बंगाल में सुवेंदु अधिकारी बने मुख्यमंत्री: भाजपा की वॉशिंग मशीन पर उठे सवाल, पुराने भ्रष्टाचार आरोपों पर विवाद

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कोलकाता। 9 मई 2026 की यह सुबह बंगाल की राजनीति के लिए ऐतिहासिक साबित हुई। ब्रिगेड परेड ग्राउंड पर भव्य समारोह में सुवेंदु अधिकारी ने पश्चिम बंगाल के पहले भाजपा मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई केंद्रीय नेता मौजूद रहे। तृणमूल कांग्रेस की 15 साल पुरानी सत्ता का अंत हो गया और भाजपा ने 294 सीटों में 207 जीत हासिल कर इतिहास रच दिया। लेकिन इस जीत के साथ पुराने सवाल भी उठ खड़े हुए हैं।

जिन लोगों पर कभी भ्रष्टाचार के आरोप लगे, वही आज सत्ता की कुर्सी संभाल रहे हैं। जनता सोच रही है – क्या सत्ता की “वॉशिंग मशीन” सचमुच सब कुछ साफ कर देती है?

सुवेंदु अधिकारी का सफर आसान नहीं रहा। नंदीग्राम से लेकर नारदा स्टिंग तक, सरदा चिटफंड घोटाले के नाम तक उनका जिक्र आता रहा। तृणमूल कांग्रेस में वे ममता बनर्जी के बेहद करीबी माने जाते थे। परिवहन मंत्री रह चुके सुवेंदु ने 2021 के विधानसभा चुनाव में ममता को नंदीग्राम में हराया था। उसके बाद से उनकी दूरी बढ़ती गई और आखिरकार वे भाजपा में शामिल हो गए। भाजपा ने उन्हें विपक्ष का नेता बनाया और अब मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी सौंपी।

भाजपा समर्थक इसे “बंगाल का परिवर्तन” कह रहे हैं। उनका तर्क है कि सुवेंदु बंगाल की जमीन से जुड़े नेता हैं, जो तृणमूल की भ्रष्टाचार और तुष्टिकरण की राजनीति के खिलाफ लड़ रहे थे। उन्होंने स्कूल भर्ती घोटाले, शिक्षक भर्ती में अनियमितताओं और रिश्वतखोरी के मामलों को लगातार उजागर किया। भाजपा का कहना है कि पुराने आरोप राजनीतिक बदले की भावना से लगाए गए थे और कई मामलों में अब तक कोई अंतिम सजा नहीं हुई।

दूसरी तरफ विपक्ष इसे दोहरा मापदंड बता रहा है। राकेश राउत जैसे नेताओं ने कहा कि भाजपा उसी व्यक्ति को कुर्सी पर बिठा रही है जिस पर खुद भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। “सत्ता की वॉशिंग मशीन” वाला वाक्यांश इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब चल रहा है। कांग्रेस और तृणमूल का आरोप है कि भाजपा में शामिल होते ही ED-CBI के केस ठंडे पड़ जाते हैं। सरदा घोटाले में सुवेंदु का नाम आने के बावजूद अब वे मुख्यमंत्री हैं। जनता पूछ रही है – क्या सत्ता मिलते ही सब पवित्र हो जाते हैं?

पृष्ठभूमि क्या कहती है?

पश्चिम बंगाल में भ्रष्टाचार के आरोप लंबे समय से लगते रहे। शिक्षक भर्ती घोटाला हो या चिटफंड स्कैम, नारदा स्टिंग ऑपरेशन में कई TMC नेताओं के नाम आए। भाजपा ने इन मुद्दों को लेकर सालों तक ममता सरकार पर हमला बोला। अमित शाह और अन्य नेताओं ने कहा कि बंगाल में भ्रष्टाचार institutionalized हो गया है। अब जब भाजपा की सरकार बन गई है तो उम्मीद है कि इन घोटालों की निष्पक्ष जांच होगी।

