New Delhi, 30 Aug. 2026 : एक बात तो साफ है कि बैंकों में जमा आम आदमी का पैसा है। जब कोई बड़ा कर्जदार वापस नहीं चुकाता तो बैंकों की बैलेंस शीट खराब होती है और आखिरकार नुकसान किसी न किसी रूप में आम जमाकर्ता तक पहुंचता है। 8 अगस्त 2024 को राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने इसी मुद्दे पर जोरदार भाषण दिया। उन्होंने आज 30 अगस्त को एक बार फिर प्रेस वार्ता में देश में बैंकों से हुई जनता के पैसों की लूट का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सरकार ने “हेयरकट” के नाम पर 43 कंपनियों का कुल 5,44,434 करोड़ रुपये बकाया में से 3,53,655 करोड़ रुपये माफ कर दिए। सिर्फ 1,90,779 करोड़ रुपये ही वसूल हो सके।
उन्होंने आज फिर कुछ कंपनियों के नाम पढ़कर सुनाए और कहा कि यह कागज सरकार की तरफ से उपलब्ध कराए गए हैं।
संजय सिंह ने किन कंपनियों का जिक्र किया?
सिंह ने कुछ बड़े नाम गिनाए। मिसाल के तौर पर नीचे सिंह द्वारा उल्लिखित या संबंधित प्रमुख कंपनियों की जानकारी दी है (मुख्य रूप से IBC रिजॉल्यूशन मामलों से)। आंकड़े लगभग हैं और विभिन्न रिपोर्ट्स/NCLT ऑर्डर से लिए गए। “लोन लिया” का मतलब admitted claims (बकाया), “वापस” का मतलब resolution plan में मिली राशि।
प्रमुख कंपनियां (सिंह के भाषण और रिपोर्ट्स से)
1. Adhunik Metaliks Ltd.
काम: स्टील निर्माण।
बकाया (approx): ₹5,371 करोड़।
वसूली: ₹410 करोड़।
हेयरकट: Rs. 4,961 करोड़ (लगभग 92%)।
रिजॉल्यूशन: Liberty House (UK) ने लिया।
मालिक/प्रमोटर (पुराना): Adhunik Group से जुड़े। पता: मुख्य रूप से ओडिशा/कोलकाता क्षेत्र (पुराने प्लांट)।
2. Alok Industries Ltd.
काम: टेक्सटाइल (कपड़ा, यार्न आदि)।
बकाया: Rs. 29,524 करोड़।
वसूली: Rs. 5,052–5,115 करोड़।
हेयरकट: Rs. 24,472 करोड़ (लगभग 83–84%)।
रिजॉल्यूशन: Reliance Industries + JM Financial ARC। अब Reliance नियंत्रण में।
पुराने प्रमोटर: अशोक और दिलीप झुनझुनवाला परिवार। पता: मुंबई/सूरत क्षेत्र (रजिस्टर्ड ऑफिस मुंबई के आसपास)।
3. Amtek Auto Ltd. (और ग्रुप कंपनियां)
काम: ऑटो कंपोनेंट्स (पार्ट्स)।
बकाया: Rs. 12,641 करोड़।
वसूली: Rs. 2,615–2,620 करोड़।
हेयरकट: Rs. 10,000+ करोड़ (लगभग 80%)।
रिजॉल्यूशन: Deccan Value Investors आदि।
प्रमोटर: अरविंद धाम (Amtek Group)। पता: दिल्ली/हरियाणा क्षेत्र। (बाद में धोखाधड़ी के आरोप भी लगे)।
