औरंगाबाद (बिहार) में सोमवार, 30 मार्च 2026 का दिन न्याय व्यवस्था के लिए एक अहम पहल लेकर आया। व्यवहार न्यायालय, औरंगाबाद में वर्चुअल तरीके से वल्नरेबल विटनेस डिपोज़िशन सेंटर (VWDC) यानी संवेदनशील गवाह साक्ष्य केंद्र का उद्घाटन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्घाटन पटना हाईकोर्ट के मुख्य न्यायमूर्ति संगम कुमार साहू ने किया, जबकि इस मौके पर हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति अनिल कुमार सिन्हा की भी गरिमामयी मौजूदगी रही।
इस खास मौके पर जिला न्यायालय के कई वरिष्ठ जज और न्यायिक अधिकारी मौजूद रहे। इनमें प्रधान जिला जज राजीव रंजन कुमार, परिवार न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश अरुण कुमार, और अन्य कई जिला जज व न्यायिक पदाधिकारी शामिल थे। इसके अलावा जिला विधिज्ञ संघ और अधिवक्ता संघ के पदाधिकारी और सैकड़ों वकील भी इस कार्यक्रम में शामिल हुए।
क्या है ये VWDC सेंटर?
इस सेंटर को आम भाषा में समझें तो ये एक ऐसा सुरक्षित जगह है जहां संवेदनशील या कमजोर गवाह अपनी गवाही बिना किसी डर के दे सकते हैं। इसे वीडियो गवाही केंद्र भी कहा जाता है।
यह सुविधा खास तौर पर उन लोगों के लिए बनाई गई है:
जो गवाह किसी खतरे में हों
मानसिक या शारीरिक रूप से कमजोर हों
बच्चे हों या यौन शोषण के पीड़ित हों
या जो आरोपी के सामने आने से डरते हों
क्यों ज़रूरी है ये सेंटर?
अधिकारियों के मुताबिक, इस सेंटर का मुख्य मकसद है कि गवाह बिना डर, दबाव या धमकी के अपनी बात रख सकें। कई बार देखा गया है कि गवाह डर की वजह से अपने बयान बदल देते हैं या कोर्ट में सच नहीं बोल पाते। ऐसे में ये सेंटर उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करता है।
यह पहल सुप्रीम कोर्ट के निर्देश और गवाह संरक्षण योजना 2018 के तहत शुरू की गई है, जिससे गवाहों को सुरक्षा देने और न्याय प्रक्रिया को मजबूत बनाने में मदद मिलेगी।
कैसे काम करेगा ये सेंटर?
ई-कोर्ट प्रोजेक्ट के नोडल ऑफिसर संदीप कुमार के अनुसार:
गवाह की गवाही मुख्य कोर्ट रूम से अलग एक सुरक्षित कमरे में होगी
वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बयान रिकॉर्ड किया जाएगा
गवाह और आरोपी का आमना-सामना नहीं होगा
पूरा माहौल सुरक्षित और आरामदायक रखा जाएगा
इससे खासकर बच्चों और यौन उत्पीड़न के पीड़ितों को मानसिक आघात से बचाया जा सकेगा।
कब से शुरू होगा काम?
यह अस्थायी असुरक्षित गवाह केंद्र 31 मार्च 2026 से काम करना शुरू कर देगा। इसका संचालन जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, औरंगाबाद के सचिव न्यायाधीश तान्या पटेल की निगरानी में होगा।
इस पहल के शुरू होने पर अधिवक्ताओं और न्यायिक अधिकारियों ने खुशी जताई है और इसे न्याय व्यवस्था में एक बड़ा सुधार बताया है।
रिपोर्ट : अजय कुमार पाण्डेय.
