-एल.एस. हरदेनिया.
सम्पूर्ण देश में कई स्थानों पर कश्मीर के रहने वालों के विरूद्ध दुर्व्यवहार की घटनाएं सुनने को मिलती हैं। अभी हाल में भोपाल में कश्मीर के दो नागरिकों के साथ दुर्व्यवहार की घटना सामने आई। वे दो छात्र जिस मोहल्ले में रहते थे, उनसे वह मोहल्ला छोड़ने को कहा गया। बात यहां तक बढ़ी कि जिस मकान में वे रह रहे थे, उसके मालिक पर दबाव बनाया गया कि उन्हें अपने यहां से बेदखल कर दे।
यह घटना इस बात की सूचक है कि हम कश्मीर को भारत का हिस्सा मानते हैं परंतु कश्मीरियों को भारत का नागरिक नहीं मानते। कश्मीर से आए हुए व्यापारियों के साथ दुर्व्यवहार किया जाता है। जिन कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में वे पढ़ते हैं, वहां उनके साथ भेदभाव किया जाता है। कश्मीर के कई व्यापारी अपनी वस्तुएं बेचने के लिए भारत के कई स्थानों पर जाते हैं, वहां भी उनके साथ दुर्व्यवहार किया जाता है।
अभी हाल की इन घटनाओं में कश्मीरी छात्रों के संघ ने पुलिस के संज्ञान में लाया और पुलिस के सर्वोच्च अधिकारी ने उन्हें सुरक्षा का आश्वासन दिया। परंतु पुलिस कहां-कहां उनकी रक्षा करेगी? यदि हम उनके साथ आत्मीय का व्यवहार नहीं करेंगे, तो वे कैसे भारत को अपनी मातृभूमि मानेंगे? हमें इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि हम कश्मीर के लोगों के साथ भरपूर स्नेह का वातावरण बनाएं।
मैं बहुत समय पहले कश्मीर गया था। वहां के मेडिकल कॉलेज के छात्रों से मिला। उनसे मैंने पूछा कि आप लोग क्यों अपने आप को भारत का हिस्सा नहीं मानते? उन छात्रों ने जवाब दिया कि हम उस देश पर कैसे विश्वास करें जिसने हमारे सबसे महान नेता शेख अब्दुल्ला को गिरफ्तार किया। हालांकि फिर उनके व्यवहार में बदलाव आया और इस बदलाव के चलते उनके बेटे और उनके पोते को मुख्यमंत्री बनाकर हमने उन्हें सम्मान दिया। धारा 370 क्यों लागू की गई और क्यों हटाई गई मैं इस विवाद में नहीं पड़ना चाहूंगा।
हमें पुरजोर कोशिश करनी चाहिए कि जहां भी कश्मीर के नागरिक रहना चाहते हैं, व्यापार करना चाहते हैं, पढ़ना चाहते हैं, नौकरी करना चाहते हैं वहां उन्हें कोई परेशान न करे और यह स्पष्ट करें कि हम कश्मीर को अपना बनाए रखना चाहते हैं, तो हम कश्मीरियों को भी भरपूर मोहब्बत देंगे। पहलगाम की घटना के बाद सारे भारत के लोग कश्मीर जाने में हिचकिचाने लगे हैं।
कश्मीर के नागरिकों से भी मेरा निवेदन है कि वे ऐसा कोई भी अवसर न खोएं जिससे वे स्वयं को कश्मीर के साथ ही भारत का नागरिक होने पर गर्व महसूस कर सकें।
