बिहार विधानसभा के दो दिवसीय प्रबोधन कार्यक्रम का गयाजी में समापन, संसदीय परंपराओं और विधायी दक्षता पर हुआ मंथन

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गयाजी (बिहार) में बिहार विधानसभा सचिवालय, बिहार लोक प्रशासन एवं ग्रामीण विकास संस्थान (बिपार्ड) तथा प्राइड (लोकसभा सचिवालय) के संयुक्त तत्वावधान में बिहार विधानसभा के माननीय सदस्यों के लिए आयोजित दो दिवसीय आवासीय प्रबोधन कार्यक्रम का रविवार, 12 जुलाई 2026 को विधिवत और सफलतापूर्वक समापन हो गया।

कार्यक्रम का उद्देश्य जनप्रतिनिधियों की संसदीय समझ, विधायी दक्षता और लोकतांत्रिक कार्यप्रणाली को और अधिक मजबूत बनाना रहा।


कार्यक्रम के दूसरे और अंतिम दिन तीन तकनीकी सत्र आयोजित किए गए, जिनमें संसदीय परंपराएं, विधायी प्रक्रिया, विशेषाधिकार, नवाचार तथा संसदीय समितियों की भूमिका जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। सभी सत्रों में विशेषज्ञों और माननीय सदस्यों के बीच सार्थक संवाद और विचार-विमर्श देखने को मिला।

दूसरे दिन की शुरुआत बिपार्ड परिसर के मुख्य प्रवेश द्वार के समीप ब्रह्मयोनि पहाड़ी के पास माननीय सदस्यों द्वारा वृक्षारोपण से हुई। इसके बाद तकनीकी सत्रों का शुभारंभ किया गया।

पहले तकनीकी सत्र का विषय “विधायी एवं संसदीय प्रक्रिया” रहा। बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री एवं माननीय सदस्य तारा किशोर प्रसाद ने बजट निर्माण, वित्तीय प्रावधानों और विभिन्न विभागों की कार्यप्रणाली से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। वहीं प्राइड (लोकसभा सचिवालय) के निदेशक पार्थों गोस्वामी ने बजटीय प्रक्रिया, सरकारी एवं गैर-सरकारी विधेयकों, संसदीय समितियों की भूमिका, उद्देशिका, वित्तीय ज्ञापन तथा विधायी प्रक्रिया के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी।

इस सत्र में माननीय सदस्य संदीप सौरभ ने प्रश्नकाल और जनकल्याणकारी विधायी प्रावधानों की उपयोगिता पर अपने विचार रखे। वहीं माननीय सदस्य उमेश कुशवाहा ने कहा कि आधुनिक तकनीक ने विधायी कार्यों को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और जनहितकारी बनाया है।

दूसरा तकनीकी सत्र “विशेषाधिकार एवं नवाचार” विषय पर केंद्रित रहा। इस दौरान उत्तर प्रदेश विधानसभा के माननीय अध्यक्ष सतीश महाना ने कहा कि जनता का विश्वास ही किसी भी जनप्रतिनिधि की सबसे बड़ी पूंजी है और जनसेवा ही उस विश्वास को बनाए रखने का सबसे प्रभावी माध्यम है। उन्होंने विधायकों के विशेषाधिकारों के जिम्मेदार और प्रभावी उपयोग पर बल देते हुए विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका और मीडिया के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता भी बताई।

पुलिस मुख्यालय के सहायक महानिदेशक (रेल) डॉ. कमल किशोर सिंह ने सदस्यों के विशेषाधिकारों की कानूनी व्याख्या प्रस्तुत की। वहीं राज्यसभा सचिवालय के संयुक्त सचिव राघव प्रसाद दास ने संवैधानिक और संसदीय व्यवहार से जुड़े महत्वपूर्ण प्रावधानों की जानकारी दी। इस अवसर पर माननीय सदस्य प्रफुल्ल कुमार मांझी ने भी अपने विचार साझा किए।

तीसरा तकनीकी सत्र “संसदीय समितियां, कृत्य, प्रतिवेदन एवं सीमाएं” विषय पर आयोजित किया गया। माननीय सांसद जगदंबिका पाल सहित अन्य वक्ताओं ने संसदीय समितियों की भूमिका, वित्तीय अनुशासन, विधेयकों की समीक्षा और जनहित आधारित विधायी कार्यों की आवश्यकता पर विस्तार से अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की सफलता जनप्रतिनिधियों की सक्रियता, जवाबदेही और जनता के प्रति उनकी संवेदनशीलता पर निर्भर करती है।

