औरंगाबाद में फर्जी प्रमाण पत्र पर बहाल शिक्षिका को लेकर शिक्षा विभाग से सवाल

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औरंगाबाद, बिहार :  जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय, औरंगाबाद में इन दिनों एक नियोजित महिला शिक्षिका को लेकर स्थिति काफी सवाल खड़े करने वाली बनी हुई है। मामला कुटुंबा प्रखंड के भलुआड़ी खुर्द में फर्जी प्रमाण पत्र पर बहाल बताई जा रही एक नियोजित महिला शिक्षिका से जुड़ा है। संवाददाता ने जब इस शिक्षिका के वर्तमान कार्यस्थल की जानकारी लेने के लिए जिला शिक्षा पदाधिकारी दया शंकर प्रसाद सिंह और कार्यालय के लिपिक भानु प्रताप से बात की, तो मिले जवाबों ने कई सवाल खड़े कर दिए।

संवाददाता ने सबसे पहले कार्यालय में कार्यरत लिपिक भानु प्रताप से पूछा कि उक्त महिला शिक्षिका वर्तमान में जिले के अंदर किस विद्यालय में कार्यरत हैं। इस पर उन्होंने कहा कि वर्तमान में वह महिला शिक्षिका कहां कार्यरत हैं, इसकी जानकारी उन्हें नहीं है। उन्होंने यह संभावना भी जताई कि शायद उक्त शिक्षिका का तबादला किसी दूसरे जिले में हो गया हो।

इस पर संवाददाता ने सवाल किया कि जब उक्त महिला शिक्षिका की बहाली नियोजित शिक्षिका के रूप में हुई थी, तो उनका दूसरे जिले में स्थानांतरण कैसे हो सकता है? इसके जवाब में लिपिक भानु प्रताप ने कहा कि शुरुआत में जिन शिक्षकों और शिक्षिकाओं की बहाली नियोजित शिक्षक या शिक्षिका के रूप में हुई थी, बाद में विशिष्ट शिक्षक या शिक्षिका बनने के कारण उनका दूसरे जिले में भी स्थानांतरण हुआ है। इसलिए संभव है कि उक्त शिक्षिका का भी किसी दूसरे जिले के विद्यालय में तबादला हो गया हो। हालांकि, उन्होंने कहा कि इसकी जानकारी उन्हें नहीं है।

अभिलेख देखकर भी नहीं बता पाए वर्तमान विद्यालय

इसके बाद संवाददाता ने लिपिक से कहा कि जानकारी के अनुसार उक्त महिला शिक्षिका अभी औरंगाबाद जिले के अंदर ही किसी विद्यालय में कार्यरत हैं। ऐसे में उनका रिकॉर्ड कार्यालय में जरूर होना चाहिए और अभिलेख देखकर यह बताया जा सकता है कि वह वर्तमान में किस विद्यालय में कार्यरत हैं।

इस पर लिपिक भानु प्रताप ने कहा कि इसका पता लगाना होगा और इसमें समय लगेगा। उन्होंने यह भी कहा कि वे पता लगाने का प्रयास करेंगे कि उक्त नियोजित महिला शिक्षिका वर्तमान में कहां और किस विद्यालय में कार्यरत हैं।

जिला शिक्षा पदाधिकारी से भी मिला स्पष्ट जवाब नहीं

इसके बाद संवाददाता ने जिला शिक्षा पदाधिकारी दया शंकर प्रसाद सिंह से उनके कार्यालय कक्ष में इसी मामले को लेकर सवाल किया। उनसे पूछा गया कि उक्त महिला शिक्षिका, जिनकी बहाली फर्जी प्रमाण पत्र पर होने की बात सामने आई है, वर्तमान में किस विद्यालय में ड्यूटी कर रही हैं।

