गुजरात में आम आदमी पार्टी की जमीनी ताकत बढ़ी, भाजपा को आदिवासी क्षेत्र में झटका
नई दिल्ली/अहमदाबाद, 28 अप्रैल 2026 : गुजरात के स्थानीय निकाय चुनावों के नतीजों ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। जबकि भाजपा ने शहरी और ज्यादातर ग्रामीण क्षेत्रों में अपना दबदबा बनाए रखा, वहीं आम आदमी पार्टी ने इस बार अपनी उपस्थिति मजबूत करके सबको चौंका दिया। पार्टी ने पहली बार नर्मदा जिला पंचायत पर कब्जा किया और 12 तालुका पंचायतों में जीत दर्ज की। कुल मिलाकर AAP ने 350 से ज्यादा सीटों पर अपना परचम लहराया।
यह प्रदर्शन 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले AAP के लिए एक बड़ा नैतिक बल है। पार्टी नेताओं ने इसे “जनता का विश्वास और विकल्प की तलाश” बताया है।
नर्मदा में AAP की बड़ी कामयाबी – आदिवासी क्षेत्र में बदलाव की हवा
नर्मदा जिला गुजरात का आदिवासी बहुल क्षेत्र है। यहां AAP ने 22 सीटों वाली जिला पंचायत में 15 सीटें जीत लीं, जबकि भाजपा को सिर्फ 7 सीटें मिलीं। कांग्रेस का खाता तक नहीं खुला।
नर्मदा जिले की कई तालुका पंचायतों में भी AAP ने शानदार प्रदर्शन किया:
डेडियापाड़ा तालुका पंचायत में 17 में से 17 सीटें लगभग साफ
सागबारा में भारी बहुमत
गरुड़ेश्वर (जहां स्टैच्यू ऑफ यूनिटी स्थित है) में मजबूत जीत
चिखड़ा (नई तालुका) में 16 में से 15 सीटें
यह जीत स्थानीय मुद्दों जैसे पानी, बिजली, सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा पर AAP की सक्रियता का नतीजा मानी जा रही है। पार्टी के स्थानीय नेता और विधायक चैतर वसावा की मेहनत को भी इसका बड़ा श्रेय दिया जा रहा है।
12 तालुका पंचायतों में AAP का कमाल
AAP ने नर्मदा के अलावा अन्य जिलों में भी तालुका पंचायतों पर कब्जा या अच्छा प्रदर्शन किया। कुछ प्रमुख नाम:
वलिया
बागासरा
लालपुर
जूनागढ़
पोषिना
विसावदार
छोटा उदेपुर क्षेत्र की कुछ तालुकाएं
पार्टी का दावा है कि कुल 350+ सीटों में कई जगहों पर वे दूसरी सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी हैं। 2021 के मुकाबले इस बार AAP की सीटों में कई गुना इजाफा हुआ है, जो पार्टी की जमीनी काम और संगठन विस्तार को दिखाता है।
भाजपा का भारी दबदबा, फिर भी AAP की उम्मीदें बरकरार
गुजरात में भाजपा का राज स्थापित है। इस बार भी पार्टी ने सभी 15 नगर निगमों (अहमदाबाद, सूरत, वडोदरा आदि) में क्लीन स्वीप किया। 34 जिला पंचायतों में से 33 पर भाजपा का कब्जा रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने इस जीत को “जनता का आशीर्वाद” बताया।
फिर भी राजनीतिक विश्लेषक मानते हैं कि नर्मदा जैसे आदिवासी क्षेत्र में AAP की यह सफलता भाजपा के लिए चिंता का विषय हो सकती है। गुजरात में कांग्रेस पहले से कमजोर है, अब AAP धीरे-धीरे उसकी जगह लेने की कोशिश कर रही है।
AAP नेताओं की प्रतिक्रिया – “2027 के लिए मजबूत आधार”
AAP के गुजरात प्रभारी गोपाल राय और राज्य अध्यक्ष इसुदान गढ़वी ने नतीजों पर खुशी जाहिर की। उन्होंने कहा कि “लंबे समय से चले आ रहे भाजपा-कांग्रेस के द्वंद्व से लोग थक चुके हैं। वे अब ईमानदार और काम करने वाली पार्टी की तलाश में हैं। नर्मदा की जीत इसी बदलाव की शुरुआत है।”
पार्टी का कहना है कि repression और संसाधनों की कमी के बावजूद उन्होंने अच्छा मुकाबला किया। कुछ रिपोर्ट्स में AAP ने कुल 380 सीटों का आंकड़ा भी दिया है।
क्या कहते हैं विश्लेषक?
सकारात्मक पक्ष AAP के लिए: पहली बार जिला पंचायत जीतना, आदिवासी वोट बैंक में सेंध, 2021 से बेहतर प्रदर्शन – ये सब 2027 के विधानसभा चुनाव में पार्टी को आत्मविश्वास देंगे।
चुनौतियां: शहरी क्षेत्रों (नगर निगमों) में AAP लगभग गायब रही। सूरत जैसे शहरों में पहले अच्छा प्रदर्शन था, इस बार बहुत कम सीटें मिलीं। पार्टी को पूरे राज्य में संगठन मजबूत करने की जरूरत है।
कांग्रेस का हाल: कांग्रेस एक बार फिर पीछे रह गई। कई जगहों पर उसके वोट AAP में शिफ्ट होते दिखे।
Report : ITN Desk.
