नई दिल्ली: देश की सबसे बड़ी प्रवेश परीक्षाओं को आयोजित करने वाली नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी NTA एक बार फिर विवादों के केंद्र में है। पिछले दो वर्षों में NEET, CUET, UGC-NET और JEE Main जैसी परीक्षाओं में सामने आई गड़बड़ियों ने लाखों छात्रों और उनके परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। अब कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने इस पूरे मामले को लेकर मोदी सरकार पर सीधा हमला बोला है और NTA के “बुनियादी पुनर्गठन” की मांग उठाई है।
जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक लंबा पोस्ट लिखते हुए कहा कि लगातार हो रही परीक्षा संबंधी गलतियां और पेपर लीक केवल तकनीकी खामियां नहीं हैं, बल्कि यह छात्रों के भविष्य के साथ गंभीर खिलवाड़ है। उन्होंने संसदीय स्थायी समिति की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि अब केवल सुधार की बात करना काफी नहीं है, बल्कि पूरे परीक्षा तंत्र को दोबारा खड़ा करने की जरूरत है।
NEET-UG विवाद के बाद बढ़े सवाल
पिछले साल NEET-UG परीक्षा को लेकर देशभर में भारी विवाद हुआ था। कई राज्यों से पेपर लीक की खबरें सामने आई थीं। छात्रों और अभिभावकों ने आरोप लगाया कि परीक्षा प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी नहीं रही। बाद में मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा और देशभर में NTA की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे।
इस मुद्दे ने केवल मेडिकल प्रवेश परीक्षा तक खुद को सीमित नहीं रखा। धीरे-धीरे अन्य राष्ट्रीय परीक्षाओं में भी गड़बड़ियों की शिकायतें सामने आने लगीं। कहीं परीक्षा केंद्रों में अव्यवस्था थी, तो कहीं रिजल्ट में देरी और उत्तर कुंजी में गलतियों को लेकर छात्रों का गुस्सा बढ़ता गया।
संसदीय समिति की रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता
जयराम रमेश ने संसद की स्थायी समिति की 371वीं रिपोर्ट का जिक्र करते हुए कहा कि केवल 2024 में NTA द्वारा आयोजित 14 राष्ट्रीय परीक्षाओं में से 5 परीक्षाओं में गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि कुछ परीक्षाएं स्थगित करनी पड़ीं, जबकि कुछ में पेपर लीक और तकनीकी गड़बड़ियों ने छात्रों का भरोसा कमजोर किया।
समिति ने साफ शब्दों में कहा कि ऐसी घटनाएं परीक्षा प्रणाली पर भरोसे को नुकसान पहुंचाती हैं। रिपोर्ट में यह भी सुझाव दिया गया कि NTA को अपनी कार्यप्रणाली में बड़े स्तर पर सुधार करने होंगे ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
JEE Main और CUET भी विवादों में
मामला सिर्फ NEET तक सीमित नहीं रहा। जयराम रमेश ने JEE Main 2025 का भी जिक्र किया, जिसमें उत्तर कुंजी में त्रुटियों के कारण कई प्रश्न हटाने पड़े। छात्रों ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि गलत उत्तरों की वजह से उनकी रैंकिंग प्रभावित हुई।
इसके अलावा CUET परीक्षा भी लगातार विवादों में रही। कई छात्रों ने परीक्षा केंद्रों में तकनीकी खराबी, देरी और रिजल्ट जारी होने में अनियमितताओं की शिकायत की। इसका असर विश्वविद्यालयों के पूरे शैक्षणिक कैलेंडर पर पड़ा। दाखिले समय पर नहीं हो पाए और हजारों छात्रों को महीनों तक इंतजार करना पड़ा।
विशेषज्ञों का मानना है कि बार-बार होने वाली देरी और अनिश्चितता के कारण छात्र अब निजी विश्वविद्यालयों की ओर रुख कर रहे हैं, जहां प्रवेश प्रक्रिया अपेाकृत स्थिर और समयबद्ध मानी जाती है।
संसद के प्रति जवाबदेही पर भी सवाल
कांग्रेस नेता ने यह भी आरोप लगाया कि NTA संसद के प्रति अपनी जवाबदेही ठीक तरह से नहीं निभा रही है। उन्होंने कहा कि संसदीय समिति ने अपनी रिपोर्ट में यह उल्लेख किया था कि NTA लगातार अपनी वार्षिक रिपोर्ट संसद में पेश करने में विफल रही है और केवल ऑडिटेड वित्तीय विवरण उपलब्ध कराती रही।
विपक्ष का आरोप है कि केंद्र सरकार ने दशकों पुरानी प्रवेश प्रणालियों को खत्म करके एक केंद्रीकृत व्यवस्था लागू की, लेकिन उस व्यवस्था को पर्याप्त जवाबदेही और पारदर्शिता के दायरे में नहीं रखा गया।
शिक्षा मंत्री की पुरानी स्वीकारोक्ति फिर चर्चा में
जयराम रमेश ने शिक्षा मंत्री के उस पुराने बयान का भी जिक्र किया जिसमें उन्होंने कहा था कि NTA को “बहुत सुधार की जरूरत” है। कांग्रेस नेता ने सवाल उठाया कि जब खुद सरकार ने एजेंसी में खामियों को स्वीकार किया था, तो पिछले दो वर्षों में क्या ठोस कार्रवाई हुई।
उनका कहना है कि अगर लगातार परीक्षाओं में गड़बड़ियां सामने आ रही हैं, तो इसका मतलब साफ है कि सुधार के दावे ज़मीन पर असर नहीं दिखा पाए हैं।
छात्रों और अभिभावकों में बढ़ती बेचैनी
देशभर में लाखों छात्र हर साल इन परीक्षाओं की तैयारी करते हैं। कई छात्र छोटे शहरों और गांवों से आते हैं, जहां परिवार अपनी पूरी जमा पूंजी बच्चों की पढ़ाई पर खर्च करता है। ऐसे में पेपर लीक, परीक्षा रद्द होने या रिजल्ट में गड़बड़ी जैसी घटनाएं छात्रों को मानसिक और आर्थिक दोनों तरह से प्रभावित करती हैं।
कई छात्रों का कहना है कि एक परीक्षा के लिए वे वर्षों तक मेहनत करते हैं, लेकिन जब परीक्षा प्रणाली पर ही भरोसा न रहे तो मेहनत का महत्व कम हो जाता है।
क्या NTA में बड़े बदलाव होंगे?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या केंद्र सरकार NTA में बड़े स्तर पर बदलाव करेगी या नहीं। विपक्ष लगातार एजेंसी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहा है, जबकि सरकार सुधारों की बात कर रही है।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि केवल तकनीकी बदलाव काफी नहीं होंगे। परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और सुरक्षा के लिए मजबूत तंत्र बनाना जरूरी है। साथ ही छात्रों का भरोसा वापस जीतना भी सबसे बड़ी चुनौती बन चुका है।
फिलहाल इतना साफ है कि देश की परीक्षा व्यवस्था को लेकर बहस अब और तेज होने वाली है। क्योंकि यह मामला केवल एक एजेंसी का नहीं, बल्कि करोड़ों छात्रों के भविष्य का है।
-ITN Desk.