जिला शिक्षा पदाधिकारी ने भी इस सवाल का स्पष्ट जवाब देने के बजाय कहा कि उक्त महिला शिक्षिका की वर्तमान ड्यूटी कहां है, इसका पता लगाना बहुत कठिन काम है। उन्होंने संवाददाता से यह भी कहा कि वे बताएं कि असली काम क्या करना है, वह काम कर देंगे।

वेतन भुगतान को लेकर भी उठाया गया सवाल

संवाददाता ने जिला शिक्षा पदाधिकारी से कहा कि उक्त नियोजित महिला शिक्षिका की बहाली उनके कार्यालय से ही फर्जी प्रमाण पत्र पर होने की बात सामने आई है, जो गंभीर मामला है। साथ ही, जानकारी के मुताबिक वह अभी औरंगाबाद जिले के ही किसी विद्यालय में कार्यरत हैं। ऐसे में विभागीय अभिलेख देखकर यह तो बताया जा सकता है कि वर्तमान में वह किस विद्यालय में कार्यरत हैं।

संवाददाता ने यह भी सवाल उठाया कि यदि उक्त शिक्षिका वर्तमान में कार्यरत हैं और वेतन का भुगतान भी हो रहा है, तो विभाग को उनके वर्तमान विद्यालय की जानकारी होनी चाहिए।

इस पर जिला शिक्षा पदाधिकारी दया शंकर प्रसाद सिंह ने कहा कि पहले शिक्षकों और शिक्षिकाओं का स्थानांतरण उनके कार्यालय से होता था, लेकिन अब शिक्षकों और शिक्षिकाओं का स्थानांतरण पटना से होता है। उनके अनुसार जारी किए गए स्थानांतरण पत्र में ही यह उल्लेख रहता है कि संबंधित शिक्षक या शिक्षिका स्वतः विरमित माने जाएंगे। इसलिए अब उनके कार्यालय की ओर से इसमें कुछ नहीं किया जा सकता।

पुराने विद्यालय से भी जानकारी जुटाने का दिया गया सुझाव

संवाददाता ने फिर सवाल किया कि यह गंभीर मामला है। यदि उक्त महिला शिक्षिका का वेतन विभागीय स्तर से प्राप्त हो रहा है और उनके वर्तमान विद्यालय की जानकारी कार्यालय के पास स्पष्ट नहीं है, तो विभागीय अभिलेखों से इसका पता लगाया जा सकता है।

उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि पूर्व में जिस विद्यालय में उक्त शिक्षिका कार्यरत थीं, वहां के वर्तमान प्रधानाध्यापक या किसी शिक्षक से जानकारी लेकर भी उनके वर्तमान कार्यस्थल का पता लगाया जा सकता है।

इस पर जिला शिक्षा पदाधिकारी ने इन बातों को छोड़ने की बात कहते हुए संवाददाता से कहा कि वे अपना काम बताएं और क्या करना है, वह काम कर देंगे।

जवाबों से उठ रहे हैं कई सवाल

पूरे मामले में जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय से मिले जवाबों के बाद कई सवाल खड़े हो रहे हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि किसी नियोजित महिला शिक्षिका की बहाली फर्जी प्रमाण पत्र पर हुई है और वह वर्तमान में भी किसी विद्यालय में कार्यरत बताई जा रही हैं, तो विभागीय अभिलेखों से उनके वर्तमान कार्यस्थल की जानकारी सामने क्यों नहीं आ पा रही है?

वहीं, संवाददाता के अनुसार, महिला शिक्षिका के वर्तमान कार्यस्थल और वेतन भुगतान से जुड़े सवालों का भी कार्यालय की ओर से स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया। इन परिस्थितियों को देखते हुए यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या औरंगाबाद जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय से फर्जी प्रमाण पत्र पर बहाल बताई जा रही उक्त नियोजित महिला शिक्षिका को बचाने का प्रयास किया जा रहा है।

पूरे घटनाक्रम ने जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, मामले में संबंधित शिक्षिका का पक्ष और विभागीय अभिलेखों से मिलने वाली आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।

रिपोर्ट : अजय कुमार पाण्डेय.

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