औरंगाबाद (बिहार): बुधवार, 15 जुलाई 2026 को एनटीपीसी नबीनगर में औद्योगिक सुरक्षा, आपदा प्रबंधन और आपातकालीन तैयारियों को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से डीएम (डीमिनरलाइजेशन) प्लांट में हाइड्रोक्लोरिक एसिड (एचसीएल) रिसाव की परिकल्पित स्थिति पर एक व्यापक मेगा मॉक ड्रिल का सफल आयोजन किया गया।
यह अभ्यास परियोजना प्रमुख एवं क्षेत्रीय कार्यकारी निदेशक (पूर्व-01) एल. के. बेहेरा के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। मॉक ड्रिल का संचालन केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के उप कमांडेंट रफाकत खान, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) के उप कमांडेंट कौशल तथा सीआईएसएफ यूनिट भारतीय रेल बिजली कंपनी लिमिटेड (बीआरबीसीएल) के उप कमांडेंट विकास कुमार के नेतृत्व में किया गया।
इस दौरान महाप्रबंधक (ओ एंड एम) अनिल कुमार टी.सी., महाप्रबंधक (परियोजना) राकेश शर्मा, महाप्रबंधक (मेंटेनेंस एवं एडीएम) मनोरंजन पाणिग्रही के अलावा मानव संसाधन, चिकित्सा, सुरक्षा और अन्य संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।
मॉक ड्रिल का मुख्य उद्देश्य रासायनिक आपदा की स्थिति में संयंत्र की आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली, विभिन्न एजेंसियों के बीच आपसी तालमेल, बचाव एवं नियंत्रण व्यवस्था और आपदा प्रबंधन तंत्र की प्रभावशीलता का परीक्षण करना था। ऐसे अभ्यास किसी भी आपातकालीन परिस्थिति में त्वरित और समन्वित कार्रवाई सुनिश्चित करने के साथ-साथ संबंधित एजेंसियों की कार्यक्षमता का आकलन करने में अहम भूमिका निभाते हैं।
अभ्यास के दौरान डीएम प्लांट में हाइड्रोक्लोरिक एसिड (एचसीएल) के रिसाव की काल्पनिक स्थिति तैयार की गई। सूचना मिलते ही संयंत्र की आपातकालीन कार्ययोजना (इमरजेंसी रिस्पॉन्स प्लान) को तत्काल सक्रिय कर दिया गया। इसके बाद एनटीपीसी की विभिन्न आपदा प्रबंधन टीमों के साथ राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ), राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ), राज्य पुलिस, सीआईएसएफ की फायर एवं सुरक्षा विंग, राज्य प्रशासन तथा बीआरबीसीएल की म्यूचुअल एड टीम ने मिलकर प्रभावित क्षेत्र को सुरक्षित किया।
मॉक ड्रिल के दौरान रिसाव को नियंत्रित करने, प्रभावित लोगों के सुरक्षित बचाव, उन्हें सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने तथा डी-कंटैमिनेशन (रासायनिक प्रभाव से मुक्त करने) की पूरी प्रक्रिया का सफल प्रदर्शन किया गया।
डी-कंटैमिनेशन अभियान में करीब 32 एनडीआरएफ कर्मियों और 48 सीआईएसएफ जवानों ने सक्रिय रूप से हिस्सा लिया। सभी एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय, त्वरित निर्णय क्षमता और प्रभावी कार्रवाई ने यह साबित किया कि किसी भी संभावित रासायनिक आपदा से निपटने के लिए सभी विभाग पूरी तरह तैयार हैं।
मॉक ड्रिल के बाद आयोजित समीक्षा बैठक में पूरे अभ्यास का विस्तृत मूल्यांकन किया गया। इस दौरान विभिन्न टीमों के प्रदर्शन, आपातकालीन प्रतिक्रिया समय, समन्वय व्यवस्था और उपलब्ध संसाधनों के उपयोग की समीक्षा की गई। साथ ही भविष्य में आपदा प्रबंधन प्रणाली को और अधिक प्रभावी एवं मजबूत बनाने के लिए आवश्यक सुझावों पर भी चर्चा हुई।
एनटीपीसी नबीनगर औद्योगिक सुरक्षा, पर्यावरण संरक्षण तथा कर्मचारियों और आसपास के लोगों की सुरक्षा के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है। संस्थान की ओर से समय-समय पर इस तरह के मॉक ड्रिल आयोजित किए जाते हैं, ताकि विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल बना रहे और किसी भी रासायनिक या औद्योगिक आपदा की स्थिति में त्वरित एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
इस संबंध में जानकारी एनटीपीसी नबीनगर के पब्लिक रिलेशन ऑफिसर अतुल कुमार ने संवाददाता को दी।
रिपोर्ट : अजय कुमार पाण्डेय.