इस सत्र में माननीय सदस्य श्रीमती दीपा कुमारी, कमरुल होदा और सतीश कुमार सिंह यादव ने भी अपने विचार रखे। सभी तकनीकी सत्रों में माननीय सदस्यों ने विशेषज्ञों से प्रश्न पूछकर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान प्राप्त किया, जिससे पूरा कार्यक्रम संवादपूर्ण और ज्ञानवर्धक साबित हुआ।
उल्लेखनीय है कि इस दो दिवसीय आवासीय प्रबोधन कार्यक्रम का उद्घाटन 11 जुलाई 2026 को भारत के माननीय उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने किया था। उद्घाटन समारोह में बिहार के माननीय राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैय्यद अता हसनैन, माननीय मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, माननीय उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी तथा बिहार विधान परिषद के माननीय सभापति अवधेश नारायण सिंह की गरिमामयी उपस्थिति रही।

कार्यक्रम के दौरान माननीय सदस्यों को गयाजी के प्रमुख धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों, जिनमें विष्णुपद मंदिर, महाबोधि मंदिर और मां मंगला गौरी मंदिर शामिल हैं, का स्थानीय भ्रमण भी कराया गया। इससे उन्हें क्षेत्र की समृद्ध आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को करीब से जानने और समझने का अवसर मिला।

समापन अवसर पर माननीय उपाध्यक्ष नरेन्द्र नारायण यादव ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए कहा कि यह कार्यक्रम किसी एक दल का नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं को अधिक सक्षम, जवाबदेह और प्रभावी बनाने की सामूहिक पहल है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह आयोजन बिहार विधानसभा की कार्यक्षमता और सदस्यों की संसदीय दक्षता को नई दिशा देगा।

समापन समारोह में मगध प्रमंडल (गयाजी) की आयुक्त श्रीमती सफीना ए.एन., पुलिस महानिरीक्षक विकास वैभव, जिलाधिकारी शशांक शुभंकर, वरीय पुलिस अधीक्षक सुशील कुमार तथा बिपार्ड के वरिष्ठ अधिकारियों को हरित गुच्छ, स्मृति-चिह्न और अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम के समापन के बाद माननीय अध्यक्ष डॉ. प्रेम कुमार ने बिपार्ड, गयाजी के अंबेडकर सभागार में प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि यह अत्यंत संतोष और प्रसन्नता की बात है कि इस कार्यक्रम में सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों के माननीय सदस्यों ने पूरे उत्साह, गंभीरता और सकारात्मक भावना के साथ भाग लिया।

उन्होंने कहा कि कार्यक्रम के दौरान संसदीय कार्यप्रणाली, विधायी दायित्व, सदन की मर्यादा, संसदीय परंपराएं और जनप्रतिनिधियों की भूमिका जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों ने उपयोगी और ज्ञानवर्धक व्याख्यान दिए। माननीय सदस्यों ने भी पूरे मनोयोग से सहभागिता करते हुए प्रश्न पूछे, अपने अनुभव साझा किए और गंभीर चर्चा में भाग लिया। इससे यह आयोजन केवल औपचारिक कार्यक्रम न रहकर सार्थक संवाद और ज्ञान के आदान-प्रदान का प्रभावी मंच बन गया।

डॉ. प्रेम कुमार ने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रबोधन कार्यक्रम से प्राप्त ज्ञान, अनुभव और सुझाव भविष्य में माननीय सदस्यों के संसदीय दायित्वों के निर्वहन को और अधिक प्रभावी बनाएंगे। इससे सदन की कार्यवाही की गुणवत्ता, लोकतांत्रिक विमर्श की गरिमा और जनता की अपेक्षाओं के अनुरूप विधायी कार्यों को नई ऊर्जा मिलेगी।

इस अवसर पर माननीय कृषि मंत्री-सह-गयाजी जिले के प्रभारी मंत्री विजय कुमार सिन्हा तथा माननीय लोकसभा सांसद जगदंबिका पाल भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के अंत में माननीय अध्यक्ष ने सभी विषय विशेषज्ञों, बिहार विधानसभा सचिवालय, प्राइड (लोकसभा), बिहार लोक प्रशासन एवं ग्रामीण विकास संस्थान (बिपार्ड), गयाजी प्रशासन तथा प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से जुड़े सभी अधिकारियों, कर्मचारियों और सहयोगियों का सफल आयोजन के लिए हृदय से आभार व्यक्त किया।

रिपोर्ट: अजय कुमार पाण्डेय / दिनेश कुमार पंडित.

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