औरंगाबाद में राजद स्थापना दिवस समारोह के दौरान बोले डॉ. गुलाम शाहिद, सामाजिक न्याय और धर्मनिरपेक्षता ही पार्टी का मूल उद्देश्य

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औरंगाबाद (बिहार) के नगर भवन में आयोजित राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के स्थापना दिवस समारोह में रफीगंज विधानसभा क्षेत्र के पूर्व राजद प्रत्याशी डॉ. गुलाम शाहिद ने संवाददाता के सवालों का जवाब देते हुए पार्टी के गठन और उसके उद्देश्यों पर अपनी बात रखी। उन्होंने सबसे पहले संवाददाता का स्वागत करते हुए शुभकामनाएं दीं।

डॉ. गुलाम शाहिद ने कहा कि वर्ष 1997 में राजद के राष्ट्रीय अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने एक नई पार्टी बनाने का फैसला किया था। उनके मुताबिक, वर्ष 1990 में मंडल आयोग की सिफारिशें लागू तो हुई थीं, लेकिन उन्हें पूरी तरह लागू नहीं किया गया था। इसी सोच के साथ दिल्ली में 17 सांसद, 8 राज्यसभा सदस्य, कई विधायक और अन्य समर्थकों ने मिलकर राष्ट्रीय जनता दल का गठन किया। उन्होंने कहा कि पार्टी का मुख्य उद्देश्य सामाजिक न्याय और धर्मनिरपेक्षता को आगे बढ़ाना था, ताकि दलित, महादलित, अल्पसंख्यक और समाज के सभी तबकों को न्याय मिल सके।

जब संवाददाता ने उनसे पूछा कि कुछ लोग राजद को दंगाई पार्टी बताते हैं, तो इस पर उनका क्या कहना है? जवाब में डॉ. गुलाम शाहिद ने कहा कि लोग क्या कहते हैं, उसके बारे में वह क्या कह सकते हैं। उन्होंने कहा कि जो लोग ऐसे आरोप लगाते हैं, वही झूठ बोल रहे हैं।

इसके बाद राष्ट्रहित के मुद्दे पर पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने भाजपा पर चुटकी ली। संवाददाता ने कहा कि भाजपा और एनडीए के नेता अक्सर राष्ट्रहित को सर्वोपरि बताते हैं और दावा करते हैं कि वही राष्ट्रहित का काम करते हैं। इस पर डॉ. गुलाम शाहिद ने कहा कि राम मंदिर के मामले में जो कुछ हो रहा है, उसे देखा जा सकता है और उसके बारे में जवाब उनसे ही पूछा जाना चाहिए।

भोजपुर जिले के बिलौटी गांव निवासी भरत तिवारी कांड को लेकर पूछे गए सवाल पर डॉ. गुलाम शाहिद ने कहा कि राज्य में जो कुछ हो रहा है, वह गलत है। उन्होंने कहा कि विभिन्न जातियों और समुदायों के लोगों को चुन-चुनकर मारा जा रहा है और बाद में उसे काउंटर का रूप दे दिया जाता है। उन्होंने कहा कि मुस्लिम, यादव, रविदास समाज और ब्राह्मण समाज के लोगों की हत्याएं हुई हैं, जो पूरी तरह गलत है। उनके अनुसार, किसी भी समाज के साथ अन्याय हो, उसके खिलाफ आवाज उठनी चाहिए।

वहीं, एक डीएसपी पर आरोप और प्राथमिकी दर्ज होने के बावजूद उसे प्रमोशन मिलने के सवाल पर डॉ. गुलाम शाहिद ने कहा कि यदि किसी को प्रमोशन दिया गया है, तो उसका जवाब वही लोग बेहतर दे सकते हैं जिन्होंने यह फैसला लिया है। उन्होंने कहा कि इस विषय पर वह कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते।

रिपोर्ट: अजय कुमार पाण्डेय.

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