बिहार के गया में एक बार फिर एक पुरानी मांग ने जोर पकड़ लिया है। यहां के गया केंद्रीय कारा का नाम महान स्वतंत्रता सेनानी शहीद बैकुंठ शुक्ल के नाम पर रखने की मांग को लेकर अब लोग सड़कों पर उतरने को तैयार हैं।
कई सालों से ये मांग उठती रही है, लेकिन अब तक सरकार की तरफ से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इसी को लेकर गया जिले के अलग-अलग सियासी दलों, समाजी तंजीमों और नौजवानों ने मिलकर एक बड़ा फैसला लिया है। “शहीद बैकुंठ शुक्ल विचार मंच” के बैनर तले 10 मई 2026 से जेल के उत्तरी गेट पर शांतिपूर्ण अनशन शुरू किया जाएगा।
इस मुहिम से जुड़े नेताओं का कहना है कि बैकुंठ शुक्ल कोई आम शख्स नहीं थे, बल्कि वो एक ऐसे क्रांतिकारी थे जिन्होंने देश की आज़ादी के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी। उन्होंने उस शख्स को सजा दी थी जिसने भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव के खिलाफ गवाही दी थी। इसी वजह से अंग्रेजी हुकूमत ने 14 मई 1934 को गया केंद्रीय कारा में उन्हें फांसी दे दी।
नेताओं ने ये भी सवाल उठाया कि जब मुजफ्फरपुर केंद्रीय कारा का नाम खुदीराम बोस के नाम पर रखा गया है, और भागलपुर केंद्रीय कारा का नाम जुबा सहनी के नाम पर है, तो फिर गया केंद्रीय कारा के साथ ये इंसाफ क्यों नहीं हुआ?
बताया गया कि पिछले करीब 30 सालों से हर साल 14 मई, जो बैकुंठ शुक्ल का शहादत दिवस है, उस दिन कार्यक्रम करके सरकार को ज्ञापन दिया जाता रहा है। साथ ही ये भी मांग उठाई जाती रही है कि गया के गांधी मैदान के पास बने गेट का जीर्णोद्धार हो और चाणक्यपुरी इलाके में उनके नाम पर बनी पार्क में उनकी आदमकद मूर्ति लगाई जाए। लेकिन अब तक कोई खास कार्रवाई नहीं हुई।
अब लोगों का सब्र जवाब देने लगा है। नेताओं का कहना है कि प्रशासन की तरफ से कई बार इस नामकरण की सिफारिश भी भेजी गई, लेकिन सरकार की तरफ से चुप्पी बनी हुई है। इसी वजह से अब अनशन का रास्ता चुना गया है।
उन्होंने साफ कहा है कि ये अनशन तब तक जारी रहेगा जब तक गया केंद्रीय कारा का नाम बदलकर शहीद बैकुंठ शुक्ल के नाम पर नहीं रख दिया जाता। लोगों को उम्मीद है कि इस बार उनकी आवाज जरूर सुनी जाएगी।
रिपोर्ट : विश्वनाथ आनंद.
