New Delhi : शनिवार की शाम प्रयागराज के केपी ग्राउंड में कुछ अलग ही माहौल था। शहर जो सदियों से ज्ञान और शिक्षा का केंद्र माना जाता है, आज वहाँ हज़ारों-लाखों छात्र इकट्ठा हुए थे। राहुल गांधी ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में पहुँचे थे। कांग्रेस के इस कार्यक्रम का मकसद साफ़ था—छात्रों की परेशानियों को सीधे सुनना और उन्हें एक मंच देना।
कार्यक्रम से पहले काफी उठा-पटक हुई थी। केपी ट्रस्ट ने एक बार अनुमति वापस ले ली थी, अदालत के आदेश और पानी भरने की वजह बताई गई। फिर अनुमति बहाल हुई, पुलिस की मंजूरी भी मिली। बारिश के बाद मैदान में कीचड़ और पानी भरा हुआ था। कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि सीवेज का पानी भी छोड़ा गया। फिर भी छात्र पहुँचे। कांग्रेस का दावा था कि रजिस्ट्रेशन दो लाख से ऊपर चले गए थे और भीड़ ढाई लाख के आसपास पहुँच सकती है। मैदान में लगभग एक लाख की बैठने की व्यवस्था बताई गई थी। असल में बड़ी संख्या में छात्र मौजूद रहे।
शिक्षा और रोजगार की पीड़ा
राहुल गांधी ने सीधे छात्रों से बात की। उन्होंने कहा कि आज युवा देश की सबसे बड़ी ताकत हैं। लगभग चालीस करोड़ युवा भारत के पास हैं। उनका पोटेंशियल दुनिया के किसी भी देश से कम नहीं। लेकिन सिस्टम ऐसा बन गया है कि मेहनत का फल नहीं मिलता।
उन्होंने एक आँकड़ा दिया—हर हज़ार युवाओं में से सिर्फ़ बारह को स्थायी नौकरी मिल पाती है। परिवार सालों तक पढ़ाई पर पैसा खर्च करते हैं, कोचिंग के लिए शहर बदलते हैं, रात-रात भर जागते हैं। फिर पेपर लीक हो जाता है, भर्तियाँ अटक जाती हैं, सालों इंतज़ार करना पड़ता है और जवाबदेही किसी की नहीं। कोटा में आवाज़ उठी थी, देहरादून में भी, दिल्ली में छात्रों पर लाठी चली। अंत में एक मंत्री को इस्तीफ़ा देना पड़ा। राहुल गांधी का कहना था कि सरकार तभी झुकती है जब आवाज़ें एक साथ उठती हैं।
प्रयागराज को उन्होंने ज्ञान की नगरी कहा। यहाँ सबसे ज़्यादा युवा भविष्य की तैयारी करते हैं। यहाँ के छात्र अच्छी तरह जानते हैं कि सिस्टम में खोट आ गई है। मेहनत की कमी नहीं, नीयत की कमी है।
डेटा, दौलत और सिस्टम की बात
राहुल गांधी ने ‘दर्द, डेटा और दौलत’ की बात की। उन्होंने कहा कि युवा अपना डेटा पैदा करते हैं—हर दिन एक जीबी डेटा इस्तेमाल होता है। यह डेटा देश की बड़ी पूँजी बन सकता है। लेकिन यह डेटा बड़ी कंपनियों के पास चला जाता है—जियो, अडानी, फेसबुक, गूगल जैसी जगहों पर। युवाओं को रील्स देखने, व्हाट्सऐप चलाने और इंस्टाग्राम पर बिताने के लिए कहा जाता है। फिर कहा जाता है ब्लिंकइट या उबर चलाओ, या मजदूरी करो। नौकरी के दरवाज़े बंद कर दिए गए हैं।
एक्स पर उन्होंने साफ़ लिखा:
“देश के छात्रों ने सिस्टम के फैलाए अंधेरे के बीच, अपने डर का सामना कर, रौशनी की मशाल जलाई है। ये मशाल अब पूरे देश को अपने अधिकारों का रास्ता दिखा रही है। बीजेपी-आरएसएस और अडानी के सिस्टम को अब खत्म, टाटा, बाय-बाय कहने का वक्त आ गया है।”
यह पोस्ट उनके कार्यक्रम के बाद आई और छात्रों की आवाज़ को देश भर में पहुँचाने वाली लग रही थी।
लाइव संवाद और हल्के-फुल्के पल
कार्यक्रम सिर्फ़ भाषण नहीं था। राहुल गांधी ने लाइव बातचीत की। छात्रों ने अपनी समस्याएँ रखीं—पेपर लीक, जॉब की कमी, हॉस्टल की परेशानियाँ। एक छात्र ने शायद शादी से जुड़ा कोई सवाल पूछ लिया। राहुल गांधी ने हँसते हुए कहा कि अभी आंदोलन चल रहा है, उस पर ध्यान दो। यह हल्का पल भी था, लेकिन माहौल गंभीर ही रहा।
मैदान में दो स्टेज बनाए गए थे। एक मुख्य स्टेज राहुल गांधी के लिए, दूसरा उन परिवारों के लिए जिनके बच्चे परीक्षाओं के दबाव या पेपर लीक के कारण खुदकुशी कर चुके थे। युवा टीम ने महीनों से तैयारी की थी। मिस्ड कॉल और रजिस्ट्रेशन लिंक से छात्र जुड़े थे।
क्या बदल सकता है?
यह कार्यक्रम कांग्रेस के ‘छात्रों की गूंज’ अभियान का हिस्सा था। कोटा से शुरू हुआ था, फिर देहरादून और अब प्रयागराज। मकसद छात्रों को जोड़कर शिक्षा व्यवस्था और रोजगार की जवाबदेही माँगना है। 2027 के विधानसभा चुनावों को देखते हुए यह युवा वोटर्स तक पहुँचने की कोशिश भी मानी जा रही है।
दूसरी तरफ सत्ता पक्ष ऐसे कार्यक्रमों को राजनीति बताता रहा है। लेकिन मैदान में खड़े छात्र अपनी पीड़ा लेकर आए थे। बारिश, कीचड़, अनुमति की उलझन—सबके बावजूद वे वहाँ थे।
प्रयागराज की धरती पर जो आवाज़ उठी, वह सिर्फ़ एक शाम की नहीं थी। यह उन लाखों युवाओं की आवाज़ थी जो सालों से इंतज़ार कर रहे हैं। राहुल गांधी ने उन्हें मशाल जलाते हुए देखा। अब देखना यह है कि यह मशाल कितनी दूर तक रोशनी फैलाती है।
छात्रों का दर्द असली है। पेपर लीक, रुकी भर्तियाँ और नौकरियों की कमी—ये मुद्दे किसी एक दल के नहीं, पूरे देश के हैं। प्रयागराज की इस शाम ने एक बार फिर याद दिलाया कि युवा जब एकजुट होते हैं तो सिस्टम को चुनौती दे सकते हैं।
रिपोर्ट : इस्मा टाइम्स न्यूज़ डेस्क.
