीर्ष नेताओं तक बात पहुंचाकर लोगों को राहत दिलाने का काम किया है।
इस बार रफीगंज की होली में उनका यह पारंपरिक और जोशीला अंदाज़ लोगों के लिए खास आकर्षण बन गया। रंग, संगीत और लोकपरंपरा के साथ मनाई गई यह होली लोगों को लंबे समय तक याद रहेगी।
रिपोर्ट: अजय कुमार पाण्डेय.
