स्वतंत्रता दिवस पर भाजपा झंडा विवाद: पार्टी झंडा फहराने से मचा बवाल

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आज 15 अगस्त 2026 है। देश अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। लाल किले से प्रधानमंत्री का भाषण, हर घर तिरंगा, वंदे मातरम् की गूंज – सब कुछ जोश से भरा हुआ। लेकिन इसी दिन कुछ ऐसी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गए जो लोगों को सोचने पर मजबूर कर गए। छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले, पश्चिम बंगाल और बेंगलुरु से कुछ क्लिप्स आए जिनमें भाजपा के कार्यकर्ता तिरंगे से पहले या तिरंगे की जगह पार्टी का केसरिया झंडा फहराते दिखे। एक जगह तो राष्ट्रगान के दौरान आरएसएस स्टाइल सलामी भी दी गई। ये सब देखकर देशभर में बहस छिड़ गई।

क्या हुआ था असल में?

शुरुआत करते हैं छत्तीसगढ़ से। धमतरी जिले के कुरुद में स्वामी विवेकानंद मंगल भवन के परिसर में एक वीडियो वायरल हुआ। उसमें भाजपा कार्यकर्ता पार्टी का झंडा फहरा रहे हैं, वंदे मातरम् बज रहा है और गुलाब की पंखुड़ियां उड़ाई जा रही हैं। कई लोगों ने इसे स्वतंत्रता दिवस के कार्यक्रम का हिस्सा बताया। लेकिन बाद में स्थानीय भाजपा नेताओं ने सफाई दी कि ये वीडियो किसी प्रशिक्षण कार्यक्रम का है, स्वतंत्रता दिवस का नहीं। उन्होंने कहा कि कुछ लोगों ने इसे गलत संदर्भ में फैलाया ताकि पार्टी की छवि खराब हो। फिर भी वीडियो इतना तेजी से फैला कि लोगों में चर्चा शुरू हो गई।

पश्चिम बंगाल में भी कुछ जगहों पर ऐसे ही दृश्य दिखे। एक क्लिप में भाजपा कार्यालय या किसी स्थानीय नेता के दफ्तर में पार्टी झंडा फहराया गया। वहां भी वंदे मातरम् और जोश का माहौल था। लोग कह रहे थे कि तिरंगा कहां है? इतना बड़ा दिन है और पार्टी झंडा ऊपर क्यों?

बेंगलुरु का मामला थोड़ा अलग और ज्यादा चर्चित हुआ। कर्नाटक भाजपा के एमएलसी एन. रविकुमार पार्टी ऑफिस में झंडारोहण समारोह में मौजूद थे। तिरंगा फहराने के बाद राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ शुरू हुआ। ज्यादातर लोग तिरंगे को सलामी दे रहे थे, लेकिन रविकुमार आरएसएस वाले ध्वज प्रणाम की मुद्रा में खड़े दिखे। ये वीडियो भी तेजी से वायरल हो गया। कांग्रेस नेताओं ने इसे शर्मनाक बताया और पूछा कि संविधान और राष्ट्रध्वज पहले है या संघ की विचारधारा?

फ्लैग कोड क्या कहता है?

भारत का फ्लैग कोड ऑफ इंडिया 2002 साफ कहता है कि जब भी तिरंगा फहराया जाए तो उसे सम्मान का सबसे ऊंचा स्थान मिलना चाहिए। किसी भी दूसरे झंडे को तिरंगे से ऊपर या बराबर नहीं रखा जा सकता। स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस पर तो खास तौर पर तिरंगा ही सबसे पहले फहराना और सबसे आखिर में उतारना चाहिए। प्रिवेंशन ऑफ इन्सल्ट्स टू नेशनल ऑनर एक्ट 1971 भी राष्ट्रध्वज का अपमान करने पर सजा का प्रावधान रखता है।

कई विशेषज्ञ कह रहे हैं कि पार्टी झंडा फहराना अपने आप में गलत नहीं, लेकिन स्वतंत्रता दिवस जैसे मौके पर तिरंगे की जगह या उससे पहले फहराना नियमों के खिलाफ है। तिरंगा पूरे देश का प्रतीक है, किसी एक पार्टी का नहीं। जो लोग आलोचना कर रहे हैं, उनका कहना है कि ये राष्ट्रीय गौरव पर चोट है। जो बचाव कर रहे हैं, वे कहते हैं कि ये सिर्फ स्थानीय जोश है, कोई जानबूझकर अपमान की नीयत नहीं थी।

दोनों तरफ की बातें

एक तरफ आलोचक पूछ रहे हैं – अगर आम आदमी ऐसा करे तो क्या कार्रवाई होती? भाजपा के नेता जब पार्टी झंडा फहराते हैं तो क्या कोई कुछ नहीं बोल सकता? नेहा सिंह राठौर जैसी हस्तियों ने भी इस पर सवाल उठाए। सोशल मीडिया पर कई पोस्ट आए कि तिरंगे का सम्मान सबसे ऊपर होना चाहिए।

दूसरी तरफ भाजपा समर्थक कह रहे हैं कि ज्यादातर जगहों पर तिरंगा ही फहराया गया। पार्टी अध्यक्ष नितिन नवीन ने दिल्ली मुख्यालय में तिरंगा फहराया। कई मुख्यमंत्रियों और नेताओं ने सही तरीके से राष्ट्रध्वज को सलामी दी। छत्तीसगढ़ वाले वीडियो को लेकर सफाई दी गई कि वो ट्रेनिंग का था। बेंगलुरु वाले एमएलसी ने भी शायद अपनी आदत से सलामी दी होगी, कोई जानबूझकर अपमान नहीं किया।

ये बहस इसलिए भी तेज हुई क्योंकि आजकल हर छोटी-बड़ी बात वीडियो बनकर सोशल मीडिया पर फैल जाती है। एक क्लिप निकलती है और पूरा देश उस पर बहस करने लगता है। स्वतंत्रता दिवस जैसे पावन अवसर पर ये चर्चा और भी संवेदनशील हो जाती है।

हमें क्या समझना चाहिए?

तिरंगा सिर्फ एक झंडा नहीं है। ये उन लाखों स्वतंत्रता सेनानियों की कुर्बानी का प्रतीक है जिन्होंने देश के लिए अपनी जान दी। चाहे कोई किसी भी पार्टी का हो, किसी भी विचारधारा का हो, तिरंगे का सम्मान सबका फर्ज है। पार्टी झंडा अपने कार्यक्रमों में फहराना ठीक है, लेकिन राष्ट्रीय पर्व पर तिरंगे को प्राथमिकता देनी ही चाहिए।

फ्लैग कोड का पालन करना आसान है। तिरंगा सबसे ऊपर, सबसे पहले और सबसे सम्मान के साथ। अगर कहीं गलती हो गई तो सुधार भी जल्दी होना चाहिए। बहस अच्छी है, लेकिन नफरत या राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से ऊपर उठकर सोचना चाहिए। देश पहले, बाकी सब बाद में। आज जब पूरा देश 80 साल की आजादी का जश्न मना रहा है, तो ये छोटी-छोटी घटनाएं याद दिलाती हैं कि प्रतीकों का सम्मान कितना जरूरी है। तिरंगा लहराता रहे, देश एक रहे, और हम सब मिलकर आगे बढ़ते रहें। जय हिंद!

रिपोर्ट : इस्मा टाइम्स न्यूज़ डेस्क.

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