औरंगाबाद, बिहार : बेल मोड़ स्थित संघर्ष कोचिंग सेंटर ने इस बार बिहार बोर्ड मैट्रिक परीक्षा 2026 में प्रथम श्रेणी से उत्तीर्ण हुए सभी छात्रों को सम्मानित किया। इस अवसर पर संस्थापक मुकेश कुमार, सभी शिक्षक और मुख्य अतिथि सरिता बौद्ध, जो कि ज्योति कल्याण संस्थान जैसी सामाजिक संस्था चलाती हैं, ने संयुक्त रूप से छात्रों को शील्ड और मेडल देकर सम्मानित किया।
यह कार्यक्रम 4 अप्रैल 2026 को संपन्न हुआ, और इस समारोह में छात्रों की उपलब्धियों का जश्न मनाया गया।

ग्रामीण बच्चों की शिक्षा में संघर्ष और प्रेरणा
संघर्ष कोचिंग सेंटर बराही मुख्य मार्ग के पास सुदूर ग्रामीण क्षेत्र बेल मोड़ में स्थित है। इस इलाके के अधिकांश बच्चे किसानों के परिवार से आते हैं और मामूली फीस भी देना उनके लिए चुनौतीपूर्ण होता है।
इसके बावजूद, इन बच्चों की पढ़ाई की लगन और उत्सुकता अद्भुत है। इस कोचिंग सेंटर के छात्रों ने बिहार बोर्ड परीक्षा 2026 में प्रथम श्रेणी से अंक प्राप्त कर अपने इलाके का नाम रोशन किया।
संघर्ष कोचिंग सेंटर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि निर्धन और अनाथ बच्चों को भी निःशुल्क शिक्षा प्रदान की जाती है। इस तरह से हर बच्चा अपनी मेहनत और लगन से सफलता की ओर बढ़ता है।
छात्रों के उज्जवल भविष्य की कामना
सम्मान समारोह में उपस्थित मुख्य अतिथि सरिता बौद्ध और सहयोगी जिज्ञासा कुमारी ने छात्रों को बारी-बारी से मंच पर बुलाकर सम्मानित किया और उनके उज्जवल भविष्य की कामना की।
छात्रों ने अपनी भविष्य की महत्वाकांक्षाएँ भी साझा कीं—किसी ने शिक्षक बनने की इच्छा जताई, तो किसी ने पुलिस या दरोगा बनने और डॉक्टर बनने का सपना साझा किया।
सुरक्षा और सामाजिक जागरूकता पर ध्यान
सरिता बौद्ध ने छात्रों और अभिभावकों को लड़कियों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने की सलाह दी। उनका कहना था कि छात्राएं कोचिंग संस्थान अकेले न आएं, बल्कि समूह में 10-10 छात्राओं के साथ आएं ताकि वे सुरक्षित महसूस करें।
इसके अलावा, उन्होंने पी.ओ.एस.को एक्ट और समय पर मेडिकल रिपोर्ट न मिलने की समस्या पर भी चिंता व्यक्त की और कहा कि इसके समाधान के लिए प्रयास जरूरी हैं ताकि पीड़िताओं को समय पर न्याय मिल सके।
निष्कर्ष: मेहनत, शिक्षा और सामाजिक जिम्मेदारी का संगम
संघर्ष कोचिंग सेंटर और सामाजिक कार्यकर्ताओं का यह प्रयास ग्रामीण बच्चों के लिए प्रेरणा और सुरक्षा का प्रतीक है। यह दिखाता है कि यदि छात्रों में जज्बा हो और शिक्षक पूरी निष्ठा से मार्गदर्शन करें, तो सफलता और सम्मान दोनों हासिल किया जा सकता है।
रिपोर्ट : अजय कुमार पाण्डेय.
