बालाघाट (मध्यप्रदेश) : बिहार के भोजपुर जिले में हुए भरत भूषण तिवारी पुलिस एनकाउंटर मामले को लेकर मध्य प्रदेश के बालाघाट स्थित अखंड ब्राह्मण सेवा समिति (भारतवर्ष) ने निष्पक्ष जांच और दोषी पुलिसकर्मियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। समिति ने इस संबंध में देश की माननीय राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के नाम एक लिखित ज्ञापन भेजा है।
राष्ट्रपति समेत कई संवैधानिक संस्थाओं को भेजी गई ज्ञापन की प्रतिलिपि
समिति की ओर से जारी ज्ञापन की प्रतिलिपि भारत के माननीय प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री, भारत सरकार के मुख्य सचिव तथा राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को भी भेजी गई है।
ज्ञापन में कहा गया है कि भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव निवासी स्वर्गीय भरत भूषण तिवारी की पुलिस एनकाउंटर के दौरान गोली लगने से मौत हो गई थी।
आत्मसमर्पण के बाद गोली चलाने का लगाया गया आरोप
समिति ने अपने ज्ञापन में मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा है कि घटना के बाद परिजनों ने आरोप लगाया था कि भरत भूषण तिवारी ने आत्मसमर्पण कर दिया था और अपना हथियार भी छोड़ दिया था। इसके बावजूद उन्हें गोली मार दी गई। वहीं पुलिस की ओर से इसे मुठभेड़ और तनावपूर्ण परिस्थितियों में हुई कार्रवाई बताया गया है।
घटना के बाद विभागीय स्तर पर कार्रवाई करते हुए शाहपुर थाना प्रभारी सहित अन्य पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया और मामले की जांच शुरू किए जाने की बात कही गई।
मानसिक स्थिति को देखते हुए संयम बरतने की थी जरूरत
ज्ञापन में उठाए गए गंभीर सवाल
ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि उपलब्ध समाचार रिपोर्टों के अनुसार भरत भूषण तिवारी मानसिक रूप से परेशान या विक्षिप्त बताए गए थे। ऐसी स्थिति में पुलिस और प्रशासन की जिम्मेदारी थी कि बल प्रयोग करने के बजाय संयम, कानूनी प्रक्रिया, चिकित्सकीय सहायता और सुरक्षित नियंत्रण की रणनीति अपनाई जाती।
समिति का कहना है कि यदि आत्मसमर्पण के बाद गोली चलाई गई है, तो यह बेहद गंभीर मामला है और इसकी स्वतंत्र, निष्पक्ष तथा समयबद्ध जांच कराई जानी चाहिए।
अखंड ब्राह्मण सेवा समिति ने रखीं छह प्रमुख मांगें
अखंड ब्राह्मण सेवा समिति (भारतवर्ष) ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए बिहार सरकार के सामने निम्नलिखित मांगें रखी हैं।
1. उच्च स्तरीय न्यायिक या एसआईटी जांच
भरत भूषण तिवारी एनकाउंटर मामले की उच्च स्तरीय, निष्पक्ष और समयबद्ध न्यायिक अथवा एसआईटी जांच कराई जाए।
2. सभी संबंधित पुलिसकर्मियों को निलंबित रखा जाए
जांच पूरी होने तक घटना में शामिल सभी पुलिसकर्मियों को सेवा से अलग रखते हुए निलंबित रखा जाए, ताकि साक्ष्यों के साथ किसी तरह की छेड़छाड़ न हो सके।
3. दोष साबित होने पर सख्त कानूनी कार्रवाई
यदि जांच में आत्मसमर्पण के बाद गोली मारने, फर्जी मुठभेड़, अत्यधिक बल प्रयोग या कर्तव्य में लापरवाही साबित होती है, तो संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या, आपराधिक षड्यंत्र, साक्ष्य मिटाने और अन्य लागू धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर कठोरतम दंड दिया जाए।
4. पीड़ित परिवार को आर्थिक सहायता और पुनर्वास
पीड़ित परिवार को तत्काल पर्याप्त आर्थिक सहायता दी जाए। साथ ही परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी अथवा उचित पुनर्वास पैकेज और सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए।
5. जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए
घटना की स्वतंत्र मजिस्ट्रियल जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए और राष्ट्रीय एवं राज्य मानवाधिकार मानकों के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
6. बिहार पुलिस के लिए विशेष प्रशिक्षण व्यवस्था
मानसिक रूप से अस्थिर या संकटग्रस्त लोगों से निपटने के लिए बिहार पुलिस के लिए विशेष प्रोटोकॉल, प्रशिक्षण और मेडिकल क्राइसिस रिस्पांस सिस्टम विकसित किया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
कानून के शासन और मानवाधिकार से जुड़ा है मामला
ज्ञापन के अंत में अखंड ब्राह्मण सेवा समिति (भारतवर्ष) ने कहा है कि यह मामला केवल एक परिवार को न्याय दिलाने का नहीं, बल्कि कानून के शासन, पुलिस की जवाबदेही और मानवाधिकारों की रक्षा से भी जुड़ा हुआ है।
समिति ने राष्ट्रपति से अनुरोध किया है कि इस पूरे मामले का त्वरित संज्ञान लेकर दोषियों के खिलाफ कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई सुनिश्चित कराई जाए।
इन पदाधिकारियों ने भी किए हस्ताक्षर
जारी ज्ञापन पर अखंड ब्राह्मण सेवा समिति (भारतवर्ष) के राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री पंडित दीपक आड़े, प्रदेश सचिव पंडित आशीष पाण्डेय, प्रदेश पदाधिकारी पंडित मिहिर त्रिवेदी, जिलाध्यक्ष (बालाघाट) पंडित डॉ. ओ.पी. मिश्रा, संभागीय पदाधिकारी पंडित संतोष जैना, जिला मार्गदर्शक पंडित मनोज त्रिवेदी सहित समिति के अन्य सदस्यों ने भी हस्ताक्षर किए हैं। सभी ने नियमानुसार अपनी मांगें सरकार के समक्ष रखी हैं।
रिपोर्ट : अजय कुमार पाण्डेय.
