पत्रकार सुरक्षा कानून की मांग फिर उठी
बिहार, 19 अगस्त 2026: देशभर के पत्रकारों की सुरक्षा के लिए प्रभावी राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा कानून बनाने की मांग को लेकर अखिल भारतीय पत्रकार सुरक्षा समिति ने केंद्र सरकार के सामने अपनी पहल एक बार फिर आगे बढ़ाई है।
संगठन ने पहले प्रधानमंत्री कार्यालय के माध्यम से पत्रकार सुरक्षा कानून का मुद्दा उठाया था। इसके बाद भारतीय प्रेस परिषद से मिले जवाब पर असंतोष जताते हुए अपील की गई। अब संगठन ने राष्ट्रीय स्तर पर पत्रकार सुरक्षा कानून लागू करने की मांग को लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय में एक नया आवेदन भी प्रस्तुत किया है।
अखिल भारतीय पत्रकार सुरक्षा समिति के राष्ट्रीय संगठन महासचिव महफूज़ खान ने यह मामला उठाया है। उनका कहना है कि इस पहल का मकसद सिर्फ पहले की गई कोशिशों या रिपोर्टों की जानकारी लेना नहीं है, बल्कि उन पुराने प्रयासों और सिफारिशों के आधार पर अब ठोस और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित कराना है।
पहले आवेदन के बाद क्या हुआ?
महफूज़ खान ने बताया कि पूर्व में दिया गया आवेदन संख्या PMOPG/E/2026/0143964, दिनांक 3 अगस्त 2026, प्रधानमंत्री कार्यालय में दर्ज हुआ था। इस मामले में भारतीय प्रेस परिषद की ओर से 17 अगस्त 2026 को जवाब दिया गया।
उनके अनुसार, भारतीय प्रेस परिषद के जवाब में बताया गया कि वर्ष 2015 में पत्रकार सुरक्षा को लेकर एक रिपोर्ट तैयार की गई थी। साथ ही पत्रकार सुरक्षा से जुड़े विधेयकों पर विचार करते हुए केंद्र सरकार से केंद्रीय कानून बनाने की सिफारिश किए जाने का भी उल्लेख किया गया।
संगठन ने जवाब पर जताई असहमति
अखिल भारतीय पत्रकार सुरक्षा समिति का कहना है कि भारतीय प्रेस परिषद के जवाब से यह बात साफ होती है कि पत्रकारों की सुरक्षा के लिए राष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी कानूनी व्यवस्था की जरूरत कोई नई मांग नहीं है। इस विषय पर पहले भी रिपोर्ट और सिफारिशें की जा चुकी हैं।
लेकिन संगठन का कहना है कि उसकी मूल मांग केवल इन पुरानी रिपोर्टों और सिफारिशों की जानकारी हासिल करना नहीं थी। इसी वजह से भारतीय प्रेस परिषद के जवाब से असंतुष्ट होकर संगठन ने अपील संख्या MOIAB/E/A/26/0000386, दिनांक 18 अगस्त 2026, को प्रस्तुत की।
अब संगठन की मुख्य मांग क्या है?