लेकिन सुवेंदु पर भी आरोपों की कमी नहीं। 2014-2021 के बीच उनके परिवार और सहयोगियों पर कई मामले दर्ज हुए। कुछ मामलों में कोर्ट में सुनवाई चल रही है। सुप्रीम कोर्ट और कलकत्ता हाईकोर्ट ने भर्ती घोटालों पर कई बार टिप्पणियां की हैं। जनता और विपक्ष की मांग है कि नई सरकार पुराने आरोपों को भी नजरअंदाज न करे। अगर चुनाव की निष्पक्ष जांच हुई तो कई बड़े चेहरे उजड़ सकते हैं – यह बात विपक्ष बार-बार दोहरा रहा है।

भाजपा का बचाव और चुनौतियां

भाजपा का पक्ष है कि राजनीति में दल-बदल आम है। कई नेता दूसरे दलों से आकर भाजपा में अच्छा काम कर रहे हैं। हिमंत बिस्वा सरमा असम में, या अन्य राज्यों के उदाहरण दिए जा रहे हैं। सुवेंदु को बंगाल की विकास की नई दिशा देने का काम सौंपा गया है। वे कहते हैं कि बंगाल को “सोनार बंगला” बनाने के लिए भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन चाहिए।

फिर भी सवाल बाकी हैं। क्या नई सरकार पुरानी फाइलें खोलेगी? क्या ED-CBI की जांच निष्पक्ष चलेगी? सुप्रीम कोर्ट इस पर नजर रख रहा है। बंगाल की जनता, खासकर युवा और किसान, रोजगार, उद्योग और कानून-व्यवस्था सुधार की उम्मीद लगाए बैठे हैं। TMC शासन में हिंसा, पोस्टल बालॉट विवाद और भर्ती घोटालों ने आम आदमी को परेशान किया था।

जनता क्या सोच रही है?

कोलकाता की सड़कों पर, चाय की दुकानों पर और गांवों में चर्चा तेज है। एक तरफ खुशी है कि बदलाव आया। दूसरी तरफ शंका भी। एक बुजुर्ग मतदाता ने कहा, “हमने TMC को भ्रष्टाचार के लिए हटाया, अब भाजपा को भी उसी राह पर न जाने दें।” युवा वोटर कहते हैं कि विकास चाहिए, जाति-धर्म की राजनीति नहीं। महिलाओं की सुरक्षा और रोजगार सबसे बड़ा मुद्दा है।

सुवेंदु अधिकारी का परिवार राजनीतिक है। उनके पिता सिशिर अधिकारी लंबे समय से सांसद रह चुके हैं। भाई भी सक्रिय हैं। विपक्ष इसे परिवारवाद भी बता रहा है। लेकिन भाजपा इसे अनुभव का फायदा मानती है।

आगे का रास्ता

नई सरकार के सामने कई चुनौतियां हैं – औद्योगिक विकास, बेरोजगारी, सीमा सुरक्षा, प्रवासियों की समस्या और TMC के कैडरों द्वारा संभावित अशांति। सुवेंदु ने शपथ ग्रहण के बाद कहा कि “बंगाल अब विकास की नई कहानी लिखेगा।” अमित शाह ने भी भरोसा दिलाया कि केंद्र पूरा सहयोग देगा।

लेकिन विपक्ष नहीं मान रहा। वे कहते हैं कि अगर चुनाव आयोग और अदालतें निष्पक्ष जांच करें तो भाजपा की “लंका” उजड़ सकती है। यह अतिशयोक्ति लगती है, क्योंकि लोकतंत्र में जनादेश सबसे बड़ा है। बंगाल की जनता ने 2026 में फैसला दिया है। अब नतीजे देखने बाकी हैं।

राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप चलते रहते हैं। सच्चाई वक्त बताएगा। फिलहाल बंगाल नई सुबह देख रहा है। उम्मीद है कि यह सुबह भ्रष्टाचार मुक्त, समृद्ध और शांतिपूर्ण होगी। जनता सब देख रही है – चाहे वह भाजपा हो या कोई और। सत्ता किसी की भी हो, जवाबदेही जरूरी है।

ITN Desk.

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