राष्ट्रीय लोक अदालत का औरंगाबाद में संयुक्त रूप से किया गया विधिवत उद्घाटन

National Lok Adalat duly inaugurated jointly in Aurangabad

राष्ट्रीय लोक अदालत का औरंगाबाद में संयुक्त रूप से किया गया विधिवत उद्घाटन
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अजय कुमार पाण्डेय:

औरंगाबाद: (बिहार) औरंगाबाद में शनिवार दिनांक - 11 फरवरी 2023 को वर्ष के प्रथम दिन माननीय जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह जिला विधिक सेवा प्राधिकार अध्यक्ष, रजनीश कुमार श्रीवास्तव की अनुपस्थिति में प्रभारी जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह ए0डी0जे0 - 03 अमित कुमार सिंह, जिला विधिक सेवा प्राधिकार सचिव, प्रणव शंकर, मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी, सुकुल राम, प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी, सुदीप पाण्डेय, जिला विधि संघ अध्यक्ष, रसिक बिहारी सिंह, अधिवक्ता संघ अध्यक्ष, संजय कुमार सिंह, रिटेनर अधिवक्ता, अभिनंदन कुमार मिश्रा, अधिवक्ता व मीडिया प्रभारी, सतीश कुमार स्नेही, लोक अभियोजक (ए0पी0पी0) पुष्कर अग्रवाल, बीमा कंपनी पदाधिकारी, बैंक अधिकारी, पारा वालंटियर टीम, पारा वालंटियर मेडिकल टीम की मौजूदगी में ही संयुक्त रूप से मिलकर राष्ट्रीय लोक अदालत महापर्व का विधिवत उद्घाटन किया गया. इस मौके पर बारी - बारी से सभी गणमान्य न्यायिक दंडाधिकारी एवं विधि संघ अध्यक्ष, अधिवक्ता संघ अध्यक्ष ने उपस्थित पूरे टीम के साथ - साथ मीडिया कर्मियों को भी राष्ट्रीय लोक अदालत महापर्व में बढ़-चढ़कर सहयोग करने हेतु बधाई दिया.

इस अवसर पर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी, सुकुल राम ने उद्घाटन पश्चात मंच से संबोधित करते हुए कहा कि आज कल राष्ट्रीय लोक अदालत इतना व्यापक हो गया है, कि इस पर्व से सभी लोग प्रभावित हैं, और लाभान्वित हैं. इस लोक अदालत में हम लोग जानते हैं, कि दूर - दूर तक इस बात के लिए लोगों को समझाया जाता है, कि आपके बीच जो मुकदमे लंबित है. आपके बीच झगड़े हो रहे हैं. उसको लोक अदालत के माध्यम से आसानी से उसको समझाया एवं सुलझाया जा सकता है. जैसे हमारे अध्यक्ष महोदय ने कहा है कि मुकदमे में जो पक्षकार होते हैं. लोक अदालत में आते हैं, और उनके मुकदमे का जो सुलह होता है. उनके आंखों में जो खुशी के आंसू होते हैं. उसका कल्पना करना और उसका उल्लेख करना मने बहुत ही महत्वपूर्ण चीज होता है. इतना आसान नहीं है. वो खुशी होती है. जिसकी हम कल्पना नहीं कर सकते.

हम लोग जानते हैं कि मुकदमे में दो पक्षकार हैं. एक मुकदमा करने वाला और दूसरा जिस पर मुकदमा होता है. जो मुकदमा करता है. वो या तो सूचक होता है, या वादी होता है. जिस पर मुकदमा होता है. वह प्रतिवादी होता है, या अभियुक्त. जब वह कोर्ट में केस दायर करता है. तब दो स्थिति उत्पन्न होती है. या तो वो रिहा हो जाता है, या उसकी सजा होती है. क्रिमिनल केस में, दीवानी में एक पक्षकार को या तो उसको निर्णय मिल जाता है, और दूसरा जो है इस पर निर्णय होता है, तो कहीं ना कहीं वही पक्षकार दुःखी होता है. लेकिन लोक अदालत एक ऐसा प्रोग्राम है. एक ऐसा मंच है. जहां पर कोई पक्षकार दुःखी नहीं होता है. सब पक्षकार खुश होता है. उसके मुकदमे का आसानी से निपटारा हो जाता है, और दोनों पक्षकार न्यायालय से खुशी - खुशी हंसते हुए एक दूसरे के गले मिलाते हुए आराम से अपने घर जाते हैं. ये लोक अदालत की एक बहुत ही महत्वपूर्ण उद्देश्य है, और इस उद्देश्य को अगर पूरा करने में अगर हम लोग सफल होते हैं, तो इस लोक अदालत का उद्देश्य पूरा हो जाएगा.

