औरंगाबाद (बिहार) : औरंगाबाद में शनिवार 09 मई 2026 को जिला विधिक सेवा प्राधिकार की तरफ से राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। यह आयोजन व्यवहार न्यायालय, औरंगाबाद और अनुमंडलीय व्यवहार न्यायालय, दाउदनगर में हुआ। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग अपने मामलों के समाधान के लिए पहुंचे और कई मामलों का आपसी सहमति से निपटारा किया गया। साथ ही एकमुश्त यातायात चालान निपटान योजना के तहत भी आम लोगों को राहत मिली। कार्यक्रम में स्वास्थ्य जांच शिविर लगाया गया, जहां लोगों ने स्वास्थ्य लाभ भी लिया।
व्यवहार न्यायालय परिसर में आयोजित मुख्य उद्घाटन समारोह में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह जिला विधिक सेवा प्राधिकार अध्यक्ष राजीव रंजन कुमार, प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय अरुण कुमार, पुलिस अधीक्षक अंबरीष राहुल, जिला विधिक सेवा प्राधिकार सचिव तान्या पटेल, जिला विधि संघ अध्यक्ष विजय कुमार पाण्डेय और अधिवक्ता संघ अध्यक्ष संजय कुमार सिंह मौजूद रहे। सभी ने मिलकर दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
इस मौके पर न्यायिक पदाधिकारी, अधिवक्ता, बैंक और बीमा विभाग के अधिकारी समेत कई विभागों के लोग और वादकारी भी मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन न्यायिक दंडाधिकारी मिस शिवांगी ने किया। स्वागत भाषण देते हुए जिला विधिक सेवा प्राधिकार सचिव तान्या पटेल ने राष्ट्रीय लोक अदालत के महत्व पर रोशनी डाली और कहा कि लोगों के सहयोग से ही यह व्यवस्था मजबूत हो रही है।
उन्होंने पत्रकारों की भूमिका की भी तारीफ करते हुए कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत की जानकारी आम लोगों तक पहुंचाने में मीडिया का बड़ा योगदान है। उन्होंने कहा कि लोक अदालत के जरिए मामलों का निपटारा होने से सिर्फ पक्षकारों को ही फायदा नहीं मिलता, बल्कि न्यायालय, जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन पर भी मुकदमों का बोझ कम होता है। इससे समाज में शांति और भाईचारा भी बढ़ता है।
तान्या पटेल ने पुलिस प्रशासन का आभार जताते हुए कहा कि समय पर नोटिस तामिला कराने में पुलिस का अहम सहयोग मिला, जिसकी वजह से बड़ी संख्या में लोग लोक अदालत तक पहुंच सके।
अधिवक्ता संघ अध्यक्ष संजय कुमार सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत आपसी सौहार्द बढ़ाने का एक अच्छा माध्यम है। छोटे-छोटे मामलों का जल्दी समाधान यहां संभव हो पाता है, इसलिए ज्यादा से ज्यादा लोगों को इसका लाभ उठाना चाहिए।
वहीं जिला विधि संघ अध्यक्ष विजय कुमार पाण्डेय ने कहा कि सभी के सहयोग से ही राष्ट्रीय लोक अदालत सफल हो पाती है। उन्होंने अधिवक्ताओं से भी बढ़-चढ़कर सहयोग करने की अपील की।
पुलिस अधीक्षक अंबरीष राहुल ने अपने संबोधन में कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत एक सफल व्यवस्था साबित हो रही है। इससे न्यायालय और प्रशासन दोनों का बोझ कम होता है। लोगों को जागरूक करना, नोटिस तामिला कराना और लोक अदालत तक पहुंचाने में पुलिस प्रशासन लगातार काम कर रहा है।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजीव रंजन कुमार ने कहा कि जिला विधिक सेवा प्राधिकार की गतिविधियों में राष्ट्रीय लोक अदालत का विशेष महत्व है। दूर-दूर से लोग यहां अपने मामलों के समाधान की उम्मीद लेकर आते हैं और लोक अदालत उन्हें राहत देने का काम करती है।
उन्होंने कहा कि लोक अदालत के जरिए मामलों का निपटारा होने से भाईचारा बढ़ता है और लोगों को मानसिक तनाव से मुक्ति मिलती है। चाहे वादी हो या प्रतिवादी, दोनों को न्याय मिलता है।
बैंक ऋण से जुड़े मामलों पर बोलते हुए प्रधान जिला न्यायाधीश ने साफ कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत समाधान देने का मंच है, शोषण करने का नहीं। उन्होंने बैंक अधिकारियों से कहा कि वे रिकवरी एजेंट की तरह व्यवहार न करें, बल्कि लोगों की परिस्थितियों को समझते हुए ज्यादा से ज्यादा राहत देने की कोशिश करें।
उन्होंने कहा कि कई लोग मजबूरी में ऋण लेते हैं और परिस्थितियों के कारण समय पर भुगतान नहीं कर पाते। ऐसे मामलों में बैंकों को नरम रवैया अपनाना चाहिए और जरूरतमंद लोगों को राहत पहुंचाने के लिए ब्याज में अधिक से अधिक छूट देने की कोशिश करनी चाहिए।
अंत में मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी लाल बिहारी पासवान ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत को सफल बनाने में सभी लोगों का लगातार सहयोग और मेहनत शामिल है। उन्होंने कार्यक्रम में जुड़े सभी अधिकारियों, अधिवक्ताओं, पुलिस प्रशासन और सहयोगियों का आभार व्यक्त किया।
रिपोर्ट : अजय कुमार पाण्डेय.
