शब्दवीणा की रंगों से सजी काव्यगोष्ठी — “होली का त्योहार सुहाना” में उड़ा कविताओं का गुलाल

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गया जी (बिहार):  होली का मौसम आते ही दिल खुद-ब-खुद रंगों से भर जाता है। कुछ ऐसा ही रंगीन माहौल बना राष्ट्रीय साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था “शब्दवीणा” की हरियाणा प्रदेश समिति की फरीदाबाद जिला इकाई द्वारा आयोजित रंगोत्सव काव्यगोष्ठी “होली का त्योहार सुहाना” में। यहाँ रंग तो उड़े ही, लेकिन वो रंग थे कविताओं और गीतों के — जो सीधे दिल पर जाकर लगे।

कार्यक्रम की शुरुआत बड़े ही श्रद्धा भाव से हुई। कार्यक्रम अध्यक्ष कवि महेश चंद्र शर्मा राज ने सरस्वती वंदना “कर जोड़ बुलाता हूँ, चली आना मैया जी” गाकर माहौल को भक्ति रंग में रंग दिया। उसके बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. डॉ. रश्मि प्रियदर्शनी ने शब्दवीणा गीत प्रस्तुत किया। मंच संचालन हरियाणा प्रदेश सचिव कवयित्री सरोज कुमार ने बड़े ही सलीके और अपनत्व के साथ किया और सभी रचनाकारों का स्वागत किया।

काव्यगोष्ठी में एक से बढ़कर एक रचनाएँ सुनने को मिलीं।

डॉ. रश्मि के होली गीत “वासंती बयार बहने लग गई, कोकिला गाई रे। रंग-बिरंगी खुशियाँ लेकर आई, होली आई रे” और “बनी राधिका रानी धरती, नीलगगन घनश्याम, होली की है धूम मची, जग की शोभा अभिराम” ने श्रोताओं का दिल जीत लिया।

वहीं महेश चंद्र शर्मा राज की पंक्तियाँ “कान्हा आ जइयो बरसाने, तो संग खेलूंगी होली” सुनकर लोग झूम उठे। जैनेन्द्र कुमार मालवीय की रचना “जबरन रंग लगाकर कहते, बुरा न मानो होली है” और “आओ आज बहा लें फिर से रंगों की पावन धारा” को भी खूब सराहना मिली।

कीर्ति यादव ने “कान्हा होली खेलन को, वृंदावन बुला लेना” सुनाकर भक्तिरस घोला, तो सरोज कुमार की पंक्तियाँ “होली, होली, होली हो गई। उड़े गुलाल, रंगोली हो गई” ने माहौल में और रंग भर दिए।

संजय जैन बीना की “खेलें मिलकर होली, राधा-किशन-सी हमजोली”, मधु वशिष्ठ की “होली पर तुम आ जाना, इंतज़ार है तुम्हारा”, और विनीता सिंह की “फागुन आया, खुशियाँ लाया। सूनी गलियाँ हँसने लगीं, रंगों में दुनिया बसने लगी” पर ज़बरदस्त तालियाँ बजीं।

इसी बीच डॉ. रश्मि ने अपनी कविता “बर्बाद होली” के ज़रिए होली के असली मायने भी याद दिलाए। उन्होंने कहा —

“सज्जनता की जगह अगर केवल फूहड़ता याद रही,

समझो ऐसी होली, होली होकर भी बर्बाद रही।”

ये पंक्तियाँ सबको सोचने पर मजबूर कर गईं कि त्योहार की असली खूबसूरती आपसी प्यार और सम्मान में ही है।

पंकज मिश्र, सुरेश विद्यार्थी और रमेश चंद्र ने भी सभी को होली की दिल से मुबारकबाद दी। इस पूरे कार्यक्रम का सीधा प्रसारण शब्दवीणा के केन्द्रीय फेसबुक पेज से किया गया, जिससे दूर बैठे लोग भी इस रंगारंग काव्यगोष्ठी का हिस्सा बन सके।

अंत में पावन शांति पाठ के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ। सच कहें तो ये सिर्फ़ एक काव्यगोष्ठी नहीं थी, बल्कि शब्दों के रंगों से सजी ऐसी महफ़िल थी, जिसने होली के जज़्बे को और भी खूबसूरत बना दिया।

रिपोर्ट : विश्वनाथ आनंद.

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