गया : गया के राजेंद्र आश्रम में आज़ादी की जंग के अज़ीम सिपाही बाबू वीर कुंवर सिंह का विजय उत्सव बड़े अदब और एहतराम के साथ मनाया गया। ये कार्यक्रम गया जिला कांग्रेस कमिटी की जानिब से रखा गया, जिसमें कांग्रेस किसान प्रकोष्ठ के जिला अध्यक्ष युगल किशोर सिंह ने सदारत की।
कार्यक्रम की शुरुआत बाबू वीर कुंवर सिंह के तैलचित्र पर माल्यार्पण से हुई। इसके बाद वहां मौजूद लोगों ने “वीर कुंवर सिंह अमर रहें” के नारों से माहौल को जोश और जज़्बे से भर दिया।
अपने ख़िताब में युगल किशोर सिंह ने कहा कि बाबू वीर कुंवर सिंह 1857 की पहली आज़ादी की जंग के बहादुर रहनुमा थे। वो बिहार के जगदीशपुर के ज़मींदार थे और करीब 80 साल की उम्र में भी उन्होंने अंग्रेज़ी हुकूमत के खिलाफ डटकर मुकाबला किया। उनकी बहादुरी, छापामार जंग की रणनीति और शानदार क़यादत से अंग्रेज़ भी कांप उठे थे।
उन्होंने कई लड़ाइयों में अंग्रेज़ों को शिकस्त दी और आखिरकार जगदीशपुर को आज़ाद करवा लिया। 23 अप्रैल 1858 को उन्होंने अपनी आखिरी जंग में अंग्रेज़ी फौज को हराकर अपने किले पर दोबारा कब्ज़ा किया। उनकी बहादुरी की वजह से उन्हें बिहार का “शेर” कहा जाता है।
भारत सरकार ने भी उनके जज़्बे और कुर्बानी को सलाम करते हुए 23 अप्रैल 1966 को उनके नाम पर डाक टिकट जारी किया। साथ ही आरा में उनके नाम से वीर कुंवर सिंह विश्वविद्यालय की तामीर की गई।
इस मौके पर कई कांग्रेस कार्यकर्ता और नेता मौजूद रहे, जिनमें विधा शर्मा, प्रदीप कुमार शर्मा, संजय कुमार चंद्रवंशी, मोहम्मद ताजुद्दीन, धर्मेंद्र कुमार शर्मा, मदीना खातून, ओंकार शक्ति, धर्मेंद्र कुमार निराला, शिव कुमार चौरसिया, रंजीत सिंह, अनुमति देवी, अर्जुन गुप्ता, बर्जेश राय, सुनील पासवान और राजकपूर गुप्ता समेत कई लोग शामिल हुए।
कार्यक्रम की पूरी जानकारी जिला प्रवक्ता अशोक प्रसाद भारती ने प्रेस विज्ञप्ति के जरिए दी।
Report : विश्वनाथ आनंद.
