अमेरिका की सियासत में इन दिनों मिशिगन का सीनेट चुनाव खास चर्चा में है। इसकी वजह हैं डॉ. अब्दुल एल-सय्यद, जो एक डॉक्टर, महामारी विशेषज्ञ और प्रोग्रेसिव डेमोक्रेट नेता हैं। अगर वह पहले डेमोक्रेटिक प्राइमरी और उसके बाद नवंबर में होने वाला आम चुनाव जीत जाते हैं, तो वह अमेरिका की तारीख़ में पहले मुस्लिम यू.एस. सीनेटर बन जाएंगे।
डॉ. अब्दुल एल-सय्यद का जन्म 31 अक्टूबर 1984 को मिशिगन में मिस्र से आए प्रवासी माता-पिता के घर हुआ। उनकी परवरिश डेट्रॉइट इलाके में हुई। उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन से उच्च सम्मान के साथ पढ़ाई पूरी की, फिर कोलंबिया यूनिवर्सिटी से मेडिकल डिग्री हासिल की। इसके बाद रोड्स स्कॉलर के तौर पर ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से डॉक्टरेट भी पूरी की।
सियासत में आने से पहले उन्होंने डेट्रॉइट हेल्थ डिपार्टमेंट के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और बाद में वेन काउंटी के स्वास्थ्य, मानव एवं वेटरन्स सर्विसेज़ विभाग के निदेशक के रूप में काम किया। साल 2018 में उन्होंने मिशिगन के गवर्नर पद के लिए भी चुनाव लड़ा था। उस समय उन्हें बर्नी सैंडर्स जैसे प्रोग्रेसिव नेताओं का समर्थन मिला था।
इस बार उनका मुकाबला डेमोक्रेटिक पार्टी की सांसद हेले स्टीवंस से है। यह चुनाव केवल दो उम्मीदवारों की टक्कर नहीं माना जा रहा, बल्कि डेमोक्रेटिक पार्टी के भीतर प्रोग्रेसिव और पारंपरिक नेतृत्व के बीच वैचारिक मुकाबले के रूप में भी देखा जा रहा है।
इस चुनाव की सबसे ज़्यादा चर्चा AIPAC और उससे जुड़े सुपर PAC “यूनाइटेड डेमोक्रेसी प्रोजेक्ट” की रिकॉर्ड फंडिंग को लेकर हो रही है। विश्वसनीय रिपोर्टों के अनुसार इन संगठनों ने हेले स्टीवंस के समर्थन और अब्दुल एल-सय्यद के विरोध में लगभग 30 मिलियन डॉलर खर्च किए हैं। इसे किसी एक चुनाव में AIPAC का अब तक का सबसे बड़ा निवेश बताया गया है।
दूसरी ओर, अब्दुल एल-सय्यद को बर्नी सैंडर्स, अलेक्जेंड्रिया ओकासियो-कोर्टेज़ (AOC), यूनाइटेड ऑटो वर्कर्स (UAW) और कई प्रोग्रेसिव संगठनों का समर्थन मिला है। उनके चुनाव अभियान में मेडिकेयर फॉर ऑल, आम कामगारों के मुद्दे, कॉर्पोरेट PAC के प्रभाव का विरोध और गाज़ा युद्ध के दौरान अमेरिकी नीति की आलोचना जैसे विषय प्रमुख रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मिशिगन का यह चुनाव सिर्फ़ एक राज्य की सीट का मुकाबला नहीं है, बल्कि यह इस बात की भी परीक्षा है कि डेमोक्रेटिक पार्टी भविष्य में किस दिशा में आगे बढ़ेगी। साथ ही यह चुनाव अमेरिका में चुनावी फंडिंग और बाहरी राजनीतिक प्रभाव को लेकर चल रही बहस को भी नई रफ़्तार दे रहा है।
हालांकि 4 अगस्त 2026 तक उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के अनुसार प्राइमरी चुनाव के अंतिम नतीजे घोषित नहीं हुए थे। इसलिए यह कहना अभी जल्दबाज़ी होगी कि डॉ. अब्दुल एल-सय्यद इतिहास रच पाएंगे या नहीं। लेकिन इतना तय है कि उनकी उम्मीदवारी पहले ही अमेरिकी राजनीति में एक ऐतिहासिक बहस का हिस्सा बन चुकी है।
रिपोर्ट : इस्मा टाइम्स न्यूज़ डेस्क.
