औरंगाबाद (बिहार) : बिहार में निजी विद्यालयों की मनमानी को लेकर एक बार फिर बड़ा मुद्दा सामने आया है। इसी मामले को लेकर शुक्रवार, 15 मई 2026 को लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के जिलाध्यक्ष चंद्र भूषण कुमार सिंह उर्फ सोनू सिंह ने अपने जिला मुख्यालय स्थित आवास पर प्रेस कॉन्फ्रेंस की।
मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा कि कई अभिभावकों ने लिखित आवेदन देकर शिकायत की थी कि निजी विद्यालयों द्वारा बच्चों और उनके परिवारों पर लगातार दबाव बनाया जाता है। स्कूल प्रबंधन अभिभावकों को मजबूर करता है कि वे सिर्फ़ उन्हीं दुकानों से कॉपी, किताब, कलम, टाई, बेल्ट, जूता-मोजा और स्कूल ड्रेस खरीदें, जिनसे विद्यालय की सांठगांठ रहती है। वहां सामान भी मनमाने दामों पर बेचा जाता है।
सोनू सिंह ने बताया कि उन्होंने इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया, जिसके बाद बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मामले को गंभीरता से लेते हुए स्वतः संज्ञान लिया। मुख्यमंत्री ने साफ़ आदेश जारी किया है कि अब कोई भी निजी विद्यालय अभिभावकों या छात्रों पर किसी खास दुकान से सामान खरीदने का दबाव नहीं बनाएगा।
उन्होंने कहा कि अब छात्र और अभिभावक अपनी सुविधा और उचित दाम के हिसाब से किसी भी दुकान से स्कूल से जुड़ा सामान खरीद सकेंगे। अगर कोई निजी विद्यालय या उसका स्टाफ फिर भी जबरदस्ती करता है, तो अभिभावक इसकी लिखित शिकायत कर सकते हैं। शिकायत लोजपा (रामविलास) के नेताओं, एनडीए के सहयोगियों या जिला पदाधिकारी अभिलाषा शर्मा के पास भी दी जा सकती है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह भी बताया गया कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने निजी विद्यालयों को फीस को लेकर भी पारदर्शिता बरतने का आदेश दिया है। अब हर स्कूल को अपने परिसर में स्पष्ट रूप से यह सूची लगानी होगी कि किस कक्षा के लिए कितनी मासिक फीस ली जा रही है। अगर कोई विद्यालय इस नियम का पालन नहीं करेगा, तो उसके खिलाफ बिहार सरकार और संबंधित अधिकारी नियमानुसार कार्रवाई करेंगे।
मौके पर पत्रकारों ने सवाल पूछा कि राजनीतिक दलों के नेता अक्सर मंच से समान शिक्षा व्यवस्था की बात करते हैं, लेकिन ज़मीनी स्तर पर निजी विद्यालयों को ही बढ़ावा मिलता दिखाई देता है। इस पर जवाब देते हुए सोनू सिंह ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बाद अब मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी शिक्षा के क्षेत्र में जनहित से जुड़े फैसले लेने शुरू कर दिए हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि आने वाले समय में शिक्षा व्यवस्था में और भी बड़े सुधार देखने को मिलेंगे।
रिपोर्ट : अजय कुमार पाण्डेय.