अपील में अखिल भारतीय पत्रकार सुरक्षा समिति ने साफ किया कि वह यह जानना चाहती है कि देशभर के पत्रकारों की सुरक्षा के लिए प्रभावी राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा कानून बनाने की दिशा में वर्तमान समय में केंद्र सरकार की ओर से क्या ठोस कार्रवाई की जा रही है।
संगठन ने इसी के साथ राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा कानून की मांग एक बार फिर केंद्र सरकार के सामने रखी और प्रधानमंत्री कार्यालय में नया आवेदन भी दिया।
इस नए आवेदन का Registration No. PMOPG/E/2026/0156778 है। यह आवेदन 18 अगस्त 2026 को प्रधानमंत्री कार्यालय में प्राप्त हुआ।
पूर्व सिफारिशों पर कार्रवाई की स्थिति बताने की मांग
नए आवेदन में केंद्र सरकार से मांग की गई है कि वर्ष 2015 की पत्रकार सुरक्षा से जुड़ी रिपोर्ट और केंद्रीय कानून बनाने के संबंध में की गई पुरानी सिफारिशों पर अब तक हुई कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट की जाए।
इसके साथ ही संगठन ने यह भी जानना चाहा है कि वर्तमान में राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा कानून को लेकर कोई प्रस्ताव, नीति, विधायी प्रक्रिया या दूसरी कार्रवाई विचाराधीन है या नहीं।
अखिल भारतीय पत्रकार सुरक्षा समिति ने यह भी अनुरोध किया है कि पत्रकार सुरक्षा कानून के संभावित प्रारूप और विधायी व्यवस्था को लेकर पत्रकार संगठनों, पत्रकार प्रतिनिधियों और अन्य संबंधित पक्षों से जरूरी परामर्श की प्रक्रिया शुरू करने पर विचार किया जाए।
पत्रकारों की सुरक्षा को लोकतंत्र से जोड़कर देखा
महफूज़ खान ने कहा कि पत्रकार लोकतंत्र के महत्वपूर्ण प्रहरी हैं। जनहित के मुद्दे, भ्रष्टाचार, प्रशासनिक अनियमितताएं, सामाजिक समस्याएं और आम जनता की आवाज सामने लाने के दौरान पत्रकारों को कई बार धमकी, हिंसा, हमले और दूसरे तरह के दबाव का सामना करना पड़ता है।
उनका कहना है कि इसलिए पत्रकारों की सुरक्षा सिर्फ पत्रकार संगठनों का मामला नहीं है। यह स्वतंत्र पत्रकारिता, लोकतंत्र और जनहित से जुड़ा गंभीर विषय है।
सरकार के विरोध में नहीं है मांग
महफूज़ खान ने कहा कि अखिल भारतीय पत्रकार सुरक्षा समिति की मांग किसी सरकार, मंत्रालय या संस्था के विरोध में नहीं है। संगठन का उद्देश्य देशभर के पत्रकारों को सुरक्षित माहौल उपलब्ध कराना और स्वतंत्र तथा निर्भीक पत्रकारिता के लिए प्रभावी एवं स्थायी कानूनी व्यवस्था सुनिश्चित कराना है।
कार्रवाई नहीं हुई तो लोकतांत्रिक तरीके से अभियान
अखिल भारतीय पत्रकार सुरक्षा समिति ने केंद्र सरकार से मांग की है कि पूर्व की सिफारिशों पर हुई कार्रवाई, मौजूदा स्थिति और आगे की प्रस्तावित कार्रवाई के बारे में स्पष्ट और तथ्यात्मक जवाब दिया जाए। इसके साथ ही राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा कानून बनाने की दिशा में जरूरी कदम उठाए जाएं।
संगठन ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि इस मुद्दे पर अपेक्षित स्तर पर ठोस कार्रवाई नहीं होती है, तो संविधान और कानून के दायरे में रहते हुए शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक जनजागरूकता अभियान चलाया जाएगा।
इसके तहत प्रतिनिधिमंडल, धरना और अन्य वैधानिक कार्यक्रमों के माध्यम से राष्ट्रीय पत्रकार सुरक्षा कानून की मांग को आगे बढ़ाया जाएगा।
अब सिर्फ पुरानी सिफारिशों का जिक्र नहीं, कार्रवाई की जरूरत
अखिल भारतीय पत्रकार सुरक्षा समिति का कहना है कि अब जरूरत केवल पहले किए गए प्रयासों और पुरानी सिफारिशों का उल्लेख करने की नहीं है। जरूरत इस बात की है कि उन प्रयासों का क्या परिणाम निकला, वर्तमान स्थिति क्या है और आगे की ठोस कार्ययोजना क्या होगी, यह साफ तौर पर सामने आए।
संगठन को उम्मीद है कि केंद्र सरकार पत्रकारों की सुरक्षा से जुड़े इस गंभीर जनहित के विषय पर सकारात्मक और परिणामकारी कार्रवाई करेगी।
रिपोर्ट : विश्वनाथ आनंद.
