गया, 25 अगस्त 2026: बिहार में 17 अगस्त से लागू नई पेपरलेस जमीन रजिस्ट्री व्यवस्था और बढ़े हुए शुल्क को लेकर विरोध तेज हो गया है। राज्य के अलग-अलग रजिस्ट्री कार्यालयों में डीड राइटर और मुंशी इस व्यवस्था के खिलाफ अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे हैं। उनका कहना है कि नई प्रक्रिया से उनके रोजगार पर संकट पैदा हुआ है।
दूसरी ओर, ग्रामीण इलाकों के किसान, मजदूर और अन्य आम लोग भी नई डिजिटल प्रक्रिया को लेकर परेशानी का सामना कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि डिजिटल हस्ताक्षर और ओटीपी आधारित प्रक्रिया की पर्याप्त जानकारी नहीं होने के कारण कई लोगों को जमीन की खरीद-बिक्री से जुड़ी औपचारिकताओं को समझने में कठिनाई हो रही है।
गया रजिस्ट्री कार्यालय में कांग्रेस नेताओं ने दिया समर्थन
गयाजी रजिस्ट्री कार्यालय में चल रहे धरने को कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने समर्थन दिया। जिला कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष रजनीश कुमार झुंना, बिहार प्रदेश कांग्रेस कमिटी के प्रदेश प्रतिनिधि विजय कुमार मिट्ठू, पूर्व विधायक मोहम्मद खान अली, जिला कांग्रेस उपाध्यक्ष युगल किशोर सिंह, विद्या शर्मा और टिंकू गिरी समेत कई नेता धरना स्थल पर पहुंचे।
इस दौरान नेताओं ने वहां मौजूद डीड राइटरों और मुंशियों को संबोधित किया और नई रजिस्ट्री व्यवस्था तथा शुल्क वृद्धि पर सरकार से पुनर्विचार करने की मांग रखी।
रोजगार और आम लोगों की परेशानी का मुद्दा
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि पेपरलेस व्यवस्था लागू होने के बाद बड़ी संख्या में डीड राइटर और मुंशी अपने रोजगार को लेकर चिंतित हैं। उनका कहना था कि इन लोगों की आजीविका लंबे समय से जमीन की रजिस्ट्री से जुड़े काम पर निर्भर रही है और नई व्यवस्था ने उनके सामने रोजगार का संकट खड़ा कर दिया है।
नेताओं ने बढ़े हुए रजिस्ट्री शुल्क को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए। उनके अनुसार, शुल्क में बड़ी वृद्धि से किसान, मजदूर और सीमित आय वाले परिवारों के लिए जमीन की खरीद-बिक्री का खर्च बढ़ गया है।
डिजिटल प्रक्रिया को लेकर उठाए सवाल
धरना स्थल पर कांग्रेस नेताओं ने ग्रामीण आबादी के बीच डिजिटल प्रक्रिया की जानकारी की कमी का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि डिजिटल हस्ताक्षर और ओटीपी जैसी प्रक्रियाओं से पूरी तरह परिचित नहीं होने वाले लोगों के लिए नई व्यवस्था को समझना आसान नहीं है।
उन्होंने यह भी आशंका जताई कि डिजिटल प्रक्रिया में पर्याप्त सावधानी और सुरक्षा व्यवस्था नहीं होने पर साइबर धोखाधड़ी या फर्जीवाड़े की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। कांग्रेस ने सरकार से मांग की कि व्यवस्था लागू करने से पहले आम लोगों और रजिस्ट्री से जुड़े कर्मियों की व्यावहारिक परेशानियों पर ध्यान दिया जाए।
राजस्व नुकसान का भी किया दावा
कांग्रेस नेताओं ने दावा किया कि 17 अगस्त से नई व्यवस्था लागू होने के बाद रजिस्ट्री का काम प्रभावित हुआ है और इससे राज्य सरकार को राजस्व का नुकसान हो रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार को ऐसी व्यवस्था पर पुनर्विचार करना चाहिए, जिससे एक तरफ आम लोगों को राहत मिले और दूसरी ओर सरकारी राजस्व पर भी प्रतिकूल असर न पड़े।
चरणबद्ध आंदोलन की चेतावनी
कांग्रेस नेताओं ने राज्य सरकार से पेपरलेस रजिस्ट्री व्यवस्था और बढ़े हुए शुल्क को जनहित में वापस लेने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि सरकार ने इन मांगों पर सकारात्मक कदम नहीं उठाया, तो कांग्रेस पार्टी आगे चरणबद्ध आंदोलन शुरू करेगी।
फिलहाल विभिन्न रजिस्ट्री कार्यालयों में डीड राइटर और मुंशियों का विरोध जारी है। इस पूरे मामले में अब नजर राज्य सरकार के अगले कदम पर है।
रिपोर्ट : विश्वनाथ आनंद.
