-करें आज हम सब मिलकर, इस नये वर्ष का शुभ अभिनंदन।
-नये वर्ष की नव वेला में, नयी कल्पना जागे
-जब बुरा वक्त हो, तो प्रतीक्षा करो। मित्र है कौन, इसकी समीक्षा करो
-प्यारी दुनिया, प्यारे लोग, फिर क्यूं नहीं हमारे लोग
गया जी : गया जी (बिहार) में राष्ट्रीय साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था ‘शब्दवीणा’ के तत्वावधान में नव वर्ष 2026 के स्वागत के अवसर पर एक भव्य राष्ट्रीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम “नये वर्ष का शुभ अभिनंदन” विषय पर आधारित था, जिसमें देश के आठ राज्यों से जुड़े कवि और कवयित्रियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से नव वर्ष का काव्यमय स्वागत किया।
कार्यक्रम की शुरुआत वरिष्ठ कवि अरुण अपेक्षित द्वारा प्रस्तुत स्वरचित सरस्वती वंदना से हुई। इसके बाद शब्दवीणा की राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. रश्मि प्रियदर्शनी ने संस्था गीत प्रस्तुत कर माहौल को साहित्यिक रंग में रंग दिया। कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. रश्मि प्रियदर्शनी एवं कीर्ति यादव ने किया और सभी आमंत्रित रचनाकारों का आत्मीय स्वागत किया।
इस राष्ट्रीय कवि सम्मेलन में मध्य प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा, कर्नाटक, महाराष्ट्र, झारखंड, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और बिहार से अनेक प्रतिष्ठित रचनाकारों ने सहभागिता की। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए अरुण अपेक्षित ने सभी कवियों को नव वर्ष पर अपनी श्रेष्ठ रचनाएं प्रस्तुत करने के लिए प्रेरित किया।
कवि सम्मेलन में गीत, ग़ज़ल, मुक्तक, छंद और दोहों की सुंदर प्रस्तुति देखने को मिली।
डॉ. रश्मि प्रियदर्शनी ने नव वर्ष की सकारात्मक ऊर्जा को समर्पित गीत—
“करें आज हम सब मिलकर, इस नये वर्ष का शुभ अभिनंदन”
की सुमधुर प्रस्तुति दी।
जैनेन्द्र कुमार मालवीय, डॉ. कनकलता तिवारी, बृज माहिर, शिव कुमार सिंह, आशा साहनी, कीर्ति यादव, कर्नल गोपाल अश्क, रामदेव शर्मा राही, रमेश चंद्र, सरोज कुमार, निगम राज, और विजयेन्द्र सैनी सहित अनेक रचनाकारों की रचनाओं ने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया।
हास्य, प्रेम, प्रेरणा और सामाजिक संदेशों से भरपूर रचनाओं पर श्रोताओं की खूब तालियाँ और वाहवाहियाँ गूंजती रहीं। विशेष रूप से सुनीता सैनी की कौरवी बोली में लिखी हास्य रचना ने सभी को हँसने पर मजबूर कर दिया।
अध्यक्षीय संबोधन में अरुण अपेक्षित ने कहा कि रचना लेखन के समय अभिधा, लक्षणा और व्यंजना शब्द शक्तियों का संतुलित प्रयोग अत्यंत आवश्यक है। मंच पर वरिष्ठ कवि डॉ. रामसिंहासन सिंह की गरिमामयी उपस्थिति ने कार्यक्रम की शोभा और बढ़ा दी।
कार्यक्रम का सीधा प्रसारण शब्दवीणा के केंद्रीय फेसबुक पेज से किया गया, जिससे देशभर के अनेक साहित्य प्रेमी जुड़कर काव्य रस का आनंद ले सके।
यह आयोजन न केवल नव वर्ष के स्वागत का माध्यम बना, बल्कि साहित्यिक एकता और सांस्कृतिक समरसता का भी सुंदर उदाहरण प्रस्तुत करता नजर आया।
रिपोर्ट: विश्वनाथ आनंद.