4. Bhushan Power & Steel Ltd.
काम: स्टील।
बकाया: Rs. 47,158 करोड़।
वसूली: Rs. 19,350 करोड़।
हेयरकट: Rs. 27,808 करोड़ (लगभग 59%)।
रिजॉल्यूशन: JSW Steel ने लिया।
पुराने प्रमोटर: भूषण परिवार (Sanjay/रवि भूषण आदि)। पता: ओडिशा/पंजाब प्लांट्स।
5. Bhushan Steel Ltd.
काम: स्टील।
बकाया: Rs. 56,022 करोड़।
वसूली: Rs. 35,571 करोड़।
हेयरकट: Rs. 20,451 करोड़ (लगभग 37%)।
रिजॉल्यूशन: Tata Steel ने लिया।
पुराने प्रमोटर: भूषण परिवार। पता: ओडिशा मुख्य।
6. Dewan Housing Finance Corporation Ltd. (DHFL)
काम: हाउसिंग फाइनेंस (घर के लोन)।
बकाया: Rs. 87,083 करोड़।
वसूली: Rs. 37,161–37,250 करोड़।
हेयरकट: Rs. 49,922 करोड़ (लगभग 57%)।
रिजॉल्यूशन: Piramal Group।
प्रमोटर: कपिल और धीरज वाधवन। पता: मुंबई। (धोखाधड़ी के आरोप, जेल में रहे)।
7. Lanco Thermal Power / Lanco Infratech related
काम: पावर/इन्फ्रा।
बकाया: Rs. 33,331 करोड़ (एक इकाई)।
वसूली: बहुत कम (Rs. 136 करोड़ कुछ रिपोर्ट्स में)।
हेयरकट: बहुत ऊंचा (90%+)।
प्रमोटर: लैंको ग्रुप (एल. माधव रेड्डी आदि)। पता: हैदराबाद।
8. Reliance Infratel Ltd.
काम: टेलीकॉम टावर्स/इन्फ्रा।
बकाया: Rs. 41,055 करोड़।
वसूली: Rs. 4,236–4,267 करोड़।
हेयरकट: Rs. 36,819 करोड़ (लगभग 90%)।
रिजॉल्यूशन: Reliance Projects से जुड़ा।
प्रमोटर: अनिल अंबानी ग्रुप (पुराना)। पता: मुंबई।
अन्य उल्लिखित/संबंधित (भाषण ट्रांसक्रिप्ट से आंशिक):
Asian Colour Coated Ispat Ltd. (स्टील कोटेड) – JSW ने लिया।
Electrosteel Steels Ltd. – Vedanta।
Castex Technologies, Deccan Chronicle Holdings, Dighi Port, EMC Ltd. आदि – कुछ के बकाया और हेयरकट ऊंचे थे।
Videocon Industries (अलग बड़े मामले में ~95% हेयरकट) और Essar Steel (बेहतर रिकवरी ~80%+) भी अक्सर चर्चा में आते हैं, लेकिन सिंह की 43 में सटीक शामिल होना निश्चित नहीं।
भारत के बड़े लोन डिफॉल्टर्स
यहाँ कुछ प्रमुख नाम हैं जिन पर बैंकों का बकाया है:
1. विजय माल्या (किंगफिशर एयरलाइंस)
बकाया: ₹6,777 करोड़ से ₹9,000 करोड़ तक (ब्याज समेत)
वसूली: बैंकों ने ₹14,131 करोड़ की संपत्ति जब्त कर वसूल की
स्थिति: UK में रह रहे हैं, FEO (Fugitive Economic Offender) घोषित
2. नीरव मोदी (PNB घोटाला)
बकाया: ₹13,000 करोड़ से अधिक
स्थिति: FEO घोषित, प्रत्यर्पण प्रक्रिया चल रही है
3. मेहुल चौकसी (गीतांजली जेम्स)
बकाया: PNB घोटाले में शामिल
स्थिति: विदेश में फरार
4. सुभाष चंद्रा (एस्सेल ग्रुप)
कुल लोन: ₹45,000 करोड़ (दावा)
चुकाया गया: ₹43,000 करोड़ (उनका दावा)
पर्सनल गारंटी केस: ₹22,006 करोड़ क्लेम, ₹6.5 करोड़ सेटलमेंट
5. अनिल अंबानी (RCom)
बकाया: हजारों करोड़ रुपये
स्थिति: NCLT प्रक्रिया चल रही है
6. SITI Networks
बकाया: ₹1,206 करोड़ (8 लेनडेर्स को)
लेनडेर्स: ARCIL, Axis Bank, IDBI Bank, IndusInd Bank, RBL, ABFL आदि
बैंक ऑफ़ बड़ौदा का राइट-ऑफ़ स्कैंडल (RTI से खुलासा)
Bank of Baroda ने FY2020-21 से FY2025-26 तक ₹35,715 करोड़ के लोन राइट-ऑफ किए (₹100 करोड़ से ऊपर के अकाउंट्स)।
लेकिन बैंक ने RTI के तहत बड़े डिफॉल्टर्स के नाम बताने से मना कर दिया, “प्राइवेसी” का हवाला देते हुए।
ये आंकड़े मुख्य रूप से IBC के तहत सुलझाए गए मामलों से जुड़े हैं। कई मामलों में हेयरकट 80-90 प्रतिशत तक पहुंच गया था। उदाहरण के लिए आलोक इंडस्ट्रीज में रिलायंस इंडस्ट्रीज-जेएम फाइनेंशियल के प्लान में बैंकों को करीब 84-86 प्रतिशत का हेयरकट झेलना पड़ा था।
असल तस्वीर और सरकारी आंकड़े क्या कहते हैं?
