मध्य पूर्व में तनाव की आग अभी भी भड़की हुई है। एक तरफ़ ईरान ने अमेरिका के साथ जंग ख़त्म करने की शर्तें व्हाइट हाउस तक पहुँचा दी हैं, दूसरी तरफ़ यमन के हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के अहम शहरों और तेल सुविधाओं पर हमले का दावा किया है — जिन्हें सऊदी गठबंधन ने “विफल” बताया है।
ईरान की तीन बड़ी शर्तें: “जंग ख़त्म, पैसे आज़ाद, नाकाबंदी ख़त्म”
ईरान के सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहसेन रेज़ाई ने अल-जज़ीरा को बताया कि तेहरान ने क़तरी मध्यस्थता के ज़रिए व्हाइट हाउस तक अपनी शर्तें भेज दी हैं, और अब वह डोनाल्ड ट्रम्प के जवाब का इंतज़ार कर रहा है।
रेज़ाई ने साफ़-साफ़ तीन माँगें गिनाईं:
सभी मोर्चों पर जंग का ख़ात्मा — यानी सिर्फ़ एक जगह नहीं, बल्कि हर जगह गोलीबारी और हमले रुकें।
ईरान की फ़्रोज़न रकम आज़ाद हो — विदेशों में अटके ईरानी फंड्स को रिलीज़ किया जाए।
अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी ख़त्म हो — ईरानी बंदरगाहों पर समुदरी घेराबंदी हटाई जाए।
उनका कहना था कि क़तर के रास्ते ये शर्तें वाशिंगटन भेजी जा चुकी हैं; साथ ही पाकिस्तान भी मध्यस्थता में शामिल है, और बातचीत का सिलसिला जारी है।
क्यों अहम हैं ये शर्तें?
ये शर्तें दरअसल उस बड़े टकराव की पृष्ठभूमि में आ रही हैं जो अमेरिका-ईरान के बीच पिछले कुछ समय से चल रहा है — जिसमें खाड़ी के रास्तों, तेल आपूर्ति और क्षेत्रीय प्रभाव का सवाल शामिल है। अगर ये शर्तें मान ली गईं, तो बातचीत का रास्ता खुल सकता है; नहीं, तो “फ़ैसलाकुन जंग” की धमकी भी ईरानी पक्ष से दी गई है।
हूती हमले: रियाद से यनबू तक — क्या हुआ, क्या दावा किया गया?
दूसरी बड़ी खबर यमन से आ रही है। हूती विद्रोहियों ने कहा कि उन्होंने सऊदी अरब के संवेदनशील ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं — खास तौर पर रियाद की राजधानी और यनबू में अरामको की तेल सुविधाओं पर।
हूती सैन्य प्रवक्ता यह्या सरी ने टेलीग्राम/सोशल मीडिया पर बताया कि इन हमलों में बैलिस्टिक मिसाइल, क्रूज़ मिसाइल और ड्रोन इस्तेमाल हुए, और यह कार्रवाई सऊदी की उन कार्रवाइयों के जवाब में है जो हूतियों के मुताबिक़ सना (यमन की राजधानी) को निशाना बना रही हैं।
सऊदी गठबंधन का जवाब: “मिसाइल गिराई, हमले विफल”
सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के प्रवक्ता मेजर-जनरल तुर्की अल-मालिकी ने X (पूर्व ट्विटर) पर लिखा कि सुबह-सुबह रियाद की तरफ़ दागी गई बैलिस्टिक मिसाइल को हवाई रक्षा ने इंटरसेप्ट और तबाह कर दिया।
उनका कहना था कि हूतियों ने बीश/बिश, ताइफ, फ़रासान और यनबू में भी नागरिकों और नागरिक इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाने की कोशिश की, मगर सऊदी एयर डिफेंस ने सब हमलों को विफल कर दिया। सऊदी अधिकारियों के मुताबिक़, कोई जानी नुक़सान नहीं हुआ।
हालाँकि, रियाद में कुछ निवासियों ने सुबह धमाकों की आवाज़ें सुनीं और हवाई अड्डे के पास काले धुएं का गुबार देखा — जो इस बात की ओर इशारा करता है कि इंटरसेप्शन के बावजूद ज़मीन पर असर महसूस हुआ।
बड़ी तस्वीर: बातचीत का दरवाज़ा, मगर ख़तरे भी बरकरार
एक तरफ़ ईरान की शर्तें बातचीत की उम्मीद जगाती हैं — खासकर जब क़तर और पाकिस्तान जैसे देश मध्यस्थता में लगे हों। दूसरी तरफ़ हूती हमले और सऊदी की जवाबी कार्रवाई इस बात का संकेत हैं कि क्षेत्र में हिंसा का चक्र अभी टूटा नहीं है।
अगर अमेरिका-ईरान के बीच कोई समझौता होता है, तो इसका असर यमन, खाड़ी और तेल बाज़ारों पर सीधे पड़ सकता है — क्योंकि इन टकरावों की चपेट में अक्सर तेल की कीमतें, शिपिंग रूट और क्षेत्रीय सुरक्षा आती है।
रिपोर्ट : इस्मा टाइम्स न्यूज़ डेस्क.
