रमा खलखो झारखंड में महिला नेतृत्व और संगठन की नई पहचान बनकर उभरीं: हृदयानंद मिश्र.

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पटना (बिहार /झारखंड): झारखंड की राजनीति में कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं, जो केवल पद नहीं संभालते बल्कि अपने कार्य, व्यवहार और दूरदृष्टि से संगठन में नई ऊर्जा का संचार करते हैं. झारखंड महिला कांग्रेस की अध्यक्ष रमा खलखो आज उसी श्रेणी की एक सशक्त, ओजस्वी और कर्मठ महिला नेत्री के रूप में उभरकर सामने आई हैं. उनका हालिया पाकुड़ व साहिबगंज दौरा केवल एक राजनीतिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि महिला जागरण, संगठन सुदृढ़ीकरण और लोकतांत्रिक अधिकारों की चेतना का एक व्यापक अभियान था.

रमा खलखो ने जिस प्रकार जिला महिला कांग्रेस की कार्यकर्ताओं के साथ संवाद स्थापित किया, वह यह स्पष्ट करता है कि वे राजनीति को केवल सत्ता प्राप्ति का माध्यम नहीं बल्कि सामाजिक परिवर्तन का उपकरण मानती हैं. उन्होंने कार्यकर्ताओं को यह समझाया कि कोई भी संगठन तभी मजबूत बनता है, जब उसकी जड़ें गांव-गांव तक फैली हों और महिलाएं केवल भीड़ का हिस्सा नहीं बल्कि नेतृत्व की धुरी बनें. पाकुड़ और साहिबगंज की बैठकों में उन्होंने महिलाओं को न केवल राजनीतिक रूप से सक्रिय होने के लिए प्रेरित किया, बल्कि उन्हें प्रशिक्षित नेतृत्व कर्ता बनने का संदेश भी दिया.

आज जब देश में महिला आरक्षण कानून को लेकर लंबे समय से बहस चल रही है, तब रमा खलखो ने महिलाओं की आवाज को एक आंदोलन का स्वर देने का कार्य किया है. उन्होंने भाजपा सरकार पर महिला आरक्षण लागू करने में अनावश्यक विलंब और राजनीतिक कुत्सितता का आरोप लगाते हुए महिलाओं से प्रधानमंत्री को पोस्ट कार्ड लिखने का आह्वान किया.यह पहल लोकतंत्र में जनभागीदारी का एक अनूठा उदाहरण है.विशेष बात यह है कि इसकी शुरुआत उन्होंने स्वयं रांची जिले के सुदूर गांवों में जाकर की. यह बताता है कि वे केवल भाषण देने वाली नेत्री नहीं, बल्कि जमीन पर उतरकर संघर्ष करने वाली जननेता हैं.

रमा खलखो की सबसे बड़ी विशेषता उनकी सूक्ष्मदर्शी दृष्टि है.वे संगठन की छोटी-छोटी कमजोरियों को पहचानकर उसे दूर करने का प्रयास करती हैं. महिला कांग्रेस को उनके रूप में ऐसा नेतृत्व मिला है, जो केवल वर्तमान राजनीति को नहीं समझता बल्कि भविष्य के सामाजिक और राजनीतिक परिवर्तनों को भी भांपने की क्षमता रखता है. वे जानती हैं कि आने वाला समय महिलाओं के नेतृत्व का समय है और इसलिए वे गांव की साधारण महिला कार्यकर्ता को भी आत्मविश्वास, संवाद कला और राजनीतिक समझ से सशक्त बनाने में लगी हैं.उनका राजनीतिक अनुभव भी उन्हें अन्य नेताओं से अलग बनाता है.

रमा खलखो के रूप में उन्होंने जिस कुशलता और संवेदनशीलता से कार्य किया, उसे आज भी लोग याद करते हैं. रांची नगर निगम में उनके कार्यकाल को कई लोग स्वर्णिम युग की संज्ञा देते हैं. शहर के विकास, सफाई व्यवस्था, जनसंपर्क और प्रशासनिक पारदर्शिता को लेकर उनकी कार्यशैली ने यह साबित किया था कि यदि नेतृत्व ईमानदार और दूरदर्शी हो तो सीमित संसाधनों में भी बड़ा परिवर्तन संभव है.

आज झारखंड की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की आवश्यकता पहले से अधिक महसूस की जा रही है. ऐसे समय में रमा खलखो का नेतृत्व महिला कांग्रेस के लिए नई उम्मीद बनकर सामने आया है. वे महिलाओं को केवल चुनावी राजनीति तक सीमित नहीं रखना चाहतीं, बल्कि उन्हें सामाजिक न्याय, शिक्षा, अधिकार और लोकतांत्रिक चेतना की वाहक बनाना चाहती हैं.उनका यह प्रयास निश्चित रूप से झारखंड की राजनीति में एक नई विचारधारा और नई ऊर्जा का संचार करेगा.

पाकुड़ और साहिबगंज का उनका दौरा इस बात का प्रमाण है कि यदि नेतृत्व समर्पित हो, तो संगठन केवल कार्यालयों में नहीं बल्कि जनता के दिलों में खड़ा होता है. रमा खलखो ने अपने व्यवहार, संघर्ष और विचारों से यह सिद्ध किया है कि महिला नेतृत्व केवल प्रतीक नहीं, बल्कि परिवर्तन की वास्तविक शक्ति है.

झारखंड महिला कांग्रेस आज जिस मजबूती और सक्रियता के साथ आगे बढ़ रही है, उसमें रमा खलखो की दूरदृष्टि, संगठन क्षमता और जनसरोकारों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता की महत्वपूर्ण भूमिका है.

निस्संदेह, रमा खलखो आज झारखंड की महिलाओं के लिए केवल एक राजनीतिक चेहरा नहीं बल्कि आत्मविश्वास, संघर्ष और नेतृत्व की प्रेरणा बन चुकी हैं. उक्त बातें लेखक  हृदयानंद मिश्र एडवोकेट एवं सदस्य समन्वय समिति झारखंड प्रदेश कांग्रेस ने प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए कहीं.

रिपोर्ट : विश्वनाथ आनंद.

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