औरंगाबाद | 18 जून 2026 : जिला मुख्यालय स्थित समाहरणालय के मुख्य द्वार के पश्चिम दिशा में बने स्मारक स्थल पर गुरुवार, 18 जून 2026 को बिहार विभूति अनुग्रह नारायण सिंह उर्फ अनुग्रह बाबू की जयंती श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने उन्हें याद करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके योगदान को स्मरण किया।
अनुग्रह बाबू के योगदान को बताया प्रेरणास्रोत
कांग्रेस जिलाध्यक्ष आनंद शंकर सिंह ने रखे अपने विचार
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सदर विधानसभा क्षेत्र संख्या 223, औरंगाबाद से पूर्व में लगातार दस वर्षों तक कांग्रेस विधायक रहे तथा वर्तमान कांग्रेस जिलाध्यक्ष आनंद शंकर सिंह ने कहा कि बिहार विभूति अनुग्रह नारायण सिंह एक महान व्यक्तित्व थे। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान महात्मा गांधी के साथ मिलकर महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और देश के निर्माण में उल्लेखनीय योगदान दिया।
उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों में देश और बिहार को संभालने में अनुग्रह बाबू की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उस दौर में सीमित संसाधनों और लगभग 137 करोड़ रुपये के बजट के बावजूद विकास कार्यों और उद्योगों की स्थापना की दिशा में प्रयास किए गए थे। उन्होंने कहा कि आज बजट का आकार कई गुना बढ़ चुका है, लेकिन उस स्तर की दूरदृष्टि और विकास की सोच कम दिखाई देती है।
ऐतिहासिक तथ्यों को सही संदर्भ में समझने की जरूरत
अपने संबोधन के दौरान आनंद शंकर सिंह ने कहा कि कई बार सोशल मीडिया और विभिन्न माध्यमों पर ऐसे दावे सामने आते हैं, जिनसे लोगों में भ्रम की स्थिति पैदा हो जाती है। उन्होंने कहा कि इतिहास और राजनीतिक घटनाओं को सही संदर्भ में समझना आवश्यक है, ताकि समाज तथ्यों से परिचित रह सके।
उन्होंने देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू, बिहार विभूति अनुग्रह नारायण सिंह, बाबू जगजीवन राम और श्री बाबू जैसे नेताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके जीवन और कार्यों से सीख लेने की जरूरत है। उन्होंने लोगों से अपील की कि ऐसे महान व्यक्तित्वों के प्रति हमेशा सम्मान का भाव बनाए रखें।
राजनीति में मर्यादा और सुचिता का संदेश
उन्होंने कहा कि सत्ता आती-जाती रहती है और राजनीतिक परिस्थितियां समय के साथ बदलती रहती हैं, लेकिन समाज के लिए कार्य करने वाले महान नेताओं के योगदान को कभी नहीं भूलना चाहिए। अनुग्रह बाबू ने राजनीति में मर्यादा, सादगी और सुचिता की जो परंपरा स्थापित की, उसे हमेशा याद रखा जाना चाहिए। यही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
समाजवादी सोच और जनहित के प्रति समर्पण को किया याद
अरविंद शर्मा ने रखे अपने विचार
कार्यक्रम में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अरविंद शर्मा ने भी अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि आज राजनीति में विभिन्न मुद्दों और सामाजिक वर्गों के नाम पर चर्चा होती है, लेकिन अनुग्रह बाबू और बिहार के श्री बाबू ने समाजहित को सर्वोपरि रखते हुए निर्णय लिए थे।
उन्होंने कहा कि जब जमींदारी प्रथा को समाप्त करने की दिशा में कदम उठाए गए, तब व्यक्तिगत हितों की चिंता किए बिना समाज के व्यापक हित को प्राथमिकता दी गई। उन्होंने इसे समाजवादी सोच और जनसेवा का उदाहरण बताया।
अपने संबोधन में उन्होंने एक उदाहरण देते हुए कहा कि व्यक्ति चाहे कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो, यदि वह अपने मूल्यों और परंपराओं का सम्मान नहीं करता, तो उसका पतन निश्चित हो जाता है।
नई पीढ़ी के लिए ईमानदारी की मिसाल हैं अनुग्रह बाबू
राजद नेता इंजीनियर सुबोध कुमार सिंह ने भी किया संबोधन
राष्ट्रीय जनता दल के नेता इंजीनियर सुबोध कुमार सिंह ने कहा कि वर्तमान समय में ईमानदारी और सार्वजनिक जीवन में नैतिकता की चर्चा अक्सर होती है। उन्होंने कहा कि अनुग्रह बाबू का जीवन और उनका परिवार आज भी लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है।
उन्होंने कहा कि आज के दौर में जहां लोग एक पीढ़ी तक भी अपने मूल्यों को कायम रखने में संघर्ष करते दिखाई देते हैं, वहीं अनुग्रह बाबू की तीसरी पीढ़ी तक ईमानदारी और सादगी की मिसाल देखने को मिलती है। समाज को इससे सीख लेने की आवश्यकता है।
कई गणमान्य लोग रहे मौजूद
इस अवसर पर जिला परिषद सदस्य एवं कांग्रेस नेत्री गायत्री देवी, रामपति राम, सचिव अभिषेक कुमार सिंह उर्फ चुलबुल सिंह, प्रोफेसर विजय कुमार सिंह, मृत्युंजय सिंह, संतन सिंह, राम केवल कुमार सहित अनेक सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की अध्यक्षता अरविंद कुमार शर्मा ने की, जबकि धन्यवाद ज्ञापन उदय कुमार द्वारा प्रस्तुत किया गया। समारोह का समापन अनुग्रह बाबू के आदर्शों को याद करते हुए उनके बताए मार्ग पर चलने के संकल्प के साथ हुआ।
रिपोर्ट : अजय कुमार पाण्डेय.
