हरमैन शरीफैन और गैर मुस्लिम

हरमैन शरीफैन और गैर मुस्लिम
Harman Sharifan and non-Muslims

हम सब जानते हैं कि अल्लाह के रसूल सल्ललाहू अलैहे वसल्लम की पैदाइश से पहले भी हज होता था. अरब के अधिकांश लोग जो मुर्ति पूजक थे वह हज करते थे. सन 8 हिजरी में मक्का फतेह हुआ और उस साल भी मुसलमानों और मुशरिकीन ने एक साथ हज किया. सन

9 हिजरी में जब हज का मौसम आया तो अल्लाह के रसूल सल्ललाहू अलैहे वसल्लम ने हज़रत अबू बकर सिद्दीक को अमीरे हज बना कर मक्का भेजा. उस साल भी मुसलमानों के साथ मुशरिकीन हज कर रहे थे.

यह अलग बात है कि तब तक मुशरिकीन बहुत कम बचे थे और अक्सर लोग इस्लाम में दाखिल हो चुके थे. जब हज़रत अबू बकर सिद्दीक मक्का के लिए रवाना हो गए. उस के बाद कुरआन सूरा तौबा की आयत नंबर 28 नाजिल हुई जिसमें कहा गया है कि इस साल के बाद काफिर व मुशरिक हरम शरीफ के करीब न आएं.

अल्लाह के रसूल सल्ललाहू अलैहे वसल्लम ने हज़रत अली को मक्का भेजा कि वह वहां जाकर ऐलान कर दें कि इस साल के बाद कोई गैर मुस्लिम हज नहीं कर सकता. उस के बाद से मक्का के हदूद में गैर मुस्लिम का दाखिला बंद हो गया जो आज तक बंद है लेकिन मदीना में ऐसी कोई पाबंदी नहीं थी.

अल्लाह के रसूल सल्ललाहू अलैहे वसल्लम और खुलफाए राशिदीन के दौर में मदीना राजधानी हुआ करता था. हज़रत अली ने अपनी खिलाफत के जमाने में राजधानी मदीना से बदल कर कूफा कर दिया था. मदीना जब राजधानी था तो वहाँ सब आते थे. अपने नागरिक भी और विदेशी दूत भी व्यापारी भी आते थे और कैदी भी अल्लाह के रसूल सल्ललाहू अलैहे वसल्लम के जमाने में खुलफाए राशिदीन के दौर में बनू उमैया बनू अब्बास और फातिमी खिलाफत के समय मदीना में किसी गैर मुस्लिम के दाखिले पर कोई पाबंदी नहीं थी. फिर पाबंदी कब लगी?

इस का सही जवाब किसी के पास नहीं है. ज्यादातर लोगों ने लिखा है कि सलीबी जंगो के समय ईसाइयों ने मदीना में अल्लाह के रसूल सल्ललाहू अलैहे वसल्लम के रौजा को नुकसान पहुंचाने की कई कोशिशें की जिस की वजह से पाबंदी लगा दी गई. बहरहाल पाबन्दी शरियत ने नहीं लगाई थी.

हालात को देखते हुए शासकों ने लगाई थी. व्यवस्था या सुरक्षा के कारण पाबंदी लगाई गई थी. शासकों ने लगाई थी और शासकों ने हटा ली. इस में इतना बवाल करने की जरूरत नहीं है.

बवाल करना उस समय सही होता जब पाबंदी शरीयत ने लगाई होती. मुसलमानों में जितने भी फिकही मसलक हैं चाहे हन्फी हों शाफई हों हंबली हों मालिकी हों किसी के नजदीक भी मदीना में गैर मुस्लिम के दाखिले पर पाबंदी की राय नहीं.

-शुभचिन्‍तक