गया जी के गौतम बुद्ध महिला कॉलेज में चल रहे “रिफ्लेक्शन ऑन वैल्यूज” नाम के बीस दिन के जीवन विद्या कोर्स का माहौल इन दिनों काफी रोशन और असरदार नजर आ रहा है। इसी सिलसिले में अठारहवें दिन एक खास पेरेंट्स-टीचर्स मीटिंग रखी गई, जहां छात्राओं के साथ उनके वालिदैन भी बड़ी दिलचस्पी के साथ शामिल हुए।
ये प्रोग्राम कॉलेज के सावित्री महाजन सभागार में हुआ, जहां हर तरफ एक अपनापन और सीखने-सिखाने का माहौल था। कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ सीमा पटेल की रहनुमाई में दर्शनशास्त्र विभाग और आईक्यूएसी ने मिलकर इस कोर्स को मुकम्मल तरीके से आगे बढ़ाया।
मीटिंग में छात्राओं ने अपने तजुर्बे बड़े सादगी भरे अंदाज़ में शेयर किए। उन्होंने बताया कि इस कोर्स के दौरान उन्होंने सिर्फ किताबी बातें नहीं, बल्कि ज़िंदगी को सही मायनों में समझना सीखा। उनके ख्यालात और रवैये में जो पॉजिटिव बदलाव आया है, वो उनके लफ्ज़ों में साफ झलक रहा था।
इस मौके पर खास मेहमान के तौर पर मौजूद डॉ रामेश्वर प्रसाद यादव ने भी अपनी बात रखते हुए कहा कि उस्ताद यानी टीचर्स असल में मुल्क के सच्चे निर्माता होते हैं। उन्होंने इस पहल की तारीफ की और कहा कि ऐसे कोर्सेज बाकी कॉलेजों में भी होने चाहिए।
वहीं, जीवन विद्या के ट्रेनर आचार्य नवीन कुमार ने छात्राओं से कुछ सवाल किए, जिनका जवाब उन्होंने पूरे जोश और यकीन के साथ दिया। इससे ये साफ दिखा कि उन्होंने जो सीखा है, उसे दिल से अपनाया भी है।
अगर बात करें इस कोर्स के असर की, तो वालिदैन ने भी खुलकर अपनी राय रखी। उनका कहना था कि उनके बच्चों के सोचने का तरीका और बर्ताव पहले से बेहतर हुआ है। उन्होंने इस कोर्स को बेहद जरूरी बताते हुए कहा कि इससे नौजवानों को सही तरीके से जीने की समझ मिलती है।
छात्राओं ने भी कई अहम मौज़ुओं पर अपनी समझ जाहिर की। जैसे खुश रहने और सुखी होने में फर्क, गुस्से पर काबू पाना, रिश्तों में तालमेल, डर और जलन से निकलना, और इंसानियत के साथ जीना—ये सब बातें उन्होंने बड़ी खूबसूरती से बयान कीं। कुछ छात्राओं ने तो यहां तक कहा कि उन्होंने इस कोर्स से “राक्षस मानव” से “देव मानव” बनने का रास्ता समझा।
प्रिंसिपल डॉ सीमा पटेल ने अपने खिताब में “परिवार” की एक नई तशरीह पेश की। उन्होंने कहा कि सिर्फ इंसान ही नहीं, बल्कि जानवर, पक्षी और पूरी कुदरत भी हमारे परिवार का हिस्सा हैं। उनकी ये बात वहां मौजूद हर शख्स के दिल को छू गई।
अंत में कॉलेज की तरफ से ये जानकारी दी गई कि इस कोर्स में सौ से ज्यादा छात्राओं ने हिस्सा लिया है। जो छात्राएं इसे मुकम्मल करेंगी, उन्हें बीसवें दिन सर्टिफिकेट भी दिया जाएगा।
कुल मिलाकर ये कहना गलत नहीं होगा कि ये कोर्स सिर्फ एक पढ़ाई का हिस्सा नहीं, बल्कि ज़िंदगी को बेहतर बनाने की एक सच्ची कोशिश बन चुका है।
रिपोर्ट : विश्वनाथ आनंद.
