आज राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम यानी एसआईटी ने अपनी अंतिम रिपोर्ट में ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय और पूर्व सदस्य अनिल मिश्रा को साफ़ चिट्ठी दे दी है। यानी जांच में इन दोनों की कोई भूमिका नहीं पाई गई। उत्तर प्रदेश गृह विभाग ने यह रिपोर्ट श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को सौंप दी है ताकि आगे की कार्रवाई हो सके।
यह खबर 18 अगस्त 2026 की है और कई विश्वसनीय समाचार माध्यमों ने इसकी पुष्टि की है। आइए पूरी कहानी को समझते हैं।
मामला कैसे शुरू हुआ
अयोध्या में भगवान राम के भव्य मंदिर में भक्तों द्वारा चढ़ाया गया चढ़ावा यानी नकद दान, सोना-चांदी और अन्य भेंट का प्रबंधन ट्रस्ट के हाथ में है। जून 2026 के आसपास अचानक खबर फैली कि गिनती कक्ष में कुछ गड़बड़ हो रही है। कुछ कर्मचारियों पर आरोप लगा कि वे चढ़ावे की नकदी छिपाकर ले जा रहे हैं।
ट्रस्ट ने खुद राज्य सरकार से जांच की मांग की। 13 जून 2026 को योगी आदित्यनाथ सरकार ने तीन सदस्यीय एसआईटी बनाई। इसकी अध्यक्षता लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत को दी गई। साथ में आईजी किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन कुमार भी शामिल थे।
एसआईटी ने 27 अप्रैल से 5 जून 2026 तक की सीसीटीवी फुटेज खंगाली। उसमें करीब 70 मौके ऐसे मिले जहां कर्मचारी नकदी छिपाते नजर आए। प्रारंभिक रिपोर्ट में कई खामियां बताई गईं – कर्मचारी सत्यापन में कमी, सीसीटीवी निगरानी कमजोर और नकदी बैंक में जमा करने की प्रक्रिया में अनियमितता।
इस रिपोर्ट के आधार पर ट्रस्ट सदस्य कृष्ण मोहन की शिकायत पर 25 जून को राम जन्मभूमि थाने में एफआईआर दर्ज हुई। आठ लोगों के नाम आए – अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडेय, रमाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और राम शंकर यादव उर्फ टिन्नू। सभी गिरफ्तार हो गए। इनके पास से करीब 80 लाख रुपये नकद बरामद हुए। अनुमान था कि कुल गबन करोड़ों का हो सकता है।
चंपत राय और अनिल मिश्रा का इस्तीफा
जब मामला गरमाया तो ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और सदस्य अनिल मिश्रा पर भी सवाल उठने लगे। चंपत राय विश्व हिंदू परिषद से जुड़े वरिष्ठ कार्यकर्ता हैं और मंदिर निर्माण के दौरान प्रमुख भूमिका निभाते रहे। अनिल मिश्रा ट्रस्टी थे और कुछ प्रशासनिक काम देखते थे।
दोनों ने 26-27 जून के आसपास नैतिक आधार पर इस्तीफा दे दिया। उन्होंने कहा कि निष्पक्ष जांच के लिए वे पद छोड़ रहे हैं। बाद में दोनों से एसआईटी ने पूछताछ भी की। चंपत राय ने साफ कहा कि उन्होंने खुद शिकायत की थी और गड़बड़ी का पता चलते ही कार्रवाई शुरू कराई। वे किसी भी गबन में शामिल नहीं थे।
एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट क्या कहती है
अब अगस्त 2026 में अंतिम रिपोर्ट आ गई। सूत्रों के मुताबिक रिपोर्ट में केवल उन आठ आरोपियों के नाम हैं जो पहले से गिरफ्तार हैं। चंपत राय और अनिल मिश्रा का नाम कहीं नहीं है। यानी जांच दल ने इन्हें दोषमुक्त करार दिया है।
उत्तर प्रदेश गृह विभाग ने सोमवार को यह रिपोर्ट ट्रस्ट को सौंप दी। अब ट्रस्ट तय करेगा कि आंतरिक स्तर पर और क्या कदम उठाने हैं। ध्यान रहे कि सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में बनी दूसरी जांच टीम अभी भी काम कर रही है। लेकिन राज्य सरकार की एसआईटी ने इन दोनों को साफ़ पाते हुए चिट्ठी दे दी है।
इस पूरे प्रकरण से क्या सबक
राम मंदिर सिर्फ एक इमारत नहीं, करोड़ों भक्तों की आस्था का केंद्र है। भक्त अपनी गाढ़ी कमाई का हिस्सा भगवान के नाम पर चढ़ाते हैं। इसलिए व्यवस्था में पारदर्शिता बहुत जरूरी है। इस मामले में खामियां जरूर निकलीं लेकिन जांच ने साबित किया कि ऊपरी स्तर पर कोई साजिश नहीं थी। गलती निचले स्तर के कुछ कर्मचारियों की थी।
ट्रस्ट ने इस्तीफे स्वीकार किए, सुधार के कदम भी उठाए। सीईओ नियुक्त करने की बात भी चली। अब रिपोर्ट आने के बाद उम्मीद है कि व्यवस्था और मजबूत होगी। नकदी गिनने का तरीका, सीसीटीवी, कर्मचारी जांच – सब कुछ सख्त होगा।
चंपत राय ने पूछताछ में कहा था कि उनका फर्ज था कि कोई गड़बड़ी न हो और उन्होंने जैसे ही पता चला कार्रवाई की। एसआईटी ने भी यही पाया। अनिल मिश्रा के बारे में भी कोई सबूत नहीं मिला जो उन्हें दोषी ठहराए।
अब आगे क्या हो
ट्रस्ट अब रिपोर्ट के आधार पर फैसला लेगा। आरोपी आठों पर मुकदमा चल रहा है। बरामद रकम वापस आएगी। बाकी जांच भी पूरी होगी। भक्तों का विश्वास बनाए रखना सबसे बड़ा काम है। अयोध्या अब सिर्फ तीर्थ नहीं, पूरे देश की आस्था का प्रतीक बन चुका है। ऐसे में हर पैसा और हर प्रक्रिया साफ-सुथरी होनी चाहिए। रिपोर्ट : इस्मा टाइम्स न्यूज़ डेस्क.
