विश्व पर्यावरण दिवस पर जीबीएम कॉलेज की छात्राओं ने पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश

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गया (बिहार) : विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर गौतम बुद्ध महिला कॉलेज (जीबीएम कॉलेज) की राष्ट्रीय सेवा योजना (एनएसएस) इकाई की स्वयंसेवकों ने पर्यावरण संरक्षण के लिए उत्साह के साथ पौधारोपण कार्यक्रम में हिस्सा लिया। यह कार्यक्रम मगध विश्वविद्यालय की राष्ट्रीय सेवा योजना द्वारा आयोजित प्रभात फेरी और पौधारोपण अभियान के तहत संपन्न हुआ।

इस अवसर पर वैष्णवी कुमारी, अंजली मिश्रा, कशिश सिंह, अंजली कुमारी, श्रुति वर्मा, अनीषा कुमारी, गीतांजलि, सिमरन समेत कई स्वयंसेवकों ने मिलकर विश्वविद्यालय परिसर में आम, अमरूद, लीची और जामुन जैसे फलदार पौधे लगाए। छात्राओं ने पर्यावरण के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए प्रभात फेरी में भी बढ़-चढ़कर भाग लिया।

प्रभात फेरी के दौरान स्वयंसेवकों ने “एक पेड़, एक जीवन”, “जल बचाओ, जीवन बचाओ”, “स्वच्छ पर्यावरण, स्वस्थ भविष्य” और “प्रकृति से प्रेरणा, जलवायु के लिए समाधान” जैसे नारों के माध्यम से समाज को पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।

जीबीएम कॉलेज की एनएसएस कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ. कुमारी रश्मि प्रियदर्शनी ने बताया कि प्रधानाचार्या डॉ. सीमा पटेल के निर्देश पर महाविद्यालय की एनएसएस इकाई द्वारा 5 जून से 4 जुलाई तक “विश्व पर्यावरण माह-सह-पौधारोपण अभियान” चलाया जा रहा है। इस अभियान के अंतर्गत छात्राएँ विभिन्न फलों के बीजों को गोबर और मिट्टी में लपेटकर सीड बॉल्स तैयार करेंगी।

उन्होंने बताया कि वन विभाग और संबंधित अधिकारियों से आवश्यक अनुमति प्राप्त करने के बाद छात्राएँ सीताकुंड, गायत्री घाट, ब्राह्मणी घाट, आजाद पार्क और गांधी मैदान परिसर जैसे उपयुक्त खाली स्थानों पर इन सीड बॉल्स को फेंककर पौधारोपण अभियान को आगे बढ़ाएँगी।

डॉ. रश्मि प्रियदर्शनी ने सीड बॉल्स की प्रक्रिया के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि बीजों को गोबर और मिट्टी के मिश्रण में लपेटकर तैयार किए गए गोलों को “सीड बॉल मेकिंग”, “सीड बॉम्बिंग” या “पेलेटिंग” कहा जाता है। गुरिल्ला गार्डेनिंग शैली पर आधारित यह तरीका वनों की कटाई को रोकने और बंजर या खाली पड़ी जमीन पर हरियाली लाने का एक सरल, सुलभ और प्रभावी पारंपरिक माध्यम माना जाता है।

उन्होंने बताया कि गोबर और मिट्टी में मौजूद प्राकृतिक पोषक तत्व बीजों को सुरक्षित और सक्रिय बनाए रखते हैं। बारिश होने पर इन सीड बॉल्स में मौजूद बीज आसानी से अंकुरित होकर पौधों का रूप ले लेते हैं।

प्रधानाचार्या डॉ. सीमा पटेल के निर्देशानुसार एनएसएस इकाई की सभी स्वयंसेवकों को इस अभियान से जुड़ी जानकारी दे दी गई है। छात्राएँ अपने घरों में फलों के बीज एकत्र करेंगी और उन पर गोबर तथा मिट्टी की परत चढ़ाकर सीड बॉल्स तैयार करेंगी। बरसात शुरू होने तक इन्हें पक्षियों, चूहों और कीड़ों से सुरक्षित रखा जाएगा।

बारिश आने के बाद इन सीड बॉल्स को खाली पड़ी जमीनों, सड़क किनारों, पहाड़ी क्षेत्रों और खेतों में फेंकने का विशेष अभियान चलाया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक हरियाली विकसित हो सके और पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को नई मजबूती मिल सके।

रिपोर्ट : विश्वनाथ आनंद.

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