RBI और वित्त मंत्रालय के संसद में दिए गए जवाबों के मुताबिक, बैंकों ने पिछले कई सालों में लाखों करोड़ के NPA राइट-ऑफ किए हैं। राइट-ऑफ का मतलब बैलेंस शीट साफ करना होता है, कर्ज माफ करना नहीं। 2014-15 से 2023-24 के बीच अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों ने कुल मिलाकर 16 लाख करोड़ से ज्यादा के NPA राइट-ऑफ किए। इनमें बड़े उद्योग और सेवा क्षेत्र का हिस्सा काफी बड़ा रहा।
IBC के तहत कुल मिलाकर क्रेडिटर्स को कई लाख करोड़ वसूल हुए हैं, लेकिन औसत रिकवरी रेट अक्सर 30 प्रतिशत के आसपास या उससे कम रहा है। यानी औसत हेयरकट 60-70 प्रतिशत के आसपास। हाल के सालों में कुछ रिपोर्ट्स में रिकवरी और भी कम हो गई। सरकार का दावा है कि IBC की वजह से बैंकों के ग्रॉस NPA अनुपात में भारी गिरावट आई है—करीब 11 प्रतिशत से घटकर 2 प्रतिशत के आसपास।
सिंह के 43 कंपनियों वाले खास आंकड़े का पूरा आधिकारिक सत्यापन अलग से उपलब्ध नहीं है, लेकिन उन्होंने सदन में जो नाम गिनाए वे IBC के बड़े मामलों से मेल खाते हैं। बैंक अक्सर बड़े कर्जदारों के नाम RTI में नहीं बताते, हालात की गोपनीयता का हवाला देते हुए।
आम आदमी का पैसा कहां जाता है?
जब बैंक बड़े कर्ज राइट-ऑफ या हेयरकट लेते हैं तो प्रावधान (प्रोविजन) पहले से बना चुके होते हैं। फिर भी कुल नुकसान बैंक की पूंजी पर असर डालता है। कई विशेषज्ञ कहते हैं कि देर से कार्रवाई, कमजोर एसेट वैल्यू और सीमित खरीदारों की वजह से हेयरकट ऊंचा रहता है। वहीं कुछ मामलों में कंपनियों के पुराने मालिकों पर धोखाधड़ी या पैसे डायवर्ट करने के आरोप भी लगे हैं, जैसे अमटेक ग्रुप के मामले में।
सरकार कहती है कि किसान कर्ज माफी अलग मुद्दा है और PM-KISAN जैसी योजनाओं से सीधा फायदा पहुंच रहा है। विपक्ष का जोर है कि बड़े डिफॉल्टरों को राहत आसानी से मिल जाती है जबकि छोटे लोगों को इंतजार करना पड़ता है।
यह पूरी कहानी सिर्फ आंकड़ों की नहीं है। बैंकों में जमा पैसा आम लोगों का भरोसा है। जब बड़े कर्जदारों के मामलों में भारी हेयरकट लगते हैं तो सवाल उठना लाजमी है कि सिस्टम कितना निष्पक्ष है। IBC ने कई कंपनियों को बचाया और बैंकों की सेहत सुधारी, लेकिन ऊंचे हेयरकट अब भी बहस का विषय बने हुए हैं। सही जानकारी और पारदर्शिता ही इस बहस को आगे बढ़ा सकती है।
रिपोर्ट : इस्मा टाइम्स न्यूज़ डेस्क.