वहीं प्रभारी जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह ए0डी0जे0 - 03 अमित कुमार सिंह ने मंच से संबोधित करते हुए कहा कि कोशिश हम लोग करते हैं. लेकिन सार्थक तभी होगी. जब तक कि समझने में कामयाब नहीं होंगे. कई कारण होते हैं. इसके वजह से मामले लंबित होते हैं. हम उसमें नहीं जाएंगे. बीमा कंपनी से भी मैं आग्रह करता हूं कि उदार ह्रदय के साथ आएं. गरीबों के परिवार भी आएं. सड़क दुर्घटना मामले में गरीब परिवारों की आर्थिक स्थिति काफी खराब हो जाती है. लेकिन बीमा कंपनी के अधिकारी कहते हैं, कि मैंडेट होता है? तो आप थोड़ा उदार क्यों नहीं होते हैं? इसलिए मैं आप से आग्रह करता हूं कि थोड़ा उदार बनके गरीबों का कल्याण कीजिए, क्योंकि आप यदि उधार बनते हैं, तो आप उनके परिवार का आर्थिक मदद कर पालन - पोषण करते हैं. इसके बाद जिला विधिक सेवा प्राधिकार सचिव, प्रणव शंकर ने मंच से संबोधित करते हुए कहा कि मैं मुख्य अतिथि नहीं हूं. मैं होस्ट हूं. यह मेरा ही कार्यक्रम है.

सर्वप्रथम अधिवक्ता संघ अध्यक्ष, संजय बाबू ने कहा कि यहां से कोई हार कर नहीं जाता है. यह पूरी तरह से महापर्व के रूप में स्थापित हो चुका है. मुझे यहां 02 वर्ष हो गए. 08 राष्ट्रीय लोक अदालत हो गया है. सभी लोग बैठकर उदार बने. 2023 का प्रथम महापर्व है. जनकल्याण का काम करें. यह कार्यक्रम करना मेरा उद्देश्य नहीं है, बल्कि ऊर्जा के साथ काम करें.

आज के राष्ट्रीय लोक अदालत महापर्व सभी प्रकार के विभिन्न सुलहनीय मामले विद्युत, टेलीफोन तथा अन्य जो सुलहनीय वाद है. वन के मामले, कुछ एस0डी0एम0 साहब यहां के मामले उन सबों का निस्तारण हो जाएगा. हमलोग ये आशा करते हैं कि जिले के ज्यादा से ज्यादा लोग इस राष्ट्रीय लोक अदालत का लाभ उठाएंगे, और ज्यादा से ज्यादा लोग यहां से प्रसन्न होकर जाएंगे, और अपने वाद का निस्तारण कराके जाएंगे.

तब संवाददाता ने जिला विधिक सेवा प्राधिकार सचिव, प्रणव शंकर से सवाल पूछा कि विद्युत के जहां तक मामले होते हैं. विद्युत का मामला राष्ट्रीय लोक अदालत में भी डिस्पोजल नहीं हो पाता है, और प्रीपेड मीटर का भी सवाल उठ रहा है बार - बार? कि उपभोक्ताओं को गलत बिजली बील आ रही है? तब जिला विधिक सेवा प्राधिकार सचिव, प्रणव शंकर ने संवादाता द्वारा पूछे गए सवालों का जवाब देते हुए कहा कि विद्युत के दो तरह के मामले होते हैं. विद्युत के ज्यादेतर मामले विशेष न्यायालय गया यहां से चले जाते हैं. इसीलिए जितने लिटिगेस है. जो इस जिले के हैं, या 07 - 08 जिले के हैं. उन सबों का न्यायालय गया परीक्षेत्र में, मगध प्रक्षेत्र का गया पड़ता है, तो उनके मामलों को गया जूरिडिक्शन में देखा जाता है. इसलिए हम लोग अभी उसपे कमेंट करने में सक्षम नहीं है.

ध्यातव्य हो कि इसी मुद्दे पर जब पूर्व माननीय जिला एवं सत्र न्यायाधीश, औरंगाबाद, माननीय मनोज तिवारी के वक्त भी जिला प्राधिकार सचिव, प्रणव शंकर के मौजूदगी में ही संवाददाता ने गलत बिजली बिल से संबंधित मामले को आयोजित प्रेस कॉफ्रेंस के दौरान ही चेंबर में प्रमुखता से उठाया था. तब उस वक्त भी दोनों माननीय ने संवाददाता द्वारा पूछे गए सवालों का जवाब देते हुए कहा था, कि बिजली विभाग का मामला हम लोगों के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है. यह गया का ही मामला है.

ध्यातव्य हो कि जिला विधिक सेवा प्राधिकार सचिव ने मंच से संबोधित करते हुए कहा कि यहां से कोई निराश होकर ना जाए. एक मेडिकल कैंप भी हैं. आप अपने - अपने स्वास्थ्य का भी परीक्षण अवश्य करें. इन्हीं बातों के साथ मै अपनी वाणी को अब विराम देता हूं. तत्पश्चात लोक अभियोजक पुष्कर अग्रवाल ने भी मंच से संबोधित करते हुए कहा कि लोक अदालत के बारे में ज्यादा बताने की कोई जरूरत नहीं है. सफलता में अधिक भागीदारी रहे. बैंक, बीमा पदाधिकारियों से मैं आग्रह करना चाहूंगा कि ज्यादा टेक्निकल ना बनें. अन्यथा बहुत दिक्कत होती है. आप बीमा कंपनी की राशि देते हैं? तो उसके परिवार को पाल रहे हैं. अंत में प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी सुदीप पाण्डेय ने कार्यक्रम में शामिल सभी लोगों के साथ-साथ  मीडिया कर्मियों को भी बधाई देते हुए धन्यवाद ज्ञापन किया.