नई दिल्ली में 24 जुलाई को देश के कई बड़े मुस्लिम धार्मिक संगठन, उलेमा, समाजी तंजीमें और विपक्षी सियासी नेता एक अहम राष्ट्रीय बैठक में शामिल होंगे। इस बैठक का मकसद मुसलमानों के खिलाफ बढ़ती हिंसा, भीड़ द्वारा की जाने वाली हत्याओं, बुलडोजर कार्रवाई, धार्मिक संस्थानों पर हमलों और सरकारी स्तर पर कथित भेदभाव जैसे मामलों पर मिलकर एक साझा रणनीति तैयार करना है।
आयोजकों का कहना है कि अब सिर्फ़ हर अलग-अलग घटना पर प्रतिक्रिया देने के बजाय पूरे देश के स्तर पर एक संगठित और साझा जवाब तैयार करने की ज़रूरत महसूस की जा रही है। इसी सोच के साथ इस बैठक का आयोजन किया जा रहा है।
किन मुद्दों पर होगी चर्चा?
बैठक में मुसलमानों से जुड़े कई अहम मुद्दों पर विस्तार से बातचीत होने की उम्मीद है। इनमें कथित तौर पर हिंदू सतर्कता समूहों की हिंसा, मुसलमानों के घरों और कारोबार पर बुलडोजर कार्रवाई, मस्जिदों, मदरसों और सूफी दरगाहों से जुड़े विवाद, मुस्लिम युवाओं के खिलाफ पुलिस कार्रवाई और सार्वजनिक जीवन के अलग-अलग क्षेत्रों में बढ़ते भेदभाव जैसे विषय शामिल रहेंगे।
बैठक के आखिर में एक साझा प्रस्ताव भी पारित किए जाने की उम्मीद है, जिसमें आगे की कानूनी लड़ाई, सामाजिक पहल और जन-जागरूकता से जुड़ी योजनाओं का खाका पेश किया जाएगा।
अजमेर शरीफ के सज्जादा नशीन ने क्या कहा?
अजमेर शरीफ दरगाह के सज्जादा नशीन और आध्यात्मिक प्रमुख सैयद सरवर चिश्ती ने कहा कि यह बैठक भारत में मुसलमानों के साथ कई वर्षों से हो रही कथित नाइंसाफ़ियों के जवाब में बुलाई गई है।
उनका कहना है कि मस्जिदों, मदरसों, सूफी दरगाहों और मुस्लिम तालीमी इदारों पर हमले, मुस्लिम घरों पर बुलडोजर कार्रवाई, भीड़ द्वारा की जाने वाली कथित हत्याएं और मुस्लिम युवाओं से जुड़े कथित पुलिस एनकाउंटर जैसे मामलों ने पूरे समुदाय में गहरी बेचैनी और नाराज़गी पैदा की है।
उन्होंने कहा कि अब वक्त आ गया है कि हर घटना पर अलग-अलग प्रतिक्रिया देने के बजाय पूरे देश के स्तर पर एक साझा तरीका अपनाया जाए। बैठक में इस बात पर भी चर्चा होगी कि संविधान में मिले अधिकारों की हिफाज़त कैसे की जाए और साथ ही राष्ट्रीय एकता और सामाजिक भाईचारे को भी मज़बूत किया जाए।
कौन-कौन से संगठन होंगे शामिल?
इस राष्ट्रीय बैठक में देश के कई प्रभावशाली मुस्लिम संगठनों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की उम्मीद है। इनमें जमात-ए-इस्लामी हिंद, जमीयत उलेमा-ए-हिंद, जमात-ए-अहले हदीस और ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड जैसे संगठन शामिल हैं।
इसके अलावा विपक्ष के कई प्रमुख नेता भी बैठक में हिस्सा ले सकते हैं। इनमें एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद और सांसद मोहिबुल्लाह नदवी के नाम शामिल बताए जा रहे हैं।
बैठक के बाद क्या होगा?
आयोजकों के मुताबिक बैठक के अंत में एक साझा रोडमैप जारी किया जाएगा। इसमें कानूनी कार्रवाई, सामाजिक पहल और जनहित से जुड़े अभियानों की रूपरेखा पेश की जाएगी। उनका कहना है कि यह दस्तावेज़ भारत के 20 करोड़ से ज़्यादा मुसलमानों से जुड़े मुद्दों पर एक साझा राष्ट्रीय आवाज़ बनने की कोशिश होगा।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उठते रहे हैं सवाल
यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब हाल के वर्षों में संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार विशेषज्ञों और कई अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने भारत में मुसलमानों के खिलाफ बढ़ती नफ़रत फैलाने वाले भाषणों, सतर्कता समूहों की हिंसा और दंडात्मक बुलडोजर कार्रवाइयों को लेकर चिंता जताई है। हालांकि भारत सरकार इन आरोपों और चिंताओं को कई बार खारिज कर चुकी है।
रिपोर्ट : इस्मा टाइम्स न्यूज़ डेस्क.